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सैली परियोजना की बलि चढेंगे एक लाख से अधिक पेड, विस्थापित होंगे तीन गांव

Sally Cdenge slaughtered more than one million trees project, will displace three village - Kullu News in Hindi

कुल्लू(धर्मचंद यादव)। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति के उदयपुर क्षेत्र में बनने वाली 420 मैगावाट जल विद्युत सैली परियोजना के लिए जिला का एममात्र जंगल पूरी तरह से उजड जायेगा। जिसका लाहौल के पर्यावरण पर बहुत ही बुरा असर पडेगा। जानकारों की माने तो उदयपुर जंगल के करीब एक लाख से अधिक देवदार व अन्य पौधे इस परियोजना की भेंट चढ जायेंगे। जानकारों के मुताबिक इतनी बडी संख्या में यह पौधे सैली परियोजना के बांध निर्माण में तहस-नहस होंगे। लेकिन वन विभाग व प्रदेश सरकार इस तरफ से पूरी तरह से आंखे मुंदे हुये है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ जनप्रतिनिधि भी इसके विरोध में अपनी आवाज बुलंद करने लगे हैं।
जानकारों की माने तो परियोजना निर्माण के लिये कुछ पौधों को पहले ही काट दिया जाएगा और कुछ पौधे जब बांध बनेगा तो अपने आप बांध बनने के बाद जलमग्र हो जाएंगे। सैली जल विद्युत परियोजा के लिये इतने बडे पैमाने पर पौधे काटने के प्रस्ताव को लेकर लाहौल घाटी के पर्यावरणविदों में भारी अक्रोश है और उन्होंने इस परियोजना के विरोध में अपने तेवर कडे कर लिए हैं। सैली जल विद्युत परियोजना संघर्ष समिति परियोजना के लिये इतने बडे पैमाने पर पेडों के कटान के विरोध में और इसी के चलते संघर्ष समिति पिछले काफी समय से इस परियोजना का विरोध करती आ रही है। हालांकि पूर्व में यह परियोजना कम मैगावाट की थी लेकिन परियोजना का निर्माण कर रही मोजरवेयर कम्पनी के आग्रह पर सरकार ने इसकी क्षमता बढा दी है और बांध की उंचाई भी बढाने के आग्रह पर स्वीकृति दे दी है।
परियोजना संघर्ष समिति का कहना है कि पूरे जिला में देवदार का सिर्फ एक ही जंगल उदयपुर में मौजूद है और इस जंगल को भी जल विद्युत परियोजना स्थापित करने केबहाने तहस-नहस करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे का पर्यावरण संतुलन पूरी तरह से बिगड जायेगा और यहां के लोगों को कई प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पडेगा। इसके अलावा यहां के प्राकृतिक जल स्त्रोतों पर भी पेड कटान का विपरित असर पडेगा और इस क्षेत्र के लोग इसके विरोध में सडक पर उतरने को भी तैयार है। हालांकि लोगों के विरोधी तेवरों को देखते हुये परियोजना प्रबंधन निर्माण कार्य को लेकर काफी सुस्त पड गया है। जानकारों से से यह भी जानकारी मिली है कि जल विद्युत परियोजना की निर्माता कम्पनी मोजरवेयर ने अपनी रिपोर्ट में यहां कम पेडों को काटे जाने का उल्लेख किया है। वहीं वन विभाग की रिपोर्ट को माने तो यहां पेडों के काटे जाने का आंकडा महज 47 हजार ही है। जबकि वास्तविकता यह है कि यहां एक लाख से अधिक हरे भरे देवदार और अन्य पेडों की बलि दी जाएगी।
इन पर भी पडेगा बुरा प्रभाव
इस क्षेत्र में औषधीय गुणों वाली जडी-बूटियां भी नष्ट हो जाएंगी व गांव भी उजडेंगे। इस परियोजना निर्माण में जहां एक लाख से अधिकपेडों की बलि चढेगी तो वहीं तीन गांव पूरी तरह से विस्थापित भी होंगे। जबकि आधा दर्जन के करीब गांव इससे प्रभावित होंगे। क्षेत्रवासियों के अनुसार इस परियोजना के बनने से घाटी के रतोली, सलपट, कुराकी गांव पूरी तरह से उजड जाएंगे। जबकि सलग्रां और कुरचेड गांव भी इसके प्रभाव से अछूते नहीं रह पाएंगे। परियोजना निर्माण के कारण यहां के लोग अपनी रोटी-माटी से उजड जायेंगे, जो उन्हें सदियों तक दर्द देता रहेगा।

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Web Title-Sally Cdenge slaughtered more than one million trees project, will displace three village
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