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त्यौहारों के बावजूद ग्राहकी ठप रंगरोगन से भी लोगों ने हाथ खींचे

In spite of festivals, people take hand in hand with less colorful coloring. - Jaipur News in Hindi

बारां। धीरे-धीरे नोटबंदी के कारण हुई मंदी का असर अब कृषि उपज मंडी सहित खुदरा कारोबारियों पर भी पडता दिखाई दे रहा है। आमतौर पर जब ऊंचे भाव होने के बाद किसानों के हाथ पैसे पहुंचते है तब जाकर बाजार में ग्राहक आते है। इस बार नोटबंदी के कारण हुई मंदी की मार से जहां कृषि जिंसों के भाव पूरी तरह कमजोर है।

इसी कमजोरी के चलते बाजारों में चाहे कपडे की दुकान हो या बर्तन की, किराने की दुकान हो या सर्राफे की। सब जगह कारोबार पूरी तरह ठप पडा हुआ है। और तो और दीपावली में केवल मात्र एक पखवाडा शेष है। इस बार तो शहर में रंग रोगन तथा पेण्टस की दुकानों पर भी ग्राहकों की काफी कमी खल रही है। शहर में अकेले संस्था धर्मादा चैराहे पर स्थित सबसे बडी रंग रोगन की दुकान पर भी इन दिनों ग्राहकी काफी कमजोर होने से जितना स्टाफ है उसके मुताबिक ग्राहक भी नही है। व्यापारिक सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष नोटबंदी के कारण मंडी में माल की आवक तो है लेकिन व्यापारियों के पास पूंजी की कमी तथा आगे जीएसटी एवं सीजीएसटी में हो रही परेशानियों के कारण व्यापारियों ने खरीद से हाथ खींच रखे है, जिसके चलते किसानों को अपनी उपज का पूरा मूल्य नही मिल पा रहा।

आज बारां कृषि उपज मंडी में उडद के औसत भाव 3500 रूपए, मूंग 3300 रूपए, मक्का 1000, गेहूं 15000 रूपए प्रति क्विंटल होने से किसान को आगामी फसल के लिए खर्चा भी नही मिल पा रहा। अगर भाव ठीक होते तो किसान सबसे पहले आगे आने वाली गेहूं, सरसों की फसल के लिए खाद खरीदता लेकिन अब तो खाद की खरीद भी उसके बूते में नही है। घर का खर्चा भी नही निकल पा रहा। ऐसे में बाजार में जाकर खरीदारी से भी उसके हाथ काफी पीछे हटते दिखाई दे रहे है। एक रेडिमेड व्यवसायी ने बताया कि इस बार ग्राहकी काफी कमजोर है। हालात को देखते हुए गत वर्ष के मुकाबले इस बार दीपावली व सर्दी के मौसम का माल भी काफी कम लाए है।

आगे जीएसटी, सीजीएसटी की मार है। जिसके कारण नंबर एक के पैसे से इतनी खरीद नही कर पा रहे जितनी बिक्री के लिए आवश्यकता है। अगर हालात यही रहे तो दीपावली की खरीद भी मंदी की मार में आती दिखाई दे रही है। अब लोग धीरे-’धीरे नोटबंदी व जीएसटी के खिलाफ भी मुखर होते दिखाई दे रहे है।

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