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अफसर ही उड़ा रहे कानून का मखौल : 2017 बैच के IAS अफसर सुशील कुमार पर दर्ज होगी FIR

Officers are mocking the law: FIR will be lodged against 2017 batch IAS officer Sushil Kumar - Ajmer News in Hindi

अजमेर। राजस्थान में आईएएस और आईपीएस अफसर कानून का मखौल उड़ा रहे हैं। इससे राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी बदनाम हो रही है। कोर्ट स्टे होने के बावजूद पिछले साल पटेल मैदान स्थित इंडोर स्टेडियम में रेस्टोरेंट को नगर निगम द्वारा जमींदोज कर दिया गया।

इस मामले में अब अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने तत्कालीन कलेक्टर एवं स्मार्ट सिटी सीओ अंशदीप, नगर निगम आयुक्त 2017 बैच के अफसर सुशील कुमार और स्मार्ट सिटी के एक्सईएन पी. के. मौर्य के खिलाफ कोतवाली थाने को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस मामले की जांच सहायक पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी से कराई जाए। इससे पहले वर्ष 1993-94 में आईएएस मनोज शर्मा द्वारा उपखंड अधिकारी रहते हुए नियम विरुद्ध बिना पुलिस जाप्ते के कार्यवाही करने के प्रयास में उनका हाथ धारदार हथियार से काट दिया गया था। बामुश्किल जान बचानी पड़ी थी। हाल ही में अजमेर विकास प्राधिकरण गिरधर और आईपीएस सुशील को सस्पेंड करते हुए विभागीय जांच में दोषी पाया गया है।
अब अजमेर नगर निगम आयुक्त सुशील कुमार ने जल्दी प्रसिद्धि पाने के प्रयास में कानून का मखौल उड़ाते हुए कोर्ट स्टे होने के बावजूद रेस्टोरेंट को जमींदोज करके कोर्ट आदेश की अवहेलना कर डाली। जबकि इंडोर स्टेडियम में जिस रेस्टोरेंट को जमींदोज किया गया, वह जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में बनी कमेटी की अनुमति से वर्ष 2017 से चल रहा था। इंडोर स्टेडियम में रेस्टोरेंट का मामला वर्ष 2021 से ही कोर्ट में विचाराधीन है।
संचालक यशपाल और महिपाल सिंह ने इस पर कोर्ट से स्टे ले रखा था। इसके बावजूद इसे हटाने के लिए स्मार्ट एसीओ की ओर से 30 सितंबर, 2022 को तीन दिन का नोटिस दिया गया था। इसके बावजूद 22 अक्टूबर को फिल्मी स्टाइल में आयुक्त सुशील कुमार की अगुवाई में गए दस्ते ने रेस्टोरेंट को तोड़ कर खूब वाहवाही लूटी थी।
इस पर रेस्टोरेंट मालिक ने कोर्ट की अवमानना के लिए पहले पुलिस में धारा 166, 323, 341, 427, 384 एवं 120 बी के तहत पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाने का प्रयास किया। लेकिन, पुलिस की मदद नहीं मिलने पर उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अब कोर्ट ने धारा 156 (3) के तहत परिवाद थाने पर भेजते हुए एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
जिन धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है, उनमें अगर सभी आरोप साबित पाए गए तो अधिकतम 2 साल की सजा का प्रावधान है। खास बात यह कि इनमें धारा 384 नॉन बेलेवल होने के कारण पुलिस गिरफ्तार भी कर सकती है। इसमें केवल कोर्ट ही जमानत देने के लिए सक्षम है।
अजमेर नगर निगम सूत्रों के मुताबिक आयुक्त सुशील कुमार वार्ड पार्षदों को साथ लिए बिना निचले अफसरों के सुझावों को लागू करने के लिए प्रसिद्ध हैं। सरकारी पद का दुरुपयोग और सरकारी आदेशों की अवहेलना करना नगर निगम और विकास प्राधिकरण के लिए कोई बड़ी बात नहीं है। क्योंकि आयुक्त सुशील कुमार ने जो किया है, उससे स्पष्ट है कि आईएएस स्तर के अधिकारी समझते हैं कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

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Web Title-Officers are mocking the law: FIR will be lodged against 2017 batch IAS officer Sushil Kumar
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