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अवैध निर्माण, आग, पानी और भगदड़... क्यों नहीं थम रहीं दिल्ली की त्रासदियां?

Illegal construction, fires, waterlogging, and stampedes... Why do tragedies in Delhi keep happening - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक बहुमंजिला इमारत गिरने की घटना में एक बार फिर साबित कर दिया है कि राष्ट्रीय राजधानी में लापरवाही की कीमत लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है। जहां कभी अवैध इमारत ढह जाती है, कभी होटलों में आग लग जाती है, कभी पानी कोचिंग सेंटरों के भीतर घुस जाता है, तो कभी भगदड़ जैसी घटनाएं हो जाती हैं। हर बार जवाबदेही बयानों और कागजों में दबकर रह जाती है। सत्य निकेतन इलाके में हुए हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वाले अधिकतर छात्र बताए गए हैं, जो दूरदराज से अपनी जिंदगी और परिवार की स्थिति को बदलने का ख्वाब लेकर दिल्ली आए थे। पता चला है कि यह 40-50 साल पुरानी इमारत थी, जिसमें एक बेसमेंट और 5 ऊपरी मंजिलें थीं और इसका इस्तेमाल पीजी के तौर पर किया जा रहा था। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार बेसमेंट में पानी भरा और इसके कारण वह जमींदोज हो गई। दिल्ली में इमारत गिरने की यह कोई अकेली घटना नहीं है। बीते दो वर्षों में रोहिणी, साकेत, वेलकम, करोल बाग, पहाड़गंज और मुस्तफाबाद के अलावा दिल्ली के कई अन्य इलाकों में इमारत गिरने की घटनाएं हुईं। इस साल मई में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक पांच मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई, जबकि जुलाई में रोहिणी सेक्टर-16 में ऐसी ही घटना में तीन मजदूर मलबे में दबकर मर गए। वहीं, पिछले साल अप्रैल में मुस्तफाबाद में चार मंजिला मकान ढहने से 11 लोगों की जान गई थी।
इमारतों के ढहने की इन घटनाओं के अलावा दिल्ली में बड़े-बड़े अग्निकांड भी हुए हैं। इसी साल मार्च में दिल्ली के पालम इलाके में एक इमारत में आग लगने के कारण 9 लोग मारे गए थे। फिर मई महीने में विवेक विहार अग्निकांड में 9 लोगों की जान गई थी। जून में दिल्ली के मालवीय नगर में 'फ्लोरिश स्टे' होटल में आग लगने से 21 लोगों की जान चली गई। इस त्रासदी में मारे गए 21 लोगों में से 9 भारतीय थे, जबकि बाकी विदेशी नागरिक थे, जिनमें बांग्लादेश, लाइबेरिया, नाइजीरिया और मोजाम्बिक के नागरिक शामिल थे।
इससे पहले भी दिल्ली ने कई बड़े अग्निकांड का दर्द झेला। मई 2022 में मुंडका इंडस्ट्रियल एरिया में आग लगने के कारण 27 लोगों की जान गई। फरवरी 2019 में करोल बाग इलाके में एक होटल में आग लगने से 17 लोग मारे गए। उसी साल दिल्ली में रानी झांसी रोड पर अनाज मंडी में भीषण आग में 43 लोगों की मौत हुई। वहीं, जनवरी 2018 में बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में बहुत बड़ी आग लगी, जिसमें 17 लोगों की जान गई।
आग तो आग दिल्ली में पानी ने भी लोगों की जान ली है। जुलाई 2024 में दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में भारी बारिश के बाद पानी भरा था। उसमें तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत हो गई थी।
दिल्ली में भगदड़ की घटना ने भी जीवन को संकट में डाला। पिछले साल फरवरी में भगदड़ की घटना नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हुई थी, जिसमें कम से कम 18 लोग मारे गए। स्टेशन पर प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों के इंतजार में प्लेटफॉर्म नंबर 14 और 15 पर भारी भीड़ जमा थी। ट्रेन के लेट होने और प्लेटफॉर्म बदलने की अफवाह ने अफरातफरी मचा दी, जो देखते ही देखते भगदड़ में बदल गई थी।
जब सवाल जवाबदेही का उठता है तो तस्वीर हर बार की तरह धुंधली नजर आती है। एक्शन के नाम पर कुछ अधिकारी नप जाते हैं और आखिर में जांच और निगरानी जैसे उपाय फाइलों में दबकर रह जाते हैं।
--आईएएनएस

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