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सत्य निकेतन हादसा : दिल्ली के उप-राज्यपाल ने असुरक्षित इमारतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर जोर दिया

Satya Niketan Incident: Delhi LG Emphasizes Strict Action Against Unsafe Buildings - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में रविवार को एक पीजी बिल्डिंग गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद, सोमवार को दिल्ली के उप-राज्यपाल टी.एस. संधू ने एक हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता की। उन्होंने असुरक्षित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई के तरीकों और छात्रों के लिए रहने की जगह बढ़ाने पर समीक्षा की। उप-राज्यपाल ने शहरी विकास अधिकारियों को पीजी के लिए संस्थागत दिशानिर्देशों की समीक्षा करने वाली एक कमेटी का नेतृत्व करने का निर्देश भी दिया। उपराज्यपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, "मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री आशीष सूद, मुख्य सचिव, डीजी एनडीआरएफ और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली भर में बिल्डिंग की सुरक्षा, छात्रों के रहने की व्यवस्था और पीजी नियमों पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।"
पोस्ट में आगे लिखा गया, "असुरक्षित इमारतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, स्पष्ट संस्थागत जवाबदेही और शिकायतों के तेजी से समाधान और संकट के समय तालमेल के लिए डीडीएमए के तहत एक इमरजेंसी सिस्टम बनाने पर जोर दिया। जीएनसीटीडी के शहरी विकास मंत्री को निर्देश दिया कि वे संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक कमेटी का नेतृत्व करें। यह कमेटी पीजी के लिए संस्थागत दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगी, यूनिवर्सिटी, एमसीडी और डीडीए के माध्यम से छात्रों के रहने के लिए वैकल्पिक जगहों का पता लगाएगी और छात्रों के रहने के लिए डीडीए के खाली पड़े घरों के इस्तेमाल की संभावना का आकलन करेगी।"
बैठक के बाद, मंत्री सूद ने पत्रकारों से कहा, "इस दुखद घटना के संबंध में आज उप-राज्यपाल के साथ दिल्ली प्रशासन से जुड़े सभी विभागों की एक संयुक्त बैठक हुई। बैठक में पुलिस, एनडीआरएफ, अलग-अलग जगहों पर एनडीआरएफ की तैनाती और हमारे रिस्पॉन्स टाइम को और कम करने के तरीकों पर चर्चा हुई। दिल्ली के अलग-अलग कॉलेजों (चाहे वे दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज हों या दिल्ली सरकार की यूनिवर्सिटी) में पढ़ने वाले बड़ी संख्या में छात्रों के लिए रहने की सुविधाओं में कमी को दूर करने पर भी चर्चा हुई। इसमें जरूरत पड़ने पर एफएआर में अतिरिक्त छूट देना और मौजूदा हॉस्टल को एफएआर बढ़ाकर फिर से बनाने (रीडेवलपमेंट) के लिए उपलब्ध कराना शामिल है।"
बता दें कि दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इमारत के मालिक परिवार के तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में 81 साल के हरिराम गुप्ता, उनकी 75 वर्षीय पत्नी उर्मिला गुप्ता और उनके 52 वर्षीय बेटे महेश गुप्ता शामिल हैं।
इस मामले में दिल्ली फायर सर्विस के चीफ फायर ऑफिसर अभिलाष कुमार मलिक ने आईएएनएस से बात की। उन्होंने कहा, "पीजी रेजिडेंशियल ऑक्यूपेंसी के दायरे में आता है और बिल्डिंग नियम 27 के तहत आने वाली इमारतों के लिए फायर सेफ्टी क्लीयरेंस जरूरी है। हमारे नियम 27 के तहत आने वाली रिहायशी इमारतों के मामले में, लोकल अथॉरिटी उन्हें हमारे पास भेजती है और हम उनका इंस्पेक्शन करते हैं।"
उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह की बिना मंजूरी के बनी इमारतों के लिए डीडीएमए ने 2025 में एक प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसका मकसद यह पता लगाना था कि कितनी इमारतें जोखिम वाली हैं और कितनों में रेट्रोफिटिंग की जरूरत है। इसमें शामिल एजेंसियां जैसे सिविल एजेंसियां, कंस्ट्रक्शन एजेंसियां और स्थानीय निकाय यह पक्का करती हैं कि ऐसी इमारतों में गिरने जैसी दुर्घटनाएं न हों।
--आईएएनएस

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Web Title-Satya Niketan Incident: Delhi LG Emphasizes Strict Action Against Unsafe Buildings
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