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प्रत्येक विस क्षेत्र में लगाए जाएंगे 100 हैंडपंप आैर अक्टूबर तक 500 RO प्लांट

Rajasthan Government proposes to provide clean drinking water to the public said Public Health Engineering Minister - Jaipur News in Hindi

जयपुर। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार आमजन को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने कहा कि आगामी गर्मी में संपूर्ण प्रदेश में पेयजल की कहीं कमी नहीं आने दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र के अतिरिक्त मुख्य अभियंता को आकस्मिक कार्यों के लिए अप्रैल में प्रत्येक जिले के लिए 50 लाख रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति जारी करने के लिए अधिकृत कर दिया जाएगा। उन्होंने साथ ही प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अधिकतम 100 हैण्डपम्प की स्थापना की घोषणा की, जिसे जनप्रतिनिधियों की मांग और फिजीबिलिटी देखकर शीघ्रताशीघ्र पूर्ण करने का प्रयास करेंगे।

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री सुरेन्द्र गोयल ने शुक्रवार को विधानसभा में मांग संख्या-27 पेयजल योजना पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे। बहस के बाद सदन ने पेयजल योजना की 72 अरब, 55 करोड़ 93 लाख 32 हजार रुपये की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दीं।

गोयल ने कहा कि पिछली सरकार पांच वर्षों में महज 12 हजार 225 करोड़ रुपए खर्च कर पाई, वहीं वर्तमान सरकार ने चार वर्षों में ही 18 हजार 337 करोड़ रूपये खर्च कर दिए हैं। साल पूरा होते-होते हमें पूरी आशा है कि यह आंकड़ा बढ़कर 20 हजार करोड़ रूपए तक जा पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने जनता जल योजनाओं को बिना किसी व्यवस्था के शुरू किया। पिछली सरकार ने बिजली के बिलों के भुगतान का बजट प्रावधान भी नहीं रखा, जिसके चलते अधिकांश जनता जल योजनाएं बंद हो गई। वर्तमान सरकार ने उन्हें चालू करने का निर्णय लिया है। राज्य में अब तक कुल 3 हजार 192 जनता जल योजनाओं को दुरूस्त कर पुनः चालू करने के लिए 389.66 करोड़ रुपए की राशि की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति कर कार्य हाथ में लिया गया है। इनमें से 2 हजार 697 योजना पूर्ण की जा चुकी है।

उन्हाेंने कहा कि पिछले चार वर्षों की बजट घोषणाओं में 46 परियोजनाओं को पूर्ण करने का कार्य हाथ में लिया। इन परियोजनाओं में से 36 वृहद् परियोजनाओं को भौतिक रूप से पूर्ण कर लिया गया है। इन विगत चार वर्षो में वृहद् पेयजल परियोजनाओं से 27 शहर, 2 हजार 625 ग्राम एवं 5 हजार 119 ढाणियों की एक करोड़ आबादी को सतही स्रोत के स्वच्छ पेयजल से लाभान्वित किया गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान की प्रशन्नसा करते हुए कहा कि इस अभियान के चलते प्रदेश के कई क्षेत्रों का भू जल स्तर कई अधिक बढ़ गया है।

गोयल ने कहा राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय वर्ष 2017-18 में जनवरी माह तक ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए 1143.09 करोड़ रुपए की कुल 5 हजार 595 योजनाएं स्वीकृत की गई, जिनमें एक करोड़ से ऊपर के 114 कार्य भी शामिल हैं। इसके विरूद्ध अब तक 3 हजार 812 कार्य दिसम्बर, 2017 तक पूर्ण हो चुके हैं। शेष कार्य भी चरणबद्ध तरीके से पूर्ण कर लिये जाएंगे।

उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने पांच वर्षो में शहरी जल प्रदाय योजनाओेंं पर 1220.74 करोड़ रुपए का ही बजट आवंटित किया, जिसके विरूद्ध मात्र 984.58 करोड़ रुपए का ही व्यय किया और वर्तमान सरकार चार वर्षों में 1610.77 करोड़ के प्रावधान के विरुद्ध जनवरी 2018 तक 1279.02 करोड़ रुपए व्यय कर दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने चार वर्षों में शहरी क्षेत्र में 2 हजार 222 नए कार्य लागत 1514.81 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी की गई। इस अवधि में स्वीकृत कार्यों में से 1170 कार्य पूर्ण किए जा चुके है एवं 1052 कार्य प्रगतिरत है। चालू वित्तीय वर्ष में प्रावधित राशि 432.36 करोड़ रुपए के विरूद्ध जनवरी 2018 तक 267.45 करोड़ रुपए व्यय किए गए हैं।

गोयल ने कहा कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 1739 करोड़ रुपए लागत की 8 नवीन वृहद् पेयजल परियोजनाओं के कार्य प्रारम्भ किए गए हैं, जिनसे 5 शहर, 652 ग्राम एवं 53 ढाणियों को पेयजल से लाभान्वित किया जाएगा। उन्होनें कहा कि 1767 करोड़ रुपए लागत की 03 परियोजनाओं के कार्य शीघ्र प्रारम्भ किए जाएंगे, जिनसे 991 ग्राम एवं 17 ढाणियों को पेयजल से लाभान्वित किया जाएगा।

उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने वाटर ग्रिड परिकल्पना को साकार करने के लिए इस वर्ष के बजट में दो वृहद् परियोजनाओं की घोषणा की है। पहली परियोजना माही हाई लेवल कैनाल टू जयसमंद ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट है। इस परियोजना से राजसमंद, चितौडगढ़ एवं उदयपुर के ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल समस्या का समाधान हो सकेगा। इस योजना पर 450 करोड रूपए का व्यय होना संभावित हैं।

दूसरी परियोजना बीसलपुर-जयपुर पेयजल परियोजना फेज द्वितीय है। इस परियोजना के अन्तर्गत बीसलपुर बांध के समीप स्थित सूरजपुरा में अतिरिक्त जलशोधन संयंत्र निर्माण किया जाएगा। साथ ही सूरजपुरा से बालावाला तक 97 किलोमीटर लंबी दूसरी मुख्य पाइप लाइन बिछाई जाएगी। इस परियोजना पर 1 हजार करोड रूपए की लागत संभावित हैं।

उन्होंने कहा कि पेयजल समस्या ग्रस्त क्षेत्र के स्थायी समाधान के लिए मुख्यमंत्री द्वारा इस वर्ष के बजट में सतही स्त्रोत आधारित 5 वृहद पेयजल परियोजनाओं की घोषणा की हैं। इसके अनुसार ’परवन-अकावद पेयजल परियोजना’ से खानपुर, मनोहरथाना, लाडपुरा, पीपल्दा, सांगोद, अंता, बारां-अटरु, छबडा एवं किशनगंज क्षेत्र के 1 हजार 821 गांवाें को लाभान्वित किया जाएगा। इस परियोजना पर 2000 करोड़ रुपए की लागत आएगी।

इसी तरह डूंगरपुर, आसपुर एवं दोवडा वृहद पेयजल परियोजना से डूंगरपुर शहर सहित आसपुर एवं दोवडा क्षेत्र के 151 गांव एवं 244 ढाणियों को लाभान्वित किया जाएगा। इस परियोजना पर 365 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इसके साथ ही गरडदा वृहद पेयजल परियोजना से बूंदी जिले की बूंदी व तालेड़ा क्षेत्र के 111 गांवाें एवं 91 ढाणियों में रहने वाले लगभग 2 लाख 90 हजार की आबादी को लाभ मिलेगा। जिसकी लागत 182 करोड 86 लाख संभावित है। झालाजी का बराना वृहद पेयजल परियोजना से बूंदी जिले के केशवरायपाटन क्षेत्र के 72 गांवाें की 1 लाख आबादी को लाभ मिलेगा। इस परियोजना पर 109 करोड 29 लाख की लागत आएगी। कछावन पेयजल परियेाजना से बारां जिले के छबड़ा क्षेत्र के 16 गांवाें एवं 3 ढाणियों की लगभग 20 हजार आबादी को लाभ मिलेगा। परियोजना की लागत 55 करोड 47 लाख संभावित है। इन 7 वृहद पेयजल परियोजनाओं से 1 कस्बा, 2 हजार 170 गांव एवं 339 ढाणियों में रहने वाले लगभग 17 लाख आबादी को लाभ मिलेगा।

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री ने कहा कि हनुमानगढ़, गंगानगर एवं बीकानेर जिले की 150 नहर आधारित योजनाओ के सुदृढ़ीकरण एवं रेपिड ग्रेविटी फिल्टर निर्माण कार्य अनुमानित लागत 132.18 करोड़ रुपए के कार्यादेश माह अक्टूबर 2015 में जारी किए गए जिसके तहत 51 कार्य पूर्ण हो चुके हैं शेष जल योजनाओं पर कार्य प्रगति पर है एवं वर्तमान में रू. 99.10 करोड़ के कार्य पूर्ण हो चुके है। द्वितीय चरण में नहर आधारित 181 पेयजल योजनाओं के पुर्नरुद्धार हेतु जिला हनुमानगढ़, गंगानगर एवं बीकानेर में रू. 145.02 करोड की स्वीकृति जारी कर निविदाएं 14 दिसंबर 17 को प्राप्त की जाकर स्वीकृति की प्रक्रिया में हैं।

उन्होंने कहा कि विद्युत खपत में कमी करने और 10 साल से पुराने पंप हाउसों एवं नलकूपों का संचालन एवं संधारण एस्को पद्धति पर दिया जा रहा है। इसके तहत अब तक उदयपुर-जयसमंद योजना, जोधपुर कायलाना हैडवक्र्स, भीलवाड़ा कांकरोलिया घाटी हैडवक्र्स, भरतपुर शहर एवं राजीव गांधी लिफ्ट केनाल-जोधपुर इत्यादि का संचालन एवं संधारण एस्को पद्धति पर किया जा रहा हैं। अजमेर शहर के पम्पसेट बदलने के लिए निविदा आमंत्रित की गई हैं। कोटा तथा जयपुर शहर के लिए निविदा आमंत्रण की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उदयपुर शहर के लिए अमृत मिशन के अन्र्तगत निविदा प्राप्त कर अनुमोदन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। इसी प्रकार अमृत मिशन के अन्र्तगत अन्य शहरों के लिए उर्जा अंकेक्षण का कार्य प्रगतिरत हैं।

उन्होंने कहा कि अमृत योजना के अन्तर्गत 23 शहरों में पेयजल से संबंधित कार्य हाथ में लिए गए हैं। उक्त कार्यो में पुरानी जीर्ण-शीर्ण पाइप लाइनों को बदलना, पुराने पम्प सेटाें को बदलना, खराब पड़े मीटरों को बदलना, पानी की छीजत को कम करना तथा मॉनिटरिंग के लिए स्काडा आदि के कार्य प्राथमिकता से लिए गए है। अब तक 21 शहरों के लिए 1005.71 करोड़ रुपए के कार्यादेश जारी किये जा चुके हैं। उक्त कार्यों पर अभी तक 90 करोड़ रुपए व्यय किए जा चुके हैं।

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने जैसलमेर व बाड़मेर जिले में पेयजल व्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण पोकरण-फलसूण्ड -बालोतरा-सिवाना वृहद पेयजल परियोजना के क्रियान्वयन को गति देते हुए सितम्बर 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा हैं।

इसी क्रम में जयपुर, झुंझनूं, अजमेर, सीकर, चुरू, प्रतापगढ़, झालावाड़, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा की 11 वृहद पेयजल परियोजना के क्रियान्वयन को भी गति देते हुए सितम्बर 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री द्वारा सदन में की गईं घोषणाएं

• वर्तमान में 6 शहरों में 1968 टेंकर ट्रिप्स प्रतिदिन से पेयजल परिवहन किया जा रहा है। इसी प्रकार पेयजल की कमी वाले 105 ग्राम या ढाणियों में 204 टैंकर ट्रिप प्रतिदिन से पेयजल परिवहन किया जा रहा है, जिसे आवश्यकतानुसार बढ़ाया जाएगा।

• प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में जल गुणवत्ता नियंत्रण एवं निगरानी के कार्य के लिए 20 जिलों में सचल प्रयोगशाला की स्थापना का कार्यादेश दे दिया गया है। सरकार सभी 33 जिलों में सचल प्रयोगशाला की स्थापना करने का प्रयास करेगी।

• प्रदेश में गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों में मुख्यमंत्री द्वारा 5000 आर.ओ. प्लान्ट एवं अन्य संयंत्रों के स्थापना की घोषणा के अनुरूप वर्ष 2018-19 में स्वीकृत नए 500 आर. ओ. प्लांट तथा 500 सोलर डीएफयू सहित हम कुल 3552 आर. ओ. प्लान्ट एवं 1800 सौर उर्जा आधारित डी-फ्लोरीडेशन संयंत्रों की स्थापना का कार्य माह अक्टूबर, 2018 से पूर्व ही स्थापित करने के पूर्ण प्रयास करेंगे।


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