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मूंग खरीद नहीं करने की वजह से हुए घाटे की भरपाई करें भाजपा सरकार- रामपाल जाट

BJP government should compensate for the loss incurred due to not purchasing moong- Rampal Jat - Jaipur News in Hindi

जयपुर। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा है कि भाजपा सरकार द्वारा मूंग की खरीद नहीं करने से 30 सितंबर तक का ही घाटा 79 करोड़ 61 लाख 94 हजार 884 रुपए हो गया है। अक्टूबर की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है, उसको जोड़ने पर तो यह घाटा दोगुना से अधिक हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद 15 अक्टूबर से आरंभ की गई जबकि, 60 दिन की फसल होने के कारण मूंग अगस्त के अंतिम सप्ताह में ही मंडी एवं बाजारों में आना शुरू हो गया था। तब तक तो किसानों को अपना मूंग न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बेचने का सरकार ने विकल्प ही नहीं दिया। इसके लिए भाजपा की केंद्र एवं राज्य दोनों सरकार संयुक्तत: एवं पृथकत: उत्तरदाई है। इस घाटे की पूर्ति के लिए सरकार को किसानों के बैंक खातों में अंतर राशि का अंतरण किए जाने की आवश्यकता है। रामपाल जाट ने कहा कि रोचक तथ्य तो यह है कि सितंबर माह तक ही राज्य की मंडियों में मूंग की आवक 4,73,362 क्विंटल है, जबकि 7 नवम्बर तक की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मूंग की मात्रा 1,20,277.9 क्विंटल है। इस अवधि में अक्टूबर एवं नवंबर की आवक को सम्मिलित किया जाए तो यह खरीद नगण्य है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मूंग बेचने पर किसानों को एक क्विंटल के दाम 8,682 रुपए प्राप्त होते हैं जबकि बाजार में इसी मूंग के 6 से लेकर 7000 रुपए तक प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि बाजार के अधिकतम मूल्य के अनुसार भी एक क्विंटल पर किसानों को 1,682 रुपए काम प्राप्त होते हैं। कमोबेश यही स्थिति उड़द, मूंगफली, सोयाबीन जैसी उपजो की है। भारत सरकार ने देश को तिलहन एवं दलहन के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की नीति घोषित की हुई है। तब भी देश के किसानों को इन उपजो का विक्रय मजबूरी में घाटा उठाकर करना पड़ता है जबकि खाद्य तेल एवं दालों के आयात पर प्रति वर्ष सरकार भारी भरकम राशि खर्च करती है । उदाहरण के तौर पर वर्ष 2022-23 का आयात खर्च 173.04 हजार करोड रुपए है।
किसान महापंचायत ने कहा कि अभी भी सरकार द्वारा स्थापित 365 खरीद केदो पर खरीद आरंभ नहीं हुई है। जिससे किसानों को सरकार के घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से वंचित होना पड़ रहा है। यह स्थिति तो तब है जब सरकार संसद में किसी भी किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दामों में अपनी उपज बेचने से विवश नहीं होने देने की गारंटी देती रहती है। सरकार की कथनी- करनी में जमीन आसमान जितना अंतर है। अभी तो केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार है, फिर भी किसानों के हितों की बलि चढ़ाई जा रही है।
इस संबंध दलहन एवं तिलहन उपजो की खरीद के लिए में राज्य की ओर से अधिकृत राजफेड संस्था के प्रबंध निदेशक नारायण सिंह को किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सोप कर उनका मूंग न्यूनतम न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार द्वारा खरीद नहीं करने का दर्द व्यक्त किया है। यह तो वे किसान हैं, जिनका खरीद के लिए पंजीयन किया गया तथा उनको खरीद की तारीख भी आवंटित कर दी गयी, जब वे खरीद केन्द्रों पर पहुंचे तो खरीद केंद्र ही चालू नहीं थे।
इस ज्ञापन की प्रति राज्य के प्रमुख शासन सचिव सहकारिता एवं मुख्य सचिव के अतिरिक्त देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी प्रेषित की गई है। प्रतिनिधिमंडल में किसान महापंचायत के युवा प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर चौधरी, प्रदेश मंत्री बत्ती लाल बेरवा ग्राम पंचायत हट्टूपुरा के सरपंच भेरू राम शेषमा तथा दूदू के समाजसेवी बजरंग लाल जजुंदा आदि भी सम्मिलित रहे।

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