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करोड़ों की सरकारी जमीन कोडियों में बांटी, उदयपुर नगर निगम के पूर्व आयुक्त आईएएस बारहठ को कार्मिक विभाग ने दिया नोटिस

Government land worth crores distributed for a pittance, Personnel Department again issued notice to former Municipal Commissioner IAS Barhat - Udaipur News in Hindi

विधायक ताराचंद जैन के प्रयास लाए रंग, सरकार ने फिर मांगा स्पष्टीकरण, यह मामला 272 भूखंड प्रकरण से अलग है

जयपुर। उदयपुर की बहुचर्चित पानेरियों की मादड़ी जमीन घोटाले में सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए उदयपुर में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त आईएएस हिम्मत सिंह बारहठ को एक बार फिर नोटिस जारी कर 15 दिनों में स्पष्टीकरण मांगा है। आरोप है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखते हुए करोड़ों की सरकारी जमीन को औने-पौने दामों में कुछ व्यक्तियों और कंपनियों को आवंटित कर दिया। इस मुद्दे को शहर विधायक ताराचंद जैन ने विधानसभा में मजबूती से उठाया था, जिसके बाद सरकार को जांच के लिए मजबूर होना पड़ा।
मास्टर प्लान की अनदेखी, न्यायालय के आदेश की अवहेलना
जानकारी के मुताबिक, नगर विकास प्रन्यास (यूडीए) की यह जमीन खसरा नंबर 1163 में स्थित है, जिसे मास्टर प्लान 2031 में 100 फीट चौड़ी सड़क के लिए आरक्षित किया गया था। इतना ही नहीं, इस भूमि को लेकर उच्च न्यायालय में मामला लंबित था और कोर्ट ने किसी भी प्रकार के आवंटन पर रोक लगा रखी थी। इसके बावजूद आईएएस हिम्मत सिंह बारहठ ने 2021-22 और 2022-23 में शौकिन पितलिया, संध्या पितलिया और मैसर्स ऑरबिट रियल मार्ट प्राइवेट लिमिटेड को यह जमीन आवंटित कर दी।
कोड़ियों के दाम में करोड़ों की जमीन आवंटित
विधायक जैन द्वारा विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 887.76 वर्गफीट के दो भूखंड मात्र 29,296 रुपये में और 4115 वर्गफीट का भूखंड मात्र 1,35,994 रुपये में आवंटित किया गया। जबकि इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है। यह दर्शाता है कि किस तरह सरकारी नियमों को ताक पर रखकर निजी स्वार्थों की पूर्ति की गई।
विधायक ताराचंद जैन की प्रभावी भूमिका
शहर विधायक ताराचंद जैन ने इस घोटाले का पर्दाफाश करते हुए इसे विधानसभा में उठाया। उन्होंने न केवल सरकार को कार्यवाही के लिए बाध्य किया बल्कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी पर भी सवाल खड़े किए। उनकी तत्परता और मजबूत दखल के चलते ही इस घोटाले की परतें खुल सकीं और अब सरकार ने पूर्व आयुक्त को दोबारा नोटिस जारी किया है।
उच्चतम न्यायालय का कड़ा रुख
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर संज्ञान लेते हुए 20 फरवरी 2024 को अपने आदेश में आवंटन को नियम विरुद्ध करार दिया और स्पष्ट किया कि यह भूमि नगर विकास प्रन्यास (यूडीए) की संपत्ति है। साथ ही, आवंटियों को अतिक्रमी करार दिया गया।
प्रशासनिक सख्ती या महज औपचारिकता?
अब सवाल उठता है कि क्या यह नोटिस महज औपचारिकता भर है, या फिर सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी? क्योंकि इससे पहले भी एक बार नोटिस जारी किया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। यदि 15 दिनों में स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता, तो क्या वाकई बारहठ के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई होगी, या फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
भ्रष्टाचार पर कब लगेगी लगाम?
इस प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी अधिकारी किस तरह जनहित और नियमों को ताक पर रखकर निजी स्वार्थों को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि, विधायक ताराचंद जैन के प्रयासों से यह मामला उजागर हुआ, लेकिन अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह सिर्फ नोटिस तक ही सीमित रह जाएगा।

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Web Title-Government land worth crores distributed for a pittance, Personnel Department again issued notice to former Municipal Commissioner IAS Barhat
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