एक समय था, जब प्लास्टिक से हमारा जीवन आसान हुआ था, लेकिन आज यही प्लास्टिक हमारी धरती के सबसे बड़े संकटों में से एक बन चुका है. इस संकट के बीच, कूड़ा बीनने वाले लाखों लोग, ऐसे गुमनाम नायकों की तरह हैं –जिनकी मेहनत अक्सर अनदेखी रह जाती है, मगर जिनके हाथों में पर्यावरण को बचाने की असली ताक़त निहित है.... इस साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस, प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने के समाधानों पर केन्द्रित है. इसमें प्लास्टिक के लिए एक सर्कुलर अर्थव्यवस्था की ओर एक न्यायसंगत बदलाव को बढ़ावा देने के उपाय और स्वच्छ भविष्य में, कूड़ा बीनने वाले लोगों की भूमिका को मान्यता दी गई है जिनके समुदाय समाज में हाशिए पर अपनी ज़िन्दगी जीते हैं.क्रिस्टियन जे ब्रियोनेस को हर दिन सुबह, फिलीपींस के बाटाँगास शहर के स्कूलों, रेस्तराँ और शॉपिंग मॉल की एक सूची मिलती है. उनका काम होता है - हर एक जगह जाकर री-सायकलिंग के योग्य सामान इकट्ठा करना, जिसमें प्लास्टिक कचरे की बड़ी मात्रा शामिल होती है. फिर वे इस कचरे को लाकर छाँटते और तौलते हैं.क्रिस्टियन ब्रियोनेस, कूड़ा बीनने वालों के समूह -सैन होसे सीको लैंडफ़िल मल्टीपरपज़ को-ऑपरेटिव का हिस्सा हैं. वह कहते हैं कि यह काम चुनौतीपूर्ण तो है, लेकिन बहुत सन्तोषजनक भी है.26 वर्षीय ब्रियोनेस कहते हैं, “हम जानते हैं कि हम पर्यावरण में योगदान कर रहे हैं, न केवल अपने स्वयं के लाभ के लिए, बल्कि इससे अन्य लोगों की मदद भी होती है.”पर्यावरणीय ख़तराब्रियोनेस उन अनुमानित 2 लाख लोगों में से एक हैं, जो दुनिया भर में कचरा इकट्ठा करने, उसकी छँटाई करने और बेचने का काम करके, अपने जीवन यापन के लिए आय अर्जित करते हैं. इस कचरे में प्लास्टिक भी शामिल होता है, जो विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बढ़ता हुआ पर्यावरणीय ख़तरा बनता जा रहा है.विकासशील देशों में आमतौर पर, औपचारिक पुन: उपयोग और री-सायकलिंग प्रणालियाँ नहीं होतीं.वहाँ कूड़ा बीनने वाले सफ़ाई कर्मी, प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के प्रयासों की अग्रिम पंक्ति में खड़े नज़र आते हैं.संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की संसाधन और बाज़ार शाखा की प्रमुख एलिसा टोंडा कहती हैं, “अनौपचारिक कूड़ा बीनने वाले, ख़ासतौर से कई विकासशील देशों में प्लास्टिक कचरा प्रबन्धन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं." IOM "प्लास्टिक प्रदूषण के ख़िलाफ़ वैश्विक लड़ाई की सफलता हमारी संयुक्त प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है, जिससे कोई भी पीछे नहीं छूटे और प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के समाधानों में कूड़ा बीनने वालों को शामिल किया जाए.”2024 में ही, मानवता ने अनुमानित 40 करोड़ टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न किया, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण संकट और भी बढ़ गया. विशेषज्ञों के अनुसार, इससे नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्रों को नुक़सान पहुँचता है और माइक्रोप्लास्टिक्स जैसे प्लास्टिक में मौजूद हानिकारक रसायनों व प्रदूषकों के लोगों के सम्पर्क में आने से, सम्भावित स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न होते हैं.एक अध्ययन के अनुसार, चाहें अनौपचारिक हों या किसी समूह का हिस्सा, कूड़ा बीनने वाले ब्रियोनेस जैसे लोग, वैश्विक स्तर पर लगभग 60 प्रतिशत प्लास्टिक कचरा बीनने में योगदान करते हैं.लेकिन अक्सर कूड़ा बीनने वाले ये लोग, रोज़गार सम्बन्धी अधिकारों से वंचित रहते हैं और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाओं से भी महरूम रहते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक ऐसे क्षेत्र के लिए बड़ी समस्या है, जिसमें कचरा बीनते समय चोटें लगना या संक्रमण होना आम है.अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) में न्यायसंगत बदलाव पर कार्रवाई कार्यक्रम के निदेशक, मुस्तफ़ै कमाल गुएये कहते हैं, “एक अधिक टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि यह बदलाव न्यायपूर्ण एवं समावेशी हो, और कूड़ा बीनने वाले लोगों के रोज़गार पर मौलिक सिद्धान्तों एवं अधिकारों की गारंदी जाए – जिसमें काम करने का, एक सुरक्षित व स्वस्थ माहौल का अधिकार भी शामिल है.एक न्यायपूर्ण बदलाव में कोई भी पीछे नहीं छूटे. इसमें कूड़ा बीनने वाले लाखों लोग और श्रमिक शामिल हैं, जिनके काम से दुनिया भर में री-सायकलिंग प्रणालियों को मदद मिलती है.”आदर्श उदाहरण UN News/Laura Quinones सैन होसे सीको जैसी सहकारी समितियों को इस न्यायपूर्ण बदलाव के लिए एक आदर्श उदाहरण माना जा रहा है. इस संगठन में 500 सदस्य हैं, जिन्हें नियमित आय, दुर्घटना बीमा और बीमार होने पर पूर्ण पारिश्रमिक के भुगतान के साथ अवकाश मिलता है.ब्रियोनेस कहते हैं कि वह इस काम के लिए आभारी हैं, “कुछ लोग हमारे काम को गन्दा या अप्रिय मान सकते हैं, लेकिन हम उनकी राय को नज़रअन्दाज़ करना ही बेहतर समझते हैं.”ब्रियोनेस, अपने पिता को दिल का दौरा पड़ने के बाद परिवार का भरण-पोषण करने के लिए ही इस सहकारी समूह में शामिल हुए थे. वे कहते हैं, “इस कामकाज के ज़रिए मैं अपना ख़ुद का घर बनाने में सक्षम हुआ. हालाँकि यह घर छोटा है, लेकिन मैं इससे अपने परिवार, अपने पिता की देखभाल कर पाता हूँ, और अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा सुनिश्चित कर सकता हूँ”.कई देश ऐसे क़ानून बनाने पर विचार कर रहे हैं, जो बाज़ार में प्लास्टिक उत्पादों बेचने वालों को, उनके इन उत्पादों के अन्त-जीवन प्रबन्धन की भी ज़िम्मेदारी सौंप सकें. ऐसे में, कूड़ा बीनने वाले लोग, इन व्यापक उत्पादक ज़िम्मेदारी योजनाओं के संचालन में अहम भूमिका निभा सकते हैं.सैन होसे सीको लैंडफिल सहकारी की प्रबन्धक, शेरिल हेर्नांडेज़ ने यूनेप-समर्थित पहल SEA सर्कुलर के एक अध्ययन में भाग लिया था, जो स्वीडन की अन्तरराष्ट्रीय विकास सहयोग एजेंसी से वित्त पोषण के ज़रिए समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए बनाई गई है. वह कहती हैं, “निर्माता अन्ततः उन लोगों की तलाश करेंगे,जो काम कर सकते हैं और यह काम करने की क्षमता किस में है? ज़ाहिर सी बात है कि यह क्षमता कूड़ा कर्मचारियों में है.”यूनेप की एलिसा टोंडा कहती हैं, “जैसे-जैसे दुनिया प्लास्टिक प्रदूषण ख़त्म करने के उपाय तलाश कर रही है, कूड़ा बीनने वाले लाखों लोग, इसमें एक मज़बूत सहयोगी बनकर सामने आ रहे हैं. इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कूड़ा बीनने वालों की भूमिका को मान्यता देने से, उन्हें अपने कामकाज व अपने परिवार का समर्थन जारी रखने का हौसला मिलेगा.”यह लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ.
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