• Aapki Saheli
  • Astro Sathi
  • Business Khaskhabar
  • ifairer
  • iautoindia
1 of 1

साप्ताहिक कॉलम- दीवारों के कान

Weekly Column- Ears to the Walls - Jaipur News in Hindi

मंत्री को मनाने के लिए विज्ञापनों का जुगाड़ तंत्र

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री के तेवरों ने जेडीए अफसरों के साथ-साथ बिल्डरों की भी नींद उड़ा दी है। क्योंकि पिछली कांग्रेस सरकार में बिल्डरों ने सेक्टर रोड औऱ लैंड फॉर लैंड पॉलिसी में जो चांदी कूटी थी, उस पर फिलहाल अंकुश लग गया है। इतना ही नहीं मंत्री के तेवरों से पिछले घोटाले खुलने की भी आशंका हो गई है। इससे बचने के लिए राजस्थान खासकर जयपुर के बिल्डरों ने एक जुगत लगाई कि दो दिन तक प्रमुख अखबारों में नई सरकार के स्वागत के फुल-फुल पेज विज्ञापन छपवा दिए। सोचा, इससे मंत्री जी का रुख थोड़ा नरम हुआ होगा। सो, बिल्डर्स एकत्रित होकर यूडीएच मंत्री जी को बधाई देने गुलदस्ता और महंगी गिफ्ट लेकर चले गए। लेकिन, मंत्रीजी महंगा गिफ्ट देखकर भड़क गए। महंगी गिफ्ट लेकर आए क्रेडाई के पदाधिकारी को डांट कर भगा दिया। अब बिल्डर बेचारे कर भी क्या। अपना सा मुंह लेकर वापस लौट आए। अब संघ औऱ भाजपा के पदाधिकारियों के जरिए मंत्री जी को रिझाने का जुगाड़ लगा रहे हैं। सदन और सड़क पर सवालों से भागती सरकार
विधानसभा चुनाव से पहले तक कांग्रेस सरकार पर सवालों की बौछार करने वाले भाजपा नेता सत्ता में आने के बाद अब खुद सवालों से भाग रहे हैं। सड़क से लेकर सदन तक भाजपा सरकार पर सवालों की बौछार हो रही है। लेकिन, न तो मुखिया जी सवालों का जवाब देने के मूड में हैं और ना ही मंत्री एवं अन्य नेता। सरकार और संगठन में अब एक तरह की प्रेक्टिस यह हो गई है कि प्रेस कांफ्रेंस तक मंत्रियों और नेताओं के अपनी बात कहने के तुरंत बाद धन्यवाद बोल दिया जाता है ताकि कोई सवाल ही न पूछ सके। अगर कोई ज्यादा नकारात्मक सवाल पूछने की कोशिश करे तो उसे कांग्रेसी पत्रकार मान लिया जाता है। सदन में आऱएलपी विधायक हनुमान बेनीवाल ने सरकार से जानना चाहा कि जिस राज्य लोकसेवा आयोग को भ्रष्टाचार का केंद्र बताकर RPSC को भंग करने की मांग की जा रही थी। अब अचानक सरकार ने चुप्पी क्यों साध ली। RPSC को भंग क्यों नहीं किया जा रहा है। पेपरलीक मामले की सीबीआई जांच से सरकार क्यों बच रही है। जबकि पीएम मोदी-शाह से लेकर तमाम नेताओं ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया था। दूसरी बात विधानसभा में 361 से ज्यादा सवाल लग चुके हैं। लेकिन, रोचक यह है कि मुखिया जी ने अपने विभागों के सवाल सहयोगी मंत्रियों को दे दिए हैं ताकि उन्हें जवाब ना देना पड़े।
ब्यूरोक्रेसी ने संभाला मोर्चा, मंत्री बुके लेने में व्यस्त
भजनलाल सरकार को एक महीनs से अधिक वक्त हो चुका है, लेकिन अभी तक गाड़ी होले-होले चल रही है। अभी शासन सचिवालय में मंत्रियों को बुके और बधाई देने वाले शुभचिंतकों की भीड़ लगी हुई है। मंत्री भी कह रहे है कि अभी एक-दो महीने तक ऐसे ही चलेगा। क्षेत्र के लोगों को नाराज भी नहीं कर सकते है। रही बात कामकाज की तो, ब्यूरोक्रेसी ने मोर्चा संभाल रखा है। अब जो मलाईदार पदों से हटकर कम महत्व के पदों पर लगे है, वह जरूर मायूस है। लेकिन जो ब्यूरोकेट्स जो पूर्ववर्ती सरकार में ठंड में लगे हुए थे, अब वह मुख्यधारा के पदों पर लग गए है। अब ब्यूरोक्रेसी भी एक-दूसरे के मजे लेने से पीछे नही है। पत्रकारों से फीडबैक लेकर पूछ लेती है वह अफसर खुश है या नहीं ।
आखिर भाजपा के संगठन मंत्री का तबादला क्यों हुआ
जब से राजस्थान से भाजपा के संगठन महामंत्री चंद्रशेखर की विदाई हुई है, तभी से यह चर्चा जोरों पर आखिर ऐसा क्या हुआ। पूरे 7 साल से अधिक वक्त तक चंद्रशेखर का दबदबा रहा। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष भी चंद्रशेखर के आगे कमजोर ही रहे। चाहे वित्तीय प्रबंधन हो या पन्ना प्रमुख, विस्तारकों का मामला, चाहे पदाधिकारियों, मोर्चो, प्रकोष्ठों का मामला हो। हर जगह चंद्रशेखर की चली। लेकिन, भजनलाल सरकार बनने के बाद कुछ ठीक-ठाक नहीं चला। कुछ कानाफूसी हुई। चंद्रशेखर को लेकर तरह-तरह की बातें चली, जो मोदी-शाह की जोड़ी को पसंद नहीं आई। पार्टी की साख को कोई नुकसान पहुंचे या बदनामी हो, इससे पहले चंद्रशेखर की राजस्थान से विदाई हो गई। प्रदेश भाजपा के ऑफिस जाने वाले आम कार्यकर्ता या दिग्गज नेता या पत्रकार आसानी से चंद्रशेखर से नहीं मिल सकते थे। यह सब जानते है, लेकिन अब यह राज ही रह गया। आखिर कौन सा कारण रहा, जिसके चलते चंद्रशेखर भजनलाल सरकार का सुख भोगने से वंचित रह गए।
सत्ता परिवर्तन के बाद भी ब्यूरोक्रेसी की बेचैनी
राजस्थान में सत्ता परिवर्तन के बाद भी ब्यूरोक्रेसी में बेचैनी बनी हुई है। यह बेचैनी खासकर पुलिस महकमे में ज्यादा है। हर कोई पूछ रहा है कि आईपीएस की तबादला सूची कब आएगी। सीएम भजनलाल जी ही अफसरों के तबादले कर लेंगे या इसकी भी ऊपर से “पर्ची” आएगी। क्योंकि लगभग सभी जिलों में एसपी तबादलों के इंतजार में बैठे हैं। सभी को लग रहा है कि पता नहीं कब तबादला होकर जाना पड़े। इसलिए काम करने से भी क्या फायदा। यही वजह है कि क्राइम की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। ब्यूरोक्रेसी की एक और बेचैनी है कि आखिर इस सरकार में चल किसकी रही है। कई लोगों को भरोसा नहीं है कि मुखिया जी यानि सीएम साहब की चल पा रही है। वहीं कुछ, अंदरूनी पैठ रखने वालों का कहना है कि ब्यूरोक्रेसी के मुखिया जी की ही चल रही है, उन्हें फुल पावर देकर लाया गया है। उनकी च्वाइस के कई अफसर लगाए भी जा चुके हैं। प्रदेश के मुखिया जी के मीडिया मैनेजमेंट के भी अलग से टीम बनाए जाने की तैयारी है। इसका इंपैक्ट आगे देखने को मिल सकता है।
राज के साथ अफसरों का मिजाज बदला
राजस्थान में राज बदलने के साथ ही अफसरों का मिजाज और नजरिया ही बदल गया है। सचिवालय से लेकर पंचायत स्तर तक के अधिकारी अब से दो महीने पहले तक केंद्र की योजनाओं बिल्कुल भी तवज्जो नहीं दे रहे थे, वहीं अब ये अधिकारी खुद चलकर संबंधित कर्मचारियों व अधिकारियों से पूछ रहे हैं कि इन योजनाओं की गति को कैसे बढ़ाया जाए? गति नहीं पाने से ये अफसर परेशान हो रहे हैं। दरअसल केंद्र सरकार ने चुनाव के मद्देनजर जिन राज्यों में चुनावी फायदा मिलना है, उस हिसाब से पैसा दिया जा रहा है। यही कारण है कि केंद्र की योजनाओं में कई राज्यों में पैसे की कमी आ रही है। इन सबका असर बीजेपी शासित राज्य सरकारों पर पड़ रहा है।



(नोटः- इस कॉलम में हर सप्ताह खबरों के अंदर की खबर, शासन-प्रशासन की खास चर्चाएं प्रकाशित की जाती हैं)
-खास खबरी

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

यह भी पढ़े

Web Title-Weekly Column- Ears to the Walls
खास खबर Hindi News के अपडेट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करे!
(News in Hindi खास खबर पर)
Tags: cm rajasthan, jaipur news, rajasthan news, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, jaipur news, jaipur news in hindi, real time jaipur city news, real time news, jaipur news khas khabar, jaipur news in hindi
Khaskhabar.com Facebook Page:
स्थानीय ख़बरें

राजस्थान से

प्रमुख खबरे

आपका राज्य

Traffic

जीवन मंत्र

Daily Horoscope

वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री एवं सभी तरह के विवादों का न्याय क्षेत्र जयपुर ही रहेगा।
Copyright © 2026 Khaskhabar.com Group, All Rights Reserved