• Aapki Saheli
  • Astro Sathi
  • Business Khaskhabar
  • ifairer
  • iautoindia
1 of 1

'सोमनाथ और भारत की अदम्य आत्मशक्ति', मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने लिखा लेख

Somnath and Indias Indomitable Spirit: PM Modi Pens Article on 75th Anniversary of Temple Consecration - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई को पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। उन्होंने यह जानकारी देते हुए एक लेख में भव्य-दिव्य सोमनाथ धाम को समर्पित अपनी भावनाएं भी व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि इस पावनस्थल की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए किस प्रकार देश की कई पीढ़ियों ने निरंतर संघर्ष किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपना लेख शेयर किया। पोस्ट में उन्होंने लिखा, "पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में 11 मई को मुझे एक बार फिर वहां जाने का सौभाग्य मिलने वाला है। यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि इस पावनस्थल की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए किस प्रकार देश की कई पीढ़ियों ने निरंतर संघर्ष किया।" सोमनाथ मंदिर को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया है। उन्होंने बताया कि 2026 की शुरुआत में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होना उनके लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा, जो मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया गया था।
उन्होंने लिखा, "वर्ष 2026 की शुरुआत में मुझे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सम्मिलित होने का सौभाग्य मिला। यह सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष बाद भी मंदिर के शाश्वत और अविनाशी होने का पर्व था।"
पीएम मोदी ने उल्लेख किया कि 11 मई को वे एक बार फिर सोमनाथ जाएंगे, जहां वे पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर होने वाले कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, "अब 11 मई को मुझे एक बार फिर सोमनाथ जाने का सुअवसर प्राप्त हो रहा है। इस बार यह यात्रा पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में है। मैं उस क्षण को फिर जीने जा रहा हूं, जब भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर का लोकार्पण किया था। उस दिन, सोमनाथ में विध्वंस से सृजन तक की यात्रा फिर से जीवंत होगी। छह महीनों के भीतर सोमनाथ के इतिहास से जुड़े इन दो अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी बनना मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है।"
अपने लेख में प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और उसकी निरंतरता का प्रतीक बताया। उन्होंने लिखा, "सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, हमारी सभ्यता का अटूट संकल्प है। इसके सामने लहराता विशाल समुद्र अनंत काल की अनूभूति कराता है। इसकी लहरें हमें सिखाती हैं कि तूफान चाहे कितने भी विकराल क्यों न हों, मनुष्य का साहस और आत्मबल हर बार फिर से उठ खड़ा होने में सक्षम है। तट से टकराती लहरें सदियों से यह उद्घोष कर रही हैं कि मानवीय चेतना को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता है।"
उन्होंने प्राचीन ग्रंथों के उल्लेख के साथ सोमनाथ की आध्यात्मिक महत्ता को भी रेखांकित किया और इसे शैव परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया। पीएम मोदी ने कहा, "हमारे प्राचीन शास्त्रों में लिखा है, 'प्रभासं च परिक्रम्य पृथिवीक्रमसंभवम्।' अर्थात दिव्य प्रभास (सोमनाथ) की परिक्रमा पूरी पृथ्वी की परिक्रमा के समान है। जब लोग यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, तब उन्हें उस सभ्यता की अद्भुत निरंतरता का भी अनुभव होता है, जिसकी ज्योति कभी बुझाई नहीं जा सकी। कई साम्राज्य आए और गए, समय बदला और इतिहास ने ढेरों उतार-चढ़ाव देखे, फिर भी सोमनाथ हमारे हृदय में हमेशा बना रहा।"
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "यह समय उन असंख्य महान विभूतियों के स्मरण का भी है, जो क्रूर आक्रांताओं के सम्मुख अडिग रहे। लकुलीश और सोम शर्मा जैसे मनीषियों ने प्रभास को शैव दर्शन का महान केंद्र बनाया। चक्रवर्ती महाराज धारसेन चतुर्थ ने सदियों पहले वहां दूसरा मंदिर बनवाया था। समय की कठिन परीक्षा के बीच भीम प्रथम, जयपाल और आनंदपाल जैसे शासकों ने आक्रमणों के विरुद्ध अपनी सभ्यता की ढाल बनकर मंदिर की रक्षा की थी। ऐसा माना जाता है कि महान राजा भोज ने भी इस पावन स्थल के पुनर्निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया था। कर्णदेव सोलंकी और जयसिंह सिद्धराज ने गुजरात की राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति को पुनर्स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।"
उन्होंने आगे लिखा, "भाव बृहस्पति, कुमारपाल सोलंकी और पाशुपताचार्यों ने इस तीर्थ को आराधना और ज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित करने में अमूल्य योगदान दिया। विशालदेव वाघेला और त्रिपुरांतक ने इसकी बौद्धिक और आध्यात्मिक परंपराओं की रक्षा की। महिपाल चूड़ासमा और राव खंगार चूड़ासमा ने विध्वंस के बाद पूजा-पाठ की परंपरा को पुनर्जीवित किया। पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर, जिनकी 300वीं जयंती मनाई जा रही है, उन्होंने सबसे चुनौतीपूर्ण समय में भी भक्ति की परंपरा को जीवंत रखा। बड़ौदा के गायकवाड़ों ने तीर्थयात्रियों के अधिकारों की रक्षा की। इसके साथ ही हमारी यह धरती वीर हमीरजी गोहिल, वीर वेगड़ाजी भील जैसे पराक्रमियों से धन्य हुई है। उनके साहस और बलिदान को आज भी याद किया जाता है।"
प्रधानमंत्री ने 20वीं सदी के पुनर्निर्माण आंदोलन का भी उल्लेख किया, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया। अपने लेख में पीएम मोदी ने लिखा, "1940 के दशक में स्वतंत्रता की भावना पूरे भारत में फैल रही थी। सरदार पटेल जैसे महान नेताओं के नेतृत्व में स्वतंत्र भारत की नींव रखी जा रही थी। ऐसे में एक बात जो उन्हें बहुत व्यथित करती थी, वह थी- सोमनाथ की दुर्दशा। 13 नवंबर 1947 को, दिवाली के समय, उन्होंने सोमनाथ के जर्जर अवशेषों के सामने खड़े होकर, समुद्र का जल हाथ में लेकर संकल्प लिया, 'इस (गुजराती) नववर्ष पर हमारा निश्चय है कि सोमनाथ का पुनर्निर्माण होगा। सौराष्ट्र के लोगों को इसके लिए हर तरह से अपना योगदान देना होगा। यह एक पावन कार्य है, जिसमें हर किसी को भागीदारी निभानी होगी।' उनके इस आह्वान ने सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारतवर्ष को नए उत्साह से भर दिया।"
उन्होंने आगे कहा कि दुर्भाग्यवश, सरदार पटेल अपने उस सपने को साकार होते नहीं देख सके, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को समर्पित कर दिया था। इससे पहले कि जीर्णोद्धार के बाद सोमनाथ मंदिर भक्तों के लिए खुलता, उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इसके बावजूद, प्रभास पाटन की पावन धरती पर उनका प्रभाव निरंतर महसूस किया जाता रहा है। उनके विजन को के.एम. मुंशी ने आगे बढ़ाया, जिन्हें नवानगर के जामसाहेब का समर्थन मिला। 1951 में मंदिर का पुनर्निर्माण पूरा होने पर प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के विरोध के बावजूद राजेंद्र प्रसाद ने समारोह में हिस्सा लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया।
उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने दायित्व को भी याद किया। उन्होंने लिखा, "मुझे अक्टूबर 2001 का वह समय आज भी अच्छे से याद है, जब मैंने मुख्यमंत्री के रूप में दायित्व संभाला था। 31 अक्टूबर 2001 को, सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर गुजरात सरकार ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 50वीं वर्षगांठ का भव्य आयोजन किया। इसी समय सरदार पटेल की 125वीं जयंती भी मनाई जा रही थी। इस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन गृहमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी की मौजूदगी ने इसे और भी गरिमापूर्ण बना दिया।"
पीएम मोदी ने 11 मई 1951 के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के भाषण का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सोमनाथ मंदिर दुनिया को यह संदेश देता है कि अद्वितीय श्रद्धा और विश्वास को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह मंदिर सदैव लोगों के हृदय में बसा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के पुनर्निर्माण से सरदार पटेल का सपना साकार हुआ है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सरदार पटेल की भावनाओं के अनुरूप लोगों के जीवन में समृद्धि भी लानी होगी। इसको लेकर उनके संदेश अत्यंत प्रेरणादायी रहे हैं।
पीएम मोदी ने अपने लेख में लिखा, "पिछले एक दशक से हम इसी मार्ग पर चल रहे हैं। 'विकास भी, विरासत भी' के मंत्र से प्रेरित होकर सोमनाथ से काशी, कामाख्या से केदारनाथ, अयोध्या से उज्जैन और त्रयंबकेश्वर से श्रीशैलम तक, हमने अपने आध्यात्मिक केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया है। इसके साथ ही उनकी पारंपरिक पहचान को भी बनाए रखा है। आज बेहतर कनेक्टिविटी से ज्यादा से ज्यादा लोग यहां आ पा रहे हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिल रहा है, आजीविका सुरक्षित हो रही है, साथ ही 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना और सशक्त हो रही है।
अपने लेख में प्रधानमंत्री ने लिखा, "सोमनाथ की रक्षा और इसके पुनर्निर्माण के लिए जिन्होंने अपना सर्वस्व बलिदान किया, उनका संघर्ष हम कभी नहीं भुला सकते। भारत के विभिन्न हिस्सों से आए लोगों ने इसकी भव्यता और दिव्यता को लौटाने में अपना अद्भुत योगदान दिया। उनकी ऐसी ही आस्था पूरे भारतवर्ष को लेकर भी थी। वे एकता की ऐसी अद्भुत डोर से बंधे थे, जिसे जमीनी सीमाओं में नहीं बांटा जा सकता। आज की विभाजित दुनिया में, सोमनाथ से मिलने वाली एकता की यह सीख पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। सोमनाथ अपनी गौरवशाली परंपरा के साथ हमेशा खड़ा रहेगा, क्योंकि यह हमारी साझा सभ्यता का प्रतीक है। इसी गौरव को नमन करते हुए बलिदान देने वाले वीरों की स्मृति में और दानवीरों की उदारता को याद करते हुए अगले एक हजार दिनों तक यहां विशेष पूजा आयोजित की जाएगी। यह देखकर बहुत प्रसन्नता हो रही है कि बड़ी संख्या में लोग इस पुनीत कार्य में अपना योगदान दे रहे हैं।"
उन्होंने लिखा, "सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि जब कोई समाज अपनी आस्था, अपनी संस्कृति और अपनी एकता से जुड़ा रहता है, तब उसे लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता। आज भी हमारी सबसे बड़ी शक्ति यही साझा चेतना है, यही एकात्म भाव है। यही भावना हमें विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में साथ चलने की प्रेरणा देती है।"
अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया कि इस पावन अवसर पर पवित्र सोमनाथ धाम की यात्रा करें और इसकी भव्यता के साक्षात दर्शन करें।
उन्होंने कहा, "जब आप सोमनाथ के तट पर खड़े होंगे, तब उसकी प्राचीन प्रतिध्वनियों को अपने भीतर महसूस करेंगे। वहां आपको केवल भक्ति का अनुभव नहीं होगा, बल्कि उस सभ्यतागत चेतना की सशक्त धड़कन भी सुनाई देगी, जो कभी रुकी नहीं, जिसकी तीव्रता कभी कम नहीं हुई। वहां आप भारत की उस अपराजित आत्मा का अनुभव करेंगे, जिसने हर आघात के बावजूद अपनी पहचान और अपनी संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखा। आप समझ पाएंगे कि इतने प्रयासों के बाद भी क्यों हमारी सभ्यता मिट नहीं सकी। वहां आपको चिर विजय के उस दर्शन का अनुभव होगा, जो सदियों से भारत की शक्ति बना हुआ है। मुझे पूरा विश्वास है कि आपके लिए यह एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।"
--आईएएनएस

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

यह भी पढ़े

Web Title-Somnath and Indias Indomitable Spirit: PM Modi Pens Article on 75th Anniversary of Temple Consecration
खास खबर Hindi News के अपडेट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करे!
(News in Hindi खास खबर पर)
Tags: pm modi, somnath, modi, india, prime minister narendra modi, narendra modi, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, delhi news, delhi news in hindi, real time delhi city news, real time news, delhi news khas khabar, delhi news in hindi
Khaskhabar.com Facebook Page:

प्रमुख खबरे

आपका राज्य

Traffic

जीवन मंत्र

Daily Horoscope

वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री एवं सभी तरह के विवादों का न्याय क्षेत्र जयपुर ही रहेगा।
Copyright © 2026 Khaskhabar.com Group, All Rights Reserved