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बॉर्डर गांवों में BSF की ड्रोन ट्रेनिंग: कैसे उड़ते हैं ड्रोन, कैसे रोकें – ग्रामीणों को दी गई तकनीकी जानकारी

BSF drone training in border villages: How drones fly, how to stop them - technical information given to villagers - Bikaner News in Hindi

बीकानेर। भारत-पाक सीमा पर ड्रोन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) सतर्क हो गई है। सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अब बॉर्डर के गांवों में आम नागरिकों को ड्रोन की पहचान और प्रतिक्रिया देने की ट्रेनिंग दी जा रही है। बीएसएफ के इंटेलिजेंस विंग ने बीकानेर के सीमावर्ती गांव 12 KND में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें ग्रामीणों को ड्रोन की पहचान, संभावित खतरों और उनसे निपटने के उपाय सिखाए गए।

पहलगांव हमले के बाद पाकिस्तान की बौखलाहटBSF के डिप्टी कमांडेंट (इंटेलिजेंस) महेश चंद्र जाट ने बताया कि पहलगांव आतंकी हमले और उसके जवाब में भारत द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पाकिस्तान बुरी तरह बौखलाया हुआ है। इसी घबराहट में वह बॉर्डर से सटे इलाकों में ड्रोन के जरिए गुप्त सूचनाएं इकट्ठा करने, मादक पदार्थ भेजने और असामाजिक गतिविधियां फैलाने में लगा है। ग्रामीणों को सिखाई गई ड्रोन की भाषा
डिप्टी कमांडेंट जाट ने ग्रामीणों को बताया :
ड्रोन कैसे उड़ते हैं?
कैसी आवाज करते हैं?
कितनी ऊंचाई पर उड़ते हैं?
कैसे पहचानें कि आसमान में उड़ रही वस्तु ड्रोन है?
क्या करना चाहिए अगर किसी को ड्रोन दिखे?
कार्यक्रम में एक असली ड्रोन उड़ाकर भी ग्रामीणों को डेमो दिया गया, ताकि वे पहचान सकें कि ड्रोन की आवाज कैसी होती है और वह दिन-रात कैसे ऑपरेट होता है।
सिर्फ हमला नहीं, जासूसी भी करते हैं ड्रोनबीएसएफ के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ड्रोन का इस्तेमाल केवल विस्फोटक गिराने या हमले के लिए नहीं होता, बल्कि:
सीमा पार से जासूसी के लिए वीडियो और फोटोग्राफी करते हैं।
सुरक्षा चौकियों, सैनिक मूवमेंट और रणनीतिक ठिकानों की जानकारी इकट्ठा करते हैं।
ड्रग्स तस्करी के लिए भी इन्हीं का इस्तेमाल किया जा रहा है – अफीम, स्मैक, और अन्य मादक पदार्थ गिराने के लिए।
संदिग्ध वस्तु दिखे तो तुरंत सूचित करेंBSF ने ग्रामीणों को कुछ सख्त निर्देश भी दिए:
कोई संदिग्ध वस्तु या ड्रोन दिखे तो तुरंत BSF को सूचना दें।
ड्रोन या किसी भी संदिग्ध वस्तु को न छुएं, न उसके पास जाएं।
किसी अजनबी या संदिग्ध व्यक्ति की सूचना भी तत्काल इंटेलिजेंस को दें।
ड्रोन की आवाज को पहचानें, खासकर रात के समय।
स्थानीय नेतृत्व और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में गांव के सरपंच विजय सिंगड़, BSF कंपनी कमांडर सुरेश कुमार, असिस्टेंट कमांडेंट विवेक कुमार और इंटेलिजेंस इंस्पेक्टर अजय पांडेय भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने भी सवाल पूछे और ड्रोन से जुड़ी तकनीकी जानकारी को गंभीरता से समझा।
ड्रोन का मुकाबला अब केवल फौज का नहीं, जनता का भी कर्तव्य
भारत की सुरक्षा अब केवल सीमाओं पर तैनात जवानों की जिम्मेदारी नहीं रही। ड्रोन जैसे नए खतरे से निपटने के लिए स्थानीय नागरिकों की भागीदारी भी बेहद जरूरी हो गई है। बीएसएफ की यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों में जागरूकता फैलाकर दुश्मन की चालों को समय रहते नाकाम करने की दिशा में एक सशक्त कदम मानी जा रही है।
इस तरह की ट्रेनिंग जल्द ही श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जैसलमेर और अन्य सीमावर्ती जिलों में भी दी जाएगी ताकि राजस्थान की सरहदें हर प्रकार के खतरे के प्रति और भी अधिक सजग बन सकें।

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Web Title-BSF drone training in border villages: How drones fly, how to stop them - technical information given to villagers
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