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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जोधपुर में जल एवं प्रदूषण नियंत्रण संबंधी कार्यों की समीक्षा की

Chief Secretary V. Srinivas Reviews Water and Pollution Control Initiatives in Jodhpur - Jaipur News in Hindi

जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में शनिवार को मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर के सभागार में जोधपुर, पाली एवं बालोतरा जिलों से संबंधित जल प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरणीय सुधार से जुड़े विषयों पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई।

बैठक में जिला कलक्टर जोधपुर आलोक रंजन, जिला कलक्टर पाली डॉ. रविंद्र गोस्वामी, जिला कलक्टर बालोतरा सुशील कुमार, पुलिस आयुक्त,जोधपुर अंशुमान भोमिया, सीईओ जिला परिषद, जोधपुर आशीष कुमार मिश्रा, नगर निगम एवं जेडीए आयुक्त, जोधपुर राहुल जैन, पुलिस अधीक्षक,जोधपुर कमल शेखावत सहित राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल, पुलिस,डिस्कॉम,रीको, कृषि, नगर निगम, जल संसाधन विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में सभी जिला कलक्टर्स ने अपने जिलों से संबंधित जल प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरणीय सुधार से जुड़े विषयों पर पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन दी।
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की पालना में तैयार होगा 20-सूत्रीय एक्शन प्लान—
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के क्रम में राजस्थान के मुख्य सचिव के स्तर पर एकीकृत समूह का गठन किया गया है। इस समूह द्वारा 20-सूत्रीय एक्शन प्लान तैयार किया जाना है। उन्होंने बताया कि उच्चस्तरीय समिति के साथ विचार-विमर्श के उपरांत इस कार्ययोजना को आगामी सप्ताह माननीय उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना प्रस्तावित है। उन्होंने संबंधित विभागों को पारस्परिक समन्वय के साथ ठोस, व्यावहारिक एवं परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
जमीनी स्तर पर कार्यों का किया निरीक्षण—
मुख्य सचिव ने बैठक से पूर्व बासनी-बेंदा एवं सालावास स्थित एसटीपी का दौरा कर वहां अपनाई जा रही उपचार प्रक्रियाओं एवं संयंत्रों की कार्यप्रणाली का मौके पर निरीक्षण किया। उन्होंने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के संचालन, उपचार की प्रक्रिया तथा उपलब्ध क्षमता के समुचित उपयोग से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्थल निरीक्षण से प्राप्त तथ्यों, औद्योगिक इकाइयों से प्राप्त सुझावों तथा संबंधित विभागों के साथ हुए विचार-विमर्श के आधार पर आगे की कार्ययोजना को अधिक प्रभावी एवं व्यावहारिक स्वरूप दिया जाएगा।
नदी पुनर्जीवन एवं ड्रेनेज लाइन ट्रीटमेंट को मिलेगी प्राथमिकता—
बैठक में नदी पुनर्जीवन के लिए आवश्यक कार्यों, ड्रेनेज लाइनों के उपचार तथा प्रदूषित जल के वैज्ञानिक प्रबंधन से संबंधित विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को विभिन्न स्रोतों से आने वाले अपशिष्ट एवं सीवेज के समुचित उपचार तथा उपचारित जल के निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रबंधन के लिए समन्वित दृष्टिकोण के साथ कार्य करने पर जोर दिया।
भूजल गुणवत्ता की नियमित निगरानी के लिए डाटा आधारित व्यवस्था—
बैठक में भूजल गुणवत्ता की निगरानी को सुदृढ़ करने पर भी विशेष चर्चा हुई। इसके लिए पीजोमीटर एवं हाइड्रोजियोलॉजी आधारित वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से आवश्यक डाटा सेट एकत्रित किए जाने पर विचार किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर भूजल की स्थिति की नियमित निगरानी एवं आवश्यक सुधारात्मक कार्यों के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने को भी प्राथमिकता के साथ करने के निर्देश दिए गए।
सीईटीपी को पूर्ण क्षमता से संचालन को करें सुनिश्चित—
मुख्य सचिव ने औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (CETPs) के प्रभावी संचालन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उनकी उपलब्ध उपचार क्षमता के समुचित उपयोग पर विशेष बल दिया। बैठक में बताया गया कि सीईटीपी की स्थापना पर लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, लेकिन कुछ संयंत्र अपेक्षित क्षमता के अनुरूप संचालित नहीं हो पा रहे हैं तथा कई सीईटीपी अंडर-कैपेसिटी पर संचालित हो रहे हैं। इस स्थिति में उपलब्ध अधोसंरचना का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने तथा सीईटीपी को पूर्ण क्षमता के अनुरूप संचालित करने के उपायों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
सीईटीपी ट्रस्ट एवं जिला प्रशासन के मध्य बेहतर समन्वय पर मंथन—
बैठक में सीईटीपी संचालन से जुड़े ट्रस्ट एवं संस्थाओं तथा जिला प्रशासन के मध्य प्रभावी समन्वय की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। संयंत्रों के संचालन, निगरानी, क्षमता उपयोग तथा संबंधित दायित्वों के निर्वहन में बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए आवश्यक संस्थागत व्यवस्था विकसित करने पर विचार किया गया। अधिकारियों को आपसी समन्वय के माध्यम से व्यावहारिक समाधान विकसित करने के निर्देश दिए गए।
विभागीय समन्वय एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर बल—
मुख्य सचिव ने कहा कि नदी पुनर्जीवन, सीवेज एवं औद्योगिक अपशिष्ट के उपचार, भूजल गुणवत्ता की निगरानी तथा उपचार संयंत्रों के प्रभावी संचालन जैसे विषय परस्पर जुड़े हुए हैं। अतः इनसे संबंधित कार्यों को अलग-अलग विभागीय स्तर पर देखने के बजाय समन्वित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है। उन्होंने संबंधित विभागों को अपने-अपने स्तर पर आवश्यक सूचनाएं, सुझाव एवं कार्ययोजना बिंदु उपलब्ध करवाने तथा प्रस्तावित 20-सूत्रीय एक्शन प्लान को निर्धारित समयावधि में अंतिम रूप देने के लिए तत्परता से कार्य करने के निर्देश दिए।
बैठक में आगामी सप्ताह उच्चतम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाने वाली कार्ययोजना के प्रमुख बिंदुओं, आवश्यक कार्यों की प्राथमिकता, विभागीय दायित्वों तथा क्रियान्वयन के रोडमैप पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

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Web Title-Chief Secretary V. Srinivas Reviews Water and Pollution Control Initiatives in Jodhpur
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