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शिक्षक दिवस पर राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किया शिक्षकों को सम्मानित

Governor Prof. Asim Kumar Ghosh and Chief Minister Nayab Singh Saini Honor Teachers on Teachers Day - Chandigarh News in Hindi

चंडीगढ़। हरियाणा में शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पंचकूला में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं असाधारण योगदान देने वाले 79 शिक्षकों को सम्मानित किया। सम्मानित शिक्षकों को एक-एक लाख रुपये की नकद राशि, पदक, शॉल तथा दो-दो अग्रिम वेतन वृद्धि प्रदान की गई। इस अवसर पर हरियाणा की प्रथम महिला श्रीमती मित्रा घोष तथा स्कूल शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा भी उपस्थित रहे। शिक्षक केवल ज्ञान नहीं, विवेक और संस्कार भी प्रदान करता है - राज्यपाल
समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने सभी सम्मानित शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का सम्मान नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षक समुदाय, शिक्षा व्यवस्था और हरियाणा के उज्ज्वल भविष्य का सम्मान है।
राज्यपाल ने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि शिक्षण केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज निर्माण का सशक्त माध्यम है। शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों को बधाई देने का अवसर नहीं, बल्कि शिक्षा के महत्व को स्वीकार करने और शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन भी है।
उन्होंने कहा कि आज शिक्षा की दुनिया तेजी से बदल रही है। इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से विद्यार्थी कुछ ही क्षणों में दुनिया भर की जानकारी प्राप्त कर सकता है, लेकिन जानकारी और ज्ञान में अंतर है तथा ज्ञान और विवेक में भी अंतर है। तकनीक सूचना दे सकती है, लेकिन शिक्षक विवेक प्रदान करता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उत्तर दे सकती है, लेकिन शिक्षक सही प्रश्न पूछना सिखाता है। राज्यपाल ने कहा कि तकनीक के इस युग में शिक्षक की भूमिका कम नहीं हुई है, बल्कि और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
शिक्षा का उद्देश्य केवल सफल व्यक्ति नहीं, अच्छा इंसान बनाना भी है
राज्यपाल ने कहा कि आज के शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना और परीक्षा परिणाम देना नहीं है। शिक्षक को ज्ञान के साथ-साथ विद्यार्थियों के चरित्र का भी निर्माण करना है। उसे विद्यार्थियों में अनुशासन, ईमानदारी, परिश्रम, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करनी है।
उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कोई बच्चा आर्थिक अथवा सामाजिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा की दौड़ में पीछे न रह जाए। विशेष रूप से बेटियों को समान अवसर प्रदान करना और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल यह तय करना नहीं होना चाहिए कि बच्चा भविष्य में क्या बनेगा, बल्कि इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि वह कैसा मनुष्य बनेगा। हमें ऐसे डॉक्टर चाहिए जिनमें सेवा की भावना हो, ऐसे वैज्ञानिक चाहिए जो मानवता के हित में कार्य करें, ऐसे अधिकारी चाहिए जो न्याय और संवेदनशीलता के साथ निर्णय लें, ऐसे उद्यमी चाहिए जो रोजगार के अवसर पैदा करें और ऐसे नागरिक चाहिए जो देश एवं समाज के प्रति जिम्मेदार हों।
विद्यार्थियों को केवल परीक्षाओं के लिए नहीं, जीवन के लिए तैयार करें - राज्यपाल
राज्यपाल ने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल परीक्षाओं के लिए तैयार न करें, बल्कि उन्हें जीवन के लिए तैयार करें। उन्हें केवल नौकरी प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए उपयोगी बनने के लिए तैयार करें। उन्हें केवल उत्तर न दें, बल्कि प्रश्न पूछना भी सिखाएं, क्योंकि प्रश्न करने वाला विद्यार्थी ही भविष्य का शोधकर्ता और नवप्रवर्तक बनता है।
2047 के विकसित भारत की नींव आज की कक्षाओं में रखी जा रही है
राज्यपाल ने वर्ष 2047 के विकसित भारत का उल्लेख करते हुए कहा कि विकसित भारत की मजबूत नींव आज की कक्षाओं में रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि आज किसी विद्यालय में पढ़ रहा बच्चा कल वैज्ञानिक बन सकता है, कोई बेटी देश की महान प्रशासक बन सकती है और कोई विद्यार्थी खिलाड़ी, चिकित्सक अथवा शिक्षक के रूप में देश की सेवा कर सकता है। उस भविष्य की मजबूत नींव आज शिक्षक रख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य संसद में जितना आकार लेता है, उतना ही विद्यालय की कक्षाओं में भी आकार लेता है और उस भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण वास्तुकार शिक्षक है।
सम्मान नई जिम्मेदारी की शुरुआत
राज्यपाल ने विशेष रूप से सम्मानित शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह पुरस्कार उनकी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत है। आज राज्य ने उनके उत्कृष्ट कार्यों को पहचान दी है। अब उनकी जिम्मेदारी है कि वे अपने अनुभव अन्य शिक्षकों के साथ साझा करें, नई पीढ़ी के शिक्षकों का मार्गदर्शन करें, अपने विद्यालयों को और बेहतर बनाने में योगदान दें तथा विद्यार्थियों में उत्कृष्टता के साथ-साथ मानवीय मूल्यों का भी विकास करें।
इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया, राज्यपाल के सचिव विजयकुमार भाविकट्टी, माध्यमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक जितेंद्र कुमार, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनीता मलिक, उपायुक्त सतपाल शर्मा, पंचकूला के महापौर श्याम लाल बंसल, जिला भाजपा अध्यक्ष अजय मित्तल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

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Web Title-Governor Prof. Asim Kumar Ghosh and Chief Minister Nayab Singh Saini Honor Teachers on Teachers Day
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