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ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया पर बाबा का दिव्य शृंगार, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

Babas Divine Adornment on Jyeshtha Shukla Dwitiya; A Flood of Devotion Swells During the Bhasma Aarti - Puja Path in Hindi

उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भव्य भस्म आरती देखने को मिली। भांग से सजे बाबा महाकाल का रूप देखकर सभी श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए रात से ही लंबी कतारों में लगे हुए थे, ताकि वे भस्म आरती का हिस्सा बन सकें। रोजाना की परंपरा के अनुसार, सुबह भोर में भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद मंदिर के कपाट खोले गए। कपाट खुलते ही पूरे परिसर में 'जय श्री महाकाल' के जयकारे गूंज उठे। सोमवार होने की वजह से भक्तों का सैलाब देखने को मिला। पूरे परिसर में घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई दी।
इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा पहले बाबा का जलाभिषेक किया गया और फिर पंचामृत से स्नान कराया गया। अभिषेक के बाद भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बाबा को भस्म अर्पित की गई और आरती उतारी गई। इस दौरान महाकाल भक्तों को निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
बाबा महाकाल के 'निराकार से साकार' रूप का अर्थ शिव के उस आध्यात्मिक और दार्शनिक रूपांतरण से है, जिसमें अनंत, रूपहीन और सर्वव्यापी परमात्मा (निराकार) भक्तों के कल्याण के लिए एक निश्चित और पूजनीय स्वरूप (साकार) में प्रकट होते हैं।
बाबा का आज का श्रृंगार बेहद दिव्य और आकर्षक था। महाकाल के मुखारविंद (कमल के समान सुंदर मुख) को अत्यंत सुंदर ढंग से सजाया गया। बाबा के माथे पर स्पष्ट त्रिपुंड और दो चंद्रमा सुसज्जित किए गए। साथ ही नवीन मुकुट धारण कराकर बाबा को फूलों की मालाएं पहनाई गईं। ताजे बिल्वपत्र (बेलपत्र) अर्पित किए गए और रंग-बिरंगे फूलों की मालाओं से पूरे श्रृंगार को और अधिक आकर्षक बनाया गया।
भस्म आरती का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। इसमें गोहरी, पीपल, पलाश, शमी और बेल जैसे विभिन्न पेड़ों की लकड़ियों की राख का उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इस समय भगवान महाकाल निराकार रूप में होते हैं। इसलिए महिलाओं को भस्म आरती सीधे देखने की अनुमति नहीं होती और वे घूंघट या ओढ़नी डालकर दर्शन करती हैं।
--आईएएनएस

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Web Title-Babas Divine Adornment on Jyeshtha Shukla Dwitiya; A Flood of Devotion Swells During the Bhasma Aarti
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Tags: bhasma aarti, jyeshtha shukla dwitiya, astrology in hindi
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