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निकाह मस्जिद में, ना खाना, ना दहेज, ना ही कोई रस्म, दी गई मीरास

Nikah in the mosque, no food, no dowry, no rituals, inheritance given - Jaipur News in Hindi

खास खबर। जयपुर कुरैशी बिरादरी में सादगी से निकाह मुहिम के अंतर्गत आज साबिर कुरैशी की बिटिया फौजिया कुरैशी का निकाह दिलशाद पुत्र बाबू खा से अत्यंत सादगी से हज़रत गुलाब शाह बाबा मस्जिद परिसर रामनिवास बाग में सम्पन्न हुआ। इस निकाह में कोई गैर इस्लामी रस्म देखने को नहीं मिली बल्कि लड़की वालों की तरफ ना कोई खाने का इंतजाम था और ना ही कोई दहेज ही दिया गया। निकाह शरबत पर हुआ और लड़की का जो विरासत में आज दिन तक हक़ बनता था वो अदा किया गया और साबिर कुरैशी ने ये भी यक़ीन दिलाया कि जब कभी विरासत तकसीम होगी तो जो भी हक़ बनता होगा वो पूरी तरह हिसाब लगा कर अदा कर दिया जाएगा। साबिर कुरैशी के अनुसार उन्होंने इस तरह शादी करके बड़ों का कहना माना है और अल्लाह और उसके रसूल का अनुसरण किया है। दुल्हा के पिता बाबू खान ने कहा कि ये फैसला बहुत कठिन था लेकिन दूल्हा दिलशाद इस फैसले को निभाना चाहते थे। उन्होंने ये क़दम उठाकर हमारा दिल जीत लिया है। निकाह में कुरैशी बिरादरी के पंच पटेलों ने भी अपनी बात रखी।
मुख्यत नईमुद्दीन कुरैशी ने बताया कि हमने जो मेहनत की थी आज रंग ला रही है। इस तरह सादगी से अब तक कुल 144 से ज़्यादा निकाह हो चुके हैं। लेकिन इस निकाह में जो लड़की को मीरास के हक़ देने का जो अम्ल वजूद में आया है वो काबिल तारीफ है, ये एक क़दम और आगे तरफ बढ़ाया गया। उन्होंने विशेषकर निकाह में मौजूद महिलाओं से बात करते हुए कहा कि लोग गलत कहते हैं कि महिलाएं रस्म किए बिना नहीं मानती, आज महिलाओं की मौजूदगी बता रही है कि वो इस कार्य में साथ हैं। निकाह का ख़ुत्बा और इजाब क़ुबूल नायब क़ाज़ी सैयद असगर अली ने कराया।
असगर अली ने मजमे से खिताब करते हुए कहा कि शादी अलग चीज़ हे और निकाह अलग, शादी हर मज़हब में होती है और निकाह मुस्लिम समाज में होता है, क्योंकि निकाह इबादत है और इबादत की अव्वल हकदार मस्जिद होती है। हालांकि निकाह कहीं भी हो जाएगा लेकिन मस्जिद में रूहानी माहौल होता है और वो मजलिस पूरी तरह लागवियात से पाक होती है। ऐसी मजलिस में फरिश्ते शरीक रहते हैं। लिहाजा हुज़ूर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि," निकाह का आम ऐलान किया करो और मस्जिद में मुनक़्क़िद किया करो"। क़ाज़ी सैयद असगर अली ने दूल्हा दुल्हन को एक दूसरे के हक़ के बारे में बताया।
निकाह की मजलिस से बात करते हुए मशहूर व्यवसाई अब्दुल लतीफ आरको ने बताया कि उन्होंने भी गत महीने में अपने पोती की शादी सादगी से की थी, जो अब इस मुहिम का हिस्सा बन चुकी है। आगे भी ऐसे ही प्रयास जारी रहेंगे। निकाह में हाजी हाफ़िज़ सदर साहब जमातखाना जनरल सेक्रेटरी हाजी इस्लामुद्दीन साहब जमातखाना, मुस्लिम मुसाफ़िर खाना सचिव जनाब हाजी शौकत कुरैशी साहब जनाब नईम साहब मुशर्रफ कुरैशी साहब ( जे के टेंट हाऊस आदर्श नगर) जनाब अख्लाक साहब वकार साहब जनाब कयूम साहब सईद अख्तर साहब हाजी खलील मियां साहब सिराजुद्दीन मुन्ना साहब, रशीद पटेल, मोहम्मद शफीक कुरैशी,अब्दुल लतीफ़ आरको साहब इत्यादि और शहर के मैआज़ज मेहमान शरीक रहे, सभी ने दुआओं से नवाजा और इस खेर के काम की बहुत तारीफ की।

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Web Title-Nikah in the mosque, no food, no dowry, no rituals, inheritance given
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