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राष्ट्रीय एकता, अखण्डता एवं सामाजिक समरसता के लिए कर्तव्यों का निर्वहन जरूरी - कलराज मिश्र

जयपुर। राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि संविधान हमारा मार्गदर्शक है। छात्र-छात्राएं संविधान की जानकारी रखते हुए राष्ट्रीय एकता, अखण्डता व सामाजिक समरसता के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। साथ ही वे अर्जित शिक्षा और ज्ञान के बल का सदुपयोग सम्पूर्ण मानवता के कल्याण में करें।
राज्यपाल मंगलवार को अजमेर के महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के नवें दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे। राज्यपाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि गत 26 नवम्बर को पूरे देश में 70वां संविधान दिवस मनाया गया। संविधान की प्रस्तावना में राष्ट्र की मूल भावना का उल्लेख है। संविधान ने हमे मौलिक अधिकार दिए है। संविधान के अनुच्छेद 51 क में हमारे द्वारा किए जाने वाले कर्तव्यों को बताया गया है। मौलिक अधिकार और कर्तव्य, यह दोनों ही संविधान के प्रमुख स्तम्भ है। मौलिक अधिकारों के साथ हम हमारे कर्तव्यों को जाने, समझें और उनके अनुरूप ही अपना कार्य और व्यवहार करें।
राज्यपाल कलराज मिश्र की पहल - संविधान की प्रस्तावना और कर्तव्यों का कराया वाचन
राज्यपाल कलराज मिश्र ने विश्वविद्यालयों के समारोहों में संविधान की प्रस्तावना और मूल कर्तव्यों का वाचन कराने की शुरूआत अजमेर के महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय से की। उन्होंने दीक्षांत समारोह में उपस्थित लोगों को प्रस्तावना व कर्तव्यों का वाचन कराया। उन्होंने कहा कि युवा पीढी को राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। इसलिए संविधान में प्रदत्त कर्तव्यों को युवा लोक आचरण में लाकर आगे बढ़ें। इससे निश्चित तौर पर भारत देश को आगे बढ़ाने में और स्वयं के जीवन को भी प्रोन्नत करने में यह कदम बेहतरीन साबित होगा। आमजन को संविधान की जानकारी होना आवश्यक है। राष्ट्रीय एकता, अखण्डता व सामाजिक समरस्ता के लिए कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा। विश्वविद्यालयों में युवाओं को मूल कर्तव्यों का ज्ञान कराने के लिए अभियान चलाया जाए। देश की युवा पीढ़ी को मूल कर्तव्यों के बारे में जानकारी दिलाने के लिए गोष्ठियां व सेमीनार आयोजित की जाएं।
राज्यपाल ने कहा कि महर्षि दयानन्द ने प्राचीन भारत के उन्नत गौरव और वैदिक ज्ञान - गरिमा का प्रकाश पूरे विश्व में फैलाया। महर्षि दयानन्द को प्रेरणास्त्रोत मानकर इस विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को ज्ञान के प्रकाश की परम्परा का निर्वहन करना होगा। हमें अज्ञानता, अंधकार, भय, भ्रम, नैराश्य एवं अवसाद से समाज को मुक्ति दिलानी है। इसी ज्ञान के आलोक में वैदिक ऋषियों का नाद गूंजता है। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वेे अर्जित शिक्षा और ज्ञान के बल का सदुपयोग स्वयं, समाज, राष्ट्र और सम्पूर्ण मानवता के कल्याण के लिए करें। शिक्षा का लक्ष्य सिर्फ उपाधि पाकर जीविका का उपार्जन ही नहीं है, बल्कि इसका सही उद्देश्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास, अनुशासन, स्वावलम्बन, चरित्र-निर्माण, समाज और मनुष्यता के प्रति सेवा और समर्पण का भाव है।

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Web Title-Kalraj Mishra said Discharge of duties necessary for national unity, integrity and social harmony
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