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हजार वर्ष पूर्व गजनवी ने मंदिर तोड़ा, पर भारत का स्वाभिमान नहीं टूटा : शेखावत

A Thousand Years Ago, Ghaznavi Destroyed the Temple, But India Self-Respect Remained Unbroken: Shekhawat - News in Hindi

जोधपुर। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की अदम्य जिजीविषा, सांस्कृतिक चेतना और शाश्वत स्वाभिमान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से प्रारंभ हुआ ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ देशवासियों को अपने गौरवशाली इतिहास, संघर्ष और विजय की स्मृति कराता है। गुरुवार रात्रि जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज से ठीक एक हजार वर्ष पूर्व गजनी के सुल्तान महमूद ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था। तीन दिन के भीषण संघर्ष के बाद 11 जनवरी 1026 को मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन आक्रांताओं के तमाम प्रयासों के बावजूद भारत की आत्मा और चेतना को नष्ट नहीं किया जा सका। शेखावत ने कहा कि हजार वर्षों की इस ऐतिहासिक यात्रा में बार-बार भारत की संस्कृति और आस्था को तोड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन देश हर बार पहले से अधिक शक्ति और संकल्प के साथ खड़ा हुआ। उन्होंने कहा कि सोमनाथ भारत की उसी अविनाशी चेतना का प्रतीक है।
स्वतंत्रता के बाद के दौर का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था, लेकिन लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के अटल संकल्प और जनसहयोग से मंदिर का पुनर्निर्माण संभव हुआ। उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक संयोग है कि इस वर्ष जहां गजनवी के आक्रमण के एक हजार वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, वहीं सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सोमनाथ की यह पावन स्मृति हमें वर्ष 2047 तक भारत को एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनाने के संकल्प को और मजबूत करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने भगवान सोमनाथ और द्वारकाधीश के चरणों में प्रार्थना करते हुए कहा कि 140 करोड़ देशवासियों की सामूहिक संकल्प शक्ति से भारत पुनः विश्व पटल पर अपनी सांस्कृतिक और आर्थिक संप्रभुता स्थापित करेगा।
माहेश्वरी समाज राष्ट्रवाद और सेवा का प्रतीक
शेखावत ने राजस्थान तथा विशेष रूप से माहेश्वरी समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस समाज ने न केवल व्यापार के माध्यम से देश को समृद्ध किया, बल्कि जहां-जहां प्रवासी के रूप में गया, वहां राष्ट्रवाद की भावना को भी सुदृढ़ किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण से लेकर विभिन्न लोक कल्याणकारी कार्यों तक माहेश्वरी समाज की भूमिका सदैव अग्रणी रही है। जोधपुरवासियों के लिए यह गौरव की बात है कि उन्हें ऐसे राष्ट्रवादी समाज के प्रतिनिधियों का स्वागत करने का अवसर मिला।

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Web Title-A Thousand Years Ago, Ghaznavi Destroyed the Temple, But India Self-Respect Remained Unbroken: Shekhawat
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