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आईआईटी दिल्ली का ‘जियो ट्विन’ बदलेगा भारतीय शहरों का डिजिटल चेहरा

IIT Delhi Geo-Twin Set to Transform the Digital Face of Indian Cities - Delhi News in Hindi

नई दिल्ली,। भारतीय शहरों में बाढ़, जमीन के धंसने, यातायात, मौसम और प्रदूषण जैसी चुनौतियों को समझने और उन पर समय रहते फैसले लेने के लिए आईआईटी दिल्ली के स्टार्टअप अर्थसेंस लैब्स ने नया प्लेटफार्म ‘जियो ट्विन’ पेश किया है। यह फोर-डी जियो इस्पेक्टिकल डिजिटल ट्विन है। यह किसी शहर की लगातार बदलती तस्वीर को एक ही मॉडल में दिखाने और भविष्य की परिस्थितियों का अनुमान लगाने में मदद करेगा। आईआईटी दिल्ली का कहना है कि डिजिटल ट्विन किसी शहर की आभासी प्रतिकृति होती है। इसके जरिए शहर के बुनियादी ढांचे का नक्शा तैयार किया जा सकता है। यह समय के साथ होने वाले बदलावों पर नजर रख सकता है व संभावित परिस्थितियों का अनुमान लगा सकता है। भारतीय शहरों में पहले से ही डिजिटल ट्विन के लिए जरूरी बड़ी मात्रा में आंकड़े मौजूद हैं। कई नगर निकाय ड्रोन के जरिए शहरों का मानचित्रण कर रहे हैं। बारिश मापने वाले उपकरण और जलस्तर सेंसर भी लगाए गए हैं, लेकिन इन आंकड़ों की मात्रा और जलवायु में तेजी से हो रहे बदलावों के अनुरूप उनका इस्तेमाल करने वाली तकनीक अभी उतनी तेजी से विकसित नहीं हुई है। जियो ट्विन का उद्देश्य अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले इन आंकड़ों को वैज्ञानिक मॉडल और एआई के साथ जोड़ना है। अर्थसेंस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. निर्देश कुमार शर्मा ने कहा कि शहर हर दिन बदलता है। जियो ट्विन की सोच भू-स्थानिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैज्ञानिक मॉडलिंग को रोजमर्रा के शहरी प्रशासन का हिस्सा बनाना है। इसके तहत लेजर आधारित मानचित्रण आंकड़ों के प्रसंस्करण, शहरी बाढ़ का पूर्वानुमान, भूस्खलन मानचित्रण, जमीन के धंसने की निगरानी, यातायात और प्रदूषण की निगरानी जैसे मॉड्यूल एक साथ उपलब्ध कराए गए हैं।
जियो ट्विन में हवाई लेजर मानचित्रण, ड्रोन सर्वेक्षण, उपग्रह तस्वीरें, इंटरफेरोमेट्रिक सिंथेटिक एपर्चर रडार यानी उपग्रह आधारित जमीन की निगरानी को जोड़ा जाएगा। इसमें मौसम और बारिश के पूर्वानुमान, यातायात संबंधी आंकड़े तथा जमीन पर लगे इंटरनेट ऑफ थिंग्स सेंसर से मिलने वाले आंकड़ों को भी एक साथ जोड़ा जाता है। इन सभी स्रोतों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर शहर की चार-आयामी डिजिटल प्रतिकृति लगातार अपडेट होती रहती है। इससे मिलने वाले परिणाम अर्थसेंस के अपने प्लेटफार्म के जरिए देखे जा सकते हैं। इन्हें खुले अनुप्रयोग प्रोग्रामिंग इंटरफेस के जरिए शहरों की मौजूदा योजना और नियंत्रण प्रणालियों में भी जोड़ा जा सकता है।
इसकी एक अहम विशेषता इसका संप्रभु स्वरूप है। इसके तहत शहर अपने आंकड़ों का पूरा स्वामित्व बनाए रख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर इस डिजिटल ट्विन को स्थानीय स्तर पर भी संचालित किया जा सकता है। अर्थसेंस के सह-संस्थापक व आईआईटी दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. मणबेंद्र सहारिया ने बताया कि भारतीय शहरों को बेहतर फैसलों के लिए अपने बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और जोखिमों की एक जुड़ी हुई तस्वीर की जरूरत है।
उनके अनुसार, अलग-अलग मॉडल के बजाय ऐसे एकीकृत तंत्र की जरूरत है, जो शहरी चुनौतियों से जुड़े आंकड़ों और वैज्ञानिक जानकारी को एक साथ ला सके तथा आंकड़ों को भारत की सीमाओं के भीतर और संबंधित संस्थानों के नियंत्रण में रखे।
--आईएएनएस

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Web Title-IIT Delhi Geo-Twin Set to Transform the Digital Face of Indian Cities
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