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बुधो पुंदेर गांव में वक्फ बोर्ड जमीन मामले में नया मोड़, ग्राम पंचायत सुप्रीम कोर्ट में करेगी अपील

New twist in Waqf Board land case in Budho Punder village, Gram Panchayat will appeal in Supreme Court - Jalandhar News in Hindi

जालंधर । पंजाब के कपूरथला जिले के बुधो पुंदेर गांव की वक्फ बोर्ड जमीन मामले में ग्राम पंचायत ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने का निर्णय लिया है। ग्राम पंचायत का आरोप है कि इस भूमि पर उनका अधिकार है और वक्फ बोर्ड का दावा गलत है। अब ग्राम पंचायत इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। इस मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब उच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड के दावे को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि यह भूमि मस्जिद, कब्रिस्तान और टाकिया (मुसलमानों के सामान्य उपयोग के लिए भूमि) के लिए दान की गई थी, और बाद में 1971 में वक्फ बोर्ड को सौंप दी गई थी। न्यायालय ने इस भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया और ग्राम पंचायत की दलीलों को खारिज कर दिया। ग्राम पंचायत के सदस्य रेशम सिंह ने कहा कि इस भूमि पर पिछले 40-50 सालों से गांव के लोग खेती कर रहे हैं और उन्होंने इस भूमि पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि इसे जमींदारों ने वक्फ बोर्ड से छुड़वाया था। रेशम सिंह ने यह भी कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति और मस्जिद मुसलमानों की है, लेकिन भूमि पर जो कब्जा है, वह जमींदारों ने जानबूझकर किया हुआ है। इस पर उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत अब इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी।
ग्राम पंचायत के सरपंच कुलवंत सिंह ने भी इस फैसले पर असहमति जताई है। उन्होंने कहा कि गांव में स्थित मस्जिद और गुरुद्वारा दोनों ही खुले हैं, लेकिन मस्जिद में आज तक कोई व्यक्ति नहीं आया है। वहीं, गुरुद्वारे में संगत दर्शन के लिए आती है। सरपंच ने बताया कि यह भूमि करीब 16 से 17 एकड़ में फैली हुई है, और इस पर पिछले 15-20 सालों से मुकदमा चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जमीन नगर पंचायत की है और उसी की रहेगी। सरपंच ने बताया कि मस्जिद 1947 से पहले बनी हुई थी, जबकि गुरुद्वारा मस्जिद की जगह पर नहीं, बल्कि उससे अलग एक एकड़ में बनाया गया है।
इस मामले में न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर और न्यायमूर्ति सुदीप्ति शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। ग्राम पंचायत ने वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत गठित न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें वक्फ बोर्ड के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। पंचायत ने तर्क दिया था कि पंजाब अधिनियम, 1953 के तहत इस संपत्ति पर उनका अधिकार बनता है, जो वक्फ अधिनियम, 1995 से प्राथमिकता रखता है। हालांकि, न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और माना कि यह मामला भूमि के वर्गीकरण का है, न कि विभिन्न कानूनों की प्राथमिकता का।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आधिकारिक अभिलेखों में इस भूमि को वक्फ संपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है, और इसे मस्जिद, कब्रिस्तान और टाकिया के रूप में पहचान दी गई है। खंडपीठ ने वक्फ अधिनियम के तहत इस भूमि के स्वामित्व का निर्धारण किया और कहा कि यह भूमि धार्मिक उद्देश्यों के लिए है, न कि निजी इस्तेमाल के लिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि पंजाब अधिनियम, 1953 की संवैधानिक सुरक्षा, वक्फ अधिनियम के प्रावधानों पर प्रभाव नहीं डालती है।
--आईएएनएस

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Web Title-New twist in Waqf Board land case in Budho Punder village, Gram Panchayat will appeal in Supreme Court
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