• Aapki Saheli
  • Astro Sathi
  • Business Khaskhabar
  • ifairer
  • iautoindia
1 of 1

पुरुषोत्तम मास में भागवत कथा: वराह अवतार और कपिल भगवान की महिमा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु

Devotees Gather in Large Numbers as Shrimad Bhagwat Katha Highlights Varaha Avatar and Lord Kapils Teachings in Purushottam Maas - Bhagalpur News in Hindi

कहलगांव (भागलपुर)। पुरुषोत्तम मास के पावन और दुर्लभ अवसर पर कहलगांव स्थित रुनगटा धर्मशाला में आयोजित सप्तदिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। कथा के दूसरे दिन धर्मशाला परिसर में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखने को मिली। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया और पूरे वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। श्याम रस धारा रोटी सेवा संस्थान के सहयोग से आयोजित इस भव्य धार्मिक आयोजन में श्रीधाम वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय संत एवं अध्यात्म कथा प्रवक्ता पूज्य श्री बाल प्रभु जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महत्वपूर्ण प्रसंगों का अत्यंत सरल, प्रभावशाली और भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु पूरे समय मंत्रमुग्ध होकर भगवान की दिव्य लीलाओं का श्रवण करते रहे।
सृष्टि की रचना और भगवान के अवतारों का दिव्य वर्णन

दूसरे दिन की कथा में पूज्य महाराज श्री ने सृष्टि की उत्पत्ति और उसके दिव्य रहस्यों का वर्णन करते हुए बताया कि परमात्मा की इच्छा से ही इस सम्पूर्ण जगत की रचना हुई है। उन्होंने कहा कि जब-जब संसार में अधर्म बढ़ता है और धर्म संकट में पड़ता है, तब भगवान विभिन्न रूपों में अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं तथा भक्तों की रक्षा करते हैं।
इसी प्रसंग में उन्होंने भगवान के वराह अवतार का विस्तार से वर्णन किया। कथा के दौरान बताया गया कि जब अत्याचारी हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र की गहराइयों में पहुंचा दिया था, तब भगवान ने वराह स्वरूप धारण कर पृथ्वी का उद्धार किया। भगवान ने अपनी अद्भुत शक्ति से पृथ्वी को जल से बाहर निकालकर पुनः उसके स्थान पर स्थापित किया तथा हिरण्याक्ष का संहार कर धर्म की रक्षा की। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भगवान की महिमा का गुणगान करने लगे और पूरा कथा पंडाल जयकारों से गूंज उठा।

कपिल भगवान के उपदेशों ने दिया जीवन का संदेश

कथा के अगले चरण में कपिल भगवान के अवतार का वर्णन किया गया। पूज्य महाराज श्री ने बताया कि कपिल भगवान ने अपनी माता देवहूति को सांख्य योग और भक्ति योग का दिव्य ज्ञान प्रदान किया था। उनके उपदेश केवल उस समय के लिए ही नहीं, बल्कि आज के युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अपने माता-पिता का सम्मान करता है और उनकी सेवा करता है, तो वह ईश्वर की सच्ची भक्ति करता है। जिस घर में माता-पिता का आदर और सम्मान होता है, वहां सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। ऐसे घरों में भगवान की कृपा सदैव बनी रहती है। कथा के दौरान इस संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया।

पुरुषोत्तम मास का आध्यात्मिक महत्व

पूज्य महाराज श्री ने पुरुषोत्तम मास की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि यह मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस अवधि में किए गए जप, तप, दान, पूजा और भागवत श्रवण का पुण्य सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि इस दुर्लभ मास का सदुपयोग करते हुए अधिक से अधिक समय धर्म, भक्ति और सत्संग में व्यतीत करें।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक पाठशाला है। इसके श्रवण से मनुष्य के भीतर सकारात्मक परिवर्तन आता है और उसका जीवन धर्ममय बनता है।

भजनों से भक्तिमय हुआ पूरा परिसर

कथा के मध्य प्रस्तुत किए गए मधुर भजनों ने पूरे वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण से ओतप्रोत भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। कथा पंडाल में उपस्थित महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी भक्ति के रंग में रंगे नजर आए।
धर्मशाला परिसर में लगातार गूंजते भक्ति गीतों और भगवान के जयघोषों ने ऐसा वातावरण निर्मित किया कि प्रत्येक श्रद्धालु स्वयं को आध्यात्मिक अनुभूति के निकट महसूस करने लगा। कथा के दौरान कई श्रद्धालुओं की आंखें भावुकता से नम होती दिखाई दीं।

साधु-संतों और श्रद्धालुओं की सेवा में जुटा संस्थान

आयोजन के दौरान श्याम रस धारा रोटी सेवा संस्थान द्वारा साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं की सेवा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसाद की निःशुल्क व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही स्वच्छ पेयजल, बैठने की समुचित व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
संस्थान के सेवाभावी कार्यकर्ताओं द्वारा पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ व्यवस्थाओं का संचालन किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

तीसरे दिन सुनाई जाएगी ध्रुव, पृथु और जड़ भरत की कथा

आयोजकों के अनुसार कथा के तीसरे दिन ध्रुव चरित्र, राजा पृथु तथा जड़ भरत के प्रेरणादायी प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। इन कथाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, तपस्या, वैराग्य और धर्म के महत्व का संदेश प्राप्त होगा।
कहलगांव के धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं में आगामी दिनों की कथा को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है। आयोजकों ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार उपस्थित होकर कथा श्रवण करने तथा आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।
प्रतिदिन सायंकाल सात बजे से रात्रि दस बजे तक चल रही यह श्रीमद्भागवत कथा श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, ज्ञान और आत्मिक शांति का अनुपम अवसर बन रही है। पुरुषोत्तम मास के इस पावन आयोजन ने पूरे क्षेत्र को धर्ममय वातावरण से आच्छादित कर दिया है।

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

यह भी पढ़े

Web Title-Devotees Gather in Large Numbers as Shrimad Bhagwat Katha Highlights Varaha Avatar and Lord Kapils Teachings in Purushottam Maas
खास खबर Hindi News के अपडेट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करे!
(News in Hindi खास खबर पर)
Tags: bhagwat katha, purushottam maas, kahalgaon news, bhagalpur news, bal prabhu ji maharaj, religious event, sanatan dharma, spiritual discourse, bihar news, devotional program, shyam ras dhara roti seva sansthan, shrimad bhagwat katha, hindu religion, kahalgaon bhagalpur, religious news, astrology in hindi, bhagalpur news, bhagalpur news in hindi, real time bhagalpur city news, real time news, bhagalpur news khas khabar, bhagalpur news in hindi
Khaskhabar.com Facebook Page:

जीवन मंत्र

आपका राज्य

Traffic

जीवन मंत्र

Daily Horoscope

वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री एवं सभी तरह के विवादों का न्याय क्षेत्र जयपुर ही रहेगा।
Copyright © 2026 Khaskhabar.com Group, All Rights Reserved