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राजस्थान में इंजीनियरिंग की गुणवत्ता का बंटाधार ,फंड खर्च करने में नाकाम RTU और सरकारी कॉलेज

सत्येंद्र शुक्ला

जयपुर । राजस्थान में पहले सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश लेने के लिए छात्र-छात्राओं में होड़ मची रहती थी, लेकिन पिछले सालों से लगातार इंजीनियरिंग शिक्षा के स्तर पर में गिरावट आ रही है। साथ ही लगातार इंजीनियरिंग में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या घटती जा रही है।

इसके पीछे अगर कोई कहे कि इंजीनियरिंग शिक्षा के लिए फंड की कमी है, तो यह गलत होगा। गलत यह हो रहा है कि इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में कोटा तकनीकी विश्वविद्यालय समेत अन्य 11 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज फंड का इस्तेमाल करने में नाकाम साबित हो रहे है।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ल्ड बैंक और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की तरफ से तीन साल के लिए टेक्नीकल एजुकेशन क्वालिटी इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम ( Technical Education Quality Improvement Program) यानी TEQIP के मद में आवंटित 130 करोड़ रुपये की धनराशि में से अभी तक सिर्फ 38 करोड़ 71 लाख 11 हजार रुपये ही खर्च हो सके। जबकि यह प्रोग्राम 1 अप्रैल 2017 से शुरू हुआ था, यह धनराशि सितंबर 2020 तक के लिए आवंटित है।
वहीं पिछले दिनों वर्ल्ड बैंक और मानव संसाधन विकास मंत्रालय की टीम ने उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करके इस बात पर चिंता जाहिर की थी, आखिर क्यों, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज और सरकारी यूनिवर्सिटी इस फंड का इस्तेमाल क्यों नहीं कर पा रही है।

TEQIP के आंकड़ों के मुताबिक इंजीनियरिंग शिक्षा के लिए तकनीकी सामान खरीदने में जीईसी झालावाड़, जीसीईटी बीकानेर, आरटीयू कोटा, यूडी आरटीयू कोटा कोई फैसला नहीं कर सके है। वहीं अगर सभी 11 सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज और आरटीयू के प्रोक्यूमेंट ऑफ गुड्स, एकेडेमिक प्रोसेस, फैकेल्टी रिफॉर्म्स के व्यय की बात की जाए, तो एमपीयूएटी उदयपुर ने 522.41 लाख, जीईसी बीकानेर ने 238.51 लाख, जीईसी झालावाड़ ने 321.49 लाख, जीसीईटी बीकानेर ने 220.31 लाख, जीईसी बांसवाड़ा ने 520.71 लाख, जीईसी भरतपुर ने 488.71 लाख, जीडब्ल्यूईसी अजमेर ने 227.05 लाख, जीईसी अजमेर ने 324.53 लाख, एमएलवीटीईसी भीलवाड़ा ने 225.21 लाख, एमबीएम जोधपुर ने 376.75 लाख, आरटीयू कोटा ने 82.60 लाख और यूडी आरटीयू कोटा ने 322.83 लाख रुपये ही 19 फरवरी 2019 तक खर्च किए है। जो कुल आवंटित धनराशि 130 करोड़ का सिर्फ 29.60 फीसदी है। जबकि इस प्रोग्राम को आगामी 1 अप्रैल 2019 को पूरे दो वर्ष पूरे होने जा रहे है और सितंबर 2020 तक इस आवंटित धनराशि का उपयोग करना है।




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Web Title-RTU and government engineering colleges fail to spend funds
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