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वो दौर इतिहास हुआ जब नेता भी ज्ञानी थे, अब श्रोता गूंगे हैं और बोलने वाले चालाक

The era when leaders were wise is history, now the listeners are dumb and the speakers are clever. - India News in Hindi

नागपुर में हाल ही आर एस एस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि मै गांधी जी की इस सोच को ग़लत मानता हूं कि अंग्रेजों के आगमन से पहले भारत में एकता नहीं थी। मोहन भागवत यहां एक पुस्तक महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गांधी जी ने हिन्द स्वराज में लिखा था कि अंग्रेजों के आने से पहले हम एक-जुट नहीं थे। जबकि ऐसा नहीं था। यहां एकजुटता थी। गांधी जी ने ग़लत लिखा। लेकिन यहां गांधी जी नहीं बल्कि मोहन भागवत झूठ बोल रहे हैं। बिलकुल झूठ। भागवत द्वारा गांधी जी का कहा नहीं मानने से क्या होता है। जो हक़ीक़त है वह बदल नहीं सकती। भारत में एकता न अंग्रेजों के भारत आने से पहले थी और न ही बाद में। उन्हें ज्ञान होना चाहिए कि फूट डालो और राज करो मुहावरा तब ही प्रतिपादित हुआ था। मोहन भागवत जी को चाहिए कि वे पहले भारत का इतिहास गौर से पढ़ें। लेकिन ऐसा लगता है कि उन्होंने इतिहास पढ़ा ही नहीं। अंग्रेज सन 1600 में भारत आए थे। जबकि उससे पहले यहां सभी राजा-महाराजाओं और मुग़ल बादशाहों में आपस में जंग होती रही। यहां तक कि छोटी-छोटी रियासतें भी एक-दूसरे से उलझती रहीं। ऐसे में मोहन भागवत बताएं कि क्या वे युद्ध गप्प थे ॽ या फिर उन युद्धों को राजा-महाराजाओं के भूतों ने लड़ाॽ भाजपाई और आर एस एस नेताओं में यही कमी है कि वे बिना पढ़े कुछ भी बोलते रहते हैं। छह महीने पहले एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यूपी में एक समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के सभी 65 राज्यों.....।
कितनी शर्म की बात है कि अमित शाह को यह पता ही नहीं है कि भारत में कितने राज्य हैं। जबकि वे केन्द्रीय गृह मंत्री हैं। उन्हें हर जानकारी पुख्ता रूप से होनी चाहिए, लेकिन नहीं है। भारत में 28 राज्य और 8 केन्द्र शासित प्रदेश हैं। कहां 28 और कहां 65 राज्य। भारत में पाकिस्तान, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को भी मिला दिया जाए तो इतने राज्य नहीं होंगे।
लेकिन वे मंत्री हैं, कुछ भी बोल लेते हैं। क्योंकि वे अमूमन फेंकू भाषण ही देते हैं। ठीक ऐसे ही पीएम मोदी हैं। वे जहां भी जाते हैं वहीं से अपना नाता जता देते हैं यह कहते हुए कि यहां से मेरा बचपन का संबंध रहा है। शुक्र है कि उन्होंने कभी विदेशों में यह नहीं कहा कि यहां से मेरा बचपन का संबंध रहा है। आज से 20-25 साल पहले कोई भी नेता ऐसी बातें नहीं करते थे जैसे कि अब बिना पैंदे की करने लगे हैं।
अब बात मोहन भागवत की। उनकी जानकारी के लिए बता दूं कि भारत में 326 ईसा पूर्व सिकन्दर और पोरस के बीच युद्ध हुआ था। अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 में चित्तौड़गढ़ पर चढ़ाई की थी और जनवरी से लगातार आठ महीने तक घेराबंदी के बाद 20 अगस्त 1303 में किले पर कब्जा कर लिया था। तब ख़िलजी का युद्ध राजा रतन सिंह से हुआ था।
ज्ञात रहे कि इसका उल्लेख पद्मावत महाकाव्य में है। ऐसे ही मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच पहला युद्ध 1191 ईस्वी में हुआ, जिसमें पृथ्वीराज चौहान की जीत हुई। इसके बाद दूसरा युद्ध 1192 में हुआ था। लेकिन उसमें गोरी की जीत हुई। महाराणा प्रताप और अकबर के बीच भी सन 1600 से पहले युद्ध हुआ। शिवाजी महाराज और औरंगजेब के बीच भी युद्ध अंग्रेजों के भारत आने से पहले हुआ था। ये सभी युद्ध इस बात के प्रमाण हैं कि अंग्रेजों के भारत आने से पहले यहां कोई एकता नहीं थी। कोई शान्ति नहीं थी।
सभी राजा-महाराजा और मुग़ल बादशाह एक-दूसरे से लड़ ही रहे थे। 14 वीं शताब्दी ईसा पूर्व भारत वंश के राजा और दस जनजाति संघ में युद्ध हुए। 305 ईसा पूर्व चन्द्रगुप्त मौर्य और सेल्युक के बीच युद्ध हुआ। 261 ईसा पूर्व सम्राट अशोक और अनंत पद्मनाभ के बीच युद्ध हुआ और इसके बाद ही सम्राट अशोक ने बोद्ध धर्म की स्थापना की। मोहम्मद गौरी और जयचंद के बीच 1194 में युद्ध हुआ। इस दौर में भारत में एकता कहां थी ॽ ये सभी राजा-महाराजा आपस में एक-दूसरे से लड़ रहे थे।
मंगोल और दिल्ली सल्तनत का युद्ध 1299 में लड़ा गया। तैमूरलंग और मोहम्मद तुग़लक़ वंश का युद्ध 1398 में हुआ। पानीपत का पहला युद्ध 1526 में बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच हुआ। 1540 में शेरशाह सूरी और हुमायूं के बीच युद्ध हुआ। पानीपत का दूसरा युद्ध 1556 में अकबर और हेमू के बीच हुआ। बाबर और राणा सांगा के बीच युद्ध 1528 में हुआ। यहां तक कि हल्दी घाटी युद्ध भी 18 जून 1576 में हुआ था। मोहन भागवत जी, ये है भारत का इतिहास जिसमें अंग्रेजों के भारत आने से पहले ही ये सभी युद्ध हुए थे।
अब आप बताएं कि तब भारत में एकता कहां थी ॽ रामायण और महाभारत युद्ध यहीं हुए थे और आपस में हुए थे। जरा गौर करें कि घर का भेदी लंका ढहाए कहावत क्यों गढ़ी गई ॽ क्योंकि विभिषण ने रावण को धोखा दिया था। जबकि वह रावण का सगा भाई था। यह सबसे बड़ा प्रमाण है कि भारत में एकता कभी रही ही नहीं। जैसे अंग्रेजों ने भारतीय इतिहास को नेस्तनाबूद कर दिया, अब आप लोगों को भी चाहिए कि इतिहास को नेस्तनाबूद कर दें ताकि आने वाली पीढ़ी वही पढे और जाने जो आप वर्तमान में बोल रहे हैं। जबकि ये सभी राजा-महाराजा और मुग़ल बादशाह एक-दूसरे पर हमले करते हुए खुद भी मर-खप गए लेकिन कभी एक नहीं हुए।
सम्राट पृथ्वीराज चौहान को उसी के सगे भाई ने धोखा दिया। रानी लक्ष्मीबाई को भी उसी के अपने ने धोखा दिया। हमारा इतिहास एकता का नहीं बल्कि दोगले होने का रहा है। मौजूदा राजनीति में भी वही हो रहा है। इतना और बता दूं कि अंग्रेजों के भारत आने से पहले भारत पर पहले कुषाण, फिर हुन, उनके बाद अफगान, फिर तुर्क, फिर खिलजी, उसके बाद लोधी और फिर मुग़ल बादशाहों ने राज किया। इन सब के अलावा इतिहास में इस बात का भी उल्लेख है कि अंग्रेजों के भारत आने से पहले मुग़ल नहीं बल्कि मराठा शासक थे और सभी छोटे-बड़े राजा-महाराजा सत्ता के लिए आपस में लड़ते रहे। उनमें कभी एकता रही ही नहीं।

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Web Title-The era when leaders were wise is history, now the listeners are dumb and the speakers are clever.
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