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सरकार ! फर्म विशेष पर मेहरबानी की कोई खास वजह? जोन के प्रस्ताव पर भी नहीं लगाई पेनल्टी, पूरे प्रदेश का ठेका देने की तैयारी

Government ! Any special reason for favoring a particular firm? Penalty was not imposed even on the proposal of the zone, preparing to give contract to the whole state - Jaipur News in Hindi

यूडी टैक्स की गलत गणना से नगर निगम को सिर्फ एक मामले में हुआ था 30 लाख रुपए का नुकसान

जयपुर। राजधानी जयपुर में नगरीय विकास कर (यूडी टैक्स) वसूली में लगी फर्म स्पैरो सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड को शहर की सही डीएलसी दरों का भी पता नहीं है। इससे न केवल टैक्स के बिल गलत वितरित हो रहे हैं। बल्कि नगर निगम को भी राजस्व हानि हो रही है। आरटीआई के तहत मिली सूचना के जगतपुरा जोन के केवल एक ही मामले में टैक्स की गलत गणना करने से नगर निगम को 30 लाख रुपए का नुकसान हुआ। इसके लिए जोन से टैक्स वसूली वाली फर्म स्पैरो सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड पर पेनल्टी लगाए जाने का प्रस्ताव भेजा गया। लेकिन, उससे पेनल्टी वसूले जाने की कोई सूचना रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है। ऐसे सैकड़ों मामले हैं जिनमें टैक्स की गलत गणना करके नगर निगम को करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि हुई है। इसके बावजूद स्वायत्त शासन निदेशालय के अफसरों ने टेंडर की शर्तें बदल कर इसी फर्म को पूरे राजस्थान का ठेका देने की तैयारी कर ली है।
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी के अनुसार नगर निगम ग्रेटर के जगतपुरा जोन उपायुक्त के मुताबिक फर्म स्पैरो सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सही सर्वे नहीं किया जा रहा है। सौरभ बोहरा (कल्याण बिल्डमार्ट प्रा. लि.) को जारी टैक्स बिल में फर्म स्पैरो सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा डीएलसी रेट 54910 रुपए के हिसाब से 75,16,846 रुपए की डिमांड राशि का बिल वर्ष 2021 में जारी किया गया था। जबकि कुर्की के दौरान जोन राजस्व अधिकारी ने उस जगह की डीएलसी रेट 97249 रुपए बताई। इस पर जब फर्म स्पैरो सॉफ्टटेक को उक्त बिल सही करने को कहा गया तो उसने 1 करोड़ 5 लाख 5 हजार 141 रुपए की डिमांड राशि बनाई गई।
इस तरह नगर निगम को 29,88, 295 रुपए की हानि हुई। इसलिए बाद में बनाए गए बिल में बढ़ाई गई पूरी राशि पर पेनल्टी लगाई जानी चाहिए। इधर, बिल भुगतान संबंधी नोटशीट्स के मुताबिक प्राइवेट कंपनी स्पैरो सॉफ्टटेक प्राइवेट लिमिटेड को नगर निगम से यूडी टैक्स औऱ विज्ञापन साइट वसूली की राशि पर देय फीस का 80 प्रतिशत पैसा नियमित आटोमेटिक बैंक से ट्रांसफर हो रहा है। जबकि बकाया में से 10 प्रतिशत राशि का भुगतान बिल पेश करने के बाद किया जा रहा है। लेकिन, कहीं भी इस फर्म से पेनल्टी वसूले जाने की जानकारी रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है। यानि, नगर निगम और स्वायत्त शासन विभाग के अफसरों द्वारा फर्म को जानबूझकर गलत ढंग से फेवर किया जा रहा है।

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