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सफला एकादशी कब है? जानें व्रत और पारण की सही विधि

When is Saphala Ekadashi? Learn the correct method of fasting and breaking the fast - Puja Path in Hindi

हिंदू धर्म में एकादशी व्रतों को विशेष स्थान प्राप्त है, और इन्हीं में से एक है सफला एकादशी, जिसे वर्ष की अंतिम और अत्यंत शुभ एकादशी माना जाता है। पौष माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली यह तिथि भक्तों के लिए आध्यात्मिक उत्थान और मनोकामनाओं की पूर्णता का माध्यम मानी जाती है। ‘सफला’ शब्द स्वयं में सफलता का प्रतीक है, इसलिए मान्यता है कि यह व्रत न केवल जीवन की बाधाओं को दूर करता है, बल्कि सौभाग्य और प्रसन्नता भी बढ़ाता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि इस व्रत से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और साधक के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं।
कब पड़ेगी सफला एकादशी?

पौष मास को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है और इसी महीने में आने वाली सफला एकादशी का व्रत भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। पंचांग अनुसार वर्ष 2025 में सफला एकादशी 15 दिसंबर, सोमवार को पड़ रही है। इस तिथि की शुरुआत 14 दिसंबर को शाम 6:49 बजे से होगी, जबकि इसका समापन 15 दिसंबर की रात 9:19 बजे पर होगा।
पौराणिक मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान के साथ करने से ही इसके शुभ फल प्राप्त होते हैं, इसलिए इसके नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है।
सफला एकादशी व्रत के लाभ
सफला एकादशी उन दुर्लभ व्रतों में से एक मानी जाती है, जिनके पालन से जीवन की अनेक कठिनाइयाँ सहज रूप से दूर हो सकती हैं। माना जाता है कि यह व्रत न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि मन और जीवन से नकारात्मकता को भी दूर करने में सहायक होता है।
ऐसा भी विश्वास है कि इस व्रत का पालन करने से पाप क्षीण होते हैं और आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से किए गए इस व्रत से सौभाग्य, समृद्धि और स्थिरता की प्राप्ति होती है, और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।

सफला एकादशी रखने की सही विधि

धार्मिक मान्यता है कि सफला एकादशी से एक दिन पहले से ही सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए और सूर्यास्त के बाद भोजन से परहेज करना चाहिए। एकादशी की सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा की तैयारी शुरू की जाती है।
व्रत का संकल्प लेते समय भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को सामने रखकर उन्हें गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। इसके बाद हल्दी, चंदन, तुलसी, पीले पुष्प, तिल और फल अर्पित कर दीप और धूप जलाए जाते हैं।
व्रत के दौरान केवल फलाहार का सेवन उचित माना जाता है। ध्यान रखने की बात यह है कि इस अवधि में अनाज और नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित है। भगवान विष्णु की स्तुति और संबंधित पाठ का श्रद्धापूर्वक वाचन व्रत को पूर्णता प्रदान करता है।
सफला एकादशी का पारण कैसे करें
सफला एकादशी का पारण अगले दिन उचित समय पर किया जाता है। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और श्रद्धानुसार दान-दक्षिणा दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि पारण के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करने से व्रत सम्पन्न माना जाता है।
इस प्रकार पूरे विधि-विधान से किया गया सफला एकादशी व्रत भक्तों के जीवन में शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है।

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Web Title-When is Saphala Ekadashi? Learn the correct method of fasting and breaking the fast
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