• Aapki Saheli
  • Astro Sathi
  • Business Khaskhabar
  • ifairer
  • iautoindia
1 of 1

सीईसी के पास अकेले फैसला लेने का अधिकार नहीं, फिर 14 फैसले कैसे लिए गए: टीएस सिंह देव

CEC lacks the authority to make unilateral decisions; how, then, were 14 such decisions taken – T.S. Singh Deo - Raipur News in Hindi

रायपुर । पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठे सवालों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टी.एस. सिंह देव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा, "यह सुनकर अब हैरानी नहीं होती क्योंकि चुनाव आयोग ऐसा काम करता हुआ दिख रहा था जैसे उसने अपनी आंखें बंद कर ली हों या फिर पूरे सिस्टम को खत्म करने के लिए बहुत सोची-समझी चाल चल रहा हो। यह मनमानी जैसा काम है।" दरअसल, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। दोनों चुनाव आयुक्तों का कहना है कि उन्हें कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी नहीं दी गई। यह पूरा विवाद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) से जुड़ा हुआ है, जिसके तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता टी.एस. सिंह देव ने कहा, "तथ्य यह साफ करते हैं कि सरकार ने 2023 में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर जो नए नियम बनाए हैं, उनमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों का प्रावधान है। वे 'बराबर वालों में सबसे आगे' यानी फर्स्ट अमंग इक्वल्स की स्थिति में होंगे। जहां तक हो सके, वे आम सहमति से काम करेंगे। अगर आम सहमति नहीं बन पाती है तो वोट के आधार पर फैसले लिए जाएंगे। लेकिन किसी भी हालत में आम सहमति के बिना कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। जहां मतभेद होता है, वहां तीन में से दो के वोट से फैसला लिया जाएगा। इसका मतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के पास ऐसी कोई स्थिति नहीं है कि वह अकेले फैसले ले सके या उसके फैसले को ज्यादा अहमियत दी जाए। लेकिन ऐसा नहीं है। ऐसे में यह बहुत गंभीर बात है कि 10 महीनों में 14 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें दो चुनाव आयुक्त साफ तौर पर कह रहे हैं कि लिए गए फैसलों पर उनसे कोई सलाह नहीं ली गई और उन्हें जानकारी तक नहीं दी गई।"
सिंह देव ने आगे कहा कि चुनाव आयुक्तों ने एक और चिंताजनक बात कही है कि चुनाव आयोग का आईटी विभाग और आईटी सेल धीरे-धीरे सारी जानकारियों को सेंट्रलाइज कर रहा है। जो विकेंद्रीकृत प्रक्रिया आजादी के बाद से चुनाव आयोग में चली आ रही थी, वह अब ध्वस्त होने की कगार पर है। नीचे के अधिकारी अगर कोई जानकारी मांगते हैं तो ऊपर से ब्लॉक कर दिया जाता है कि जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों ने सवाल उठाया है कि बंगाल से जुड़े मामले में चुनाव आयोग किसकी सहमति से ट्रिब्यूनल के सामने अपील करने गया। यह मामला कभी चुनाव आयोग की तीनों सदस्यों वाली टीम के सामने आया ही नहीं तो अपील में जाने का फैसला किसने लिया।
उन्होंने कहा कि इन 14 मामलों में इसी तरह की गंभीर बातें सामने आ रही हैं। चुनाव आयुक्तों का कहना है कि चुनाव आयोग के नाम पर आदेश जारी किए गए और जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी ही नहीं थी। तो ये आदेश कैसे और किसके कहने पर जारी किए गए।
सिंह देव ने कहा कि ये बेहद गंभीर मामले हैं जो साफ तौर पर दिखाते हैं कि चुनाव आयोग में जो कुछ हो रहा था, वह सही नहीं था। इन दो चुनाव आयुक्तों ने दो-तीन बार प्रधान सचिव और कैबिनेट सचिव के पास जाकर अपनी चिंताएं रखीं कि चीजें ठीक से नहीं चल रही हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों के अनुसार फॉर्म 6बी में किए गए बदलाव गैर-कानूनी थे। फॉर्म 6बी को सभी से भरने के लिए मजबूर किया गया और उसमें जो जानकारी देना वैकल्पिक थी, उसे वैकल्पिक नहीं दर्शाया गया। उसे अनिवार्य मानकर सारी जानकारी ली गई और फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी की गई। पूरी वोटर लिस्ट को ध्वस्त करने के बाद जो नई वोटर लिस्ट पूरे देश में बनी है, फॉर्म फॉर्म 6बी भरवाकर जो मतदाता सूची तैयार की गई है, उसी को चुनाव आयुक्त गैर-कानूनी और अवैध बता रहे हैं। इससे बड़ी बात क्या हो सकती है कि पूरी प्रक्रिया पर, संपूर्ण एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहा है।
दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर विमेन (एलएसआर) ने छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बुधवार की क्लास को ऑफलाइन से ऑनलाइन मोड में कर दिया है। इस फैसले पर टी.एस. सिंह देव ने कहा कि व्यवस्था देखने वालों को तत्काल बदलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारे यहां प्रावधान तो नहीं है कि पांच साल से पहले चुनाव से पहले सरकार को बदला जाए, लेकिन अगर परिस्थितियां ऐसी हैं कि आप समाज की देखरेख ही नहीं कर सकते तो आपको पद छोड़ देना चाहिए। अगर नैतिकता बची है तो इस्तीफा दे देना चाहिए। जब आप काम ही नहीं कर पा रहे हैं तो पद पर क्यों हैं।
उन्होंने कहा कि देश की राजधानी में अगर यह स्थिति है कि बच्चियां इस डर से कॉलेज नहीं जा पा रही हैं कि उनके साथ दुर्व्यवहार या दुराचार हो जाएगा तो यह बेहद चिंताजनक है। सभी मानते हैं कि ऑनलाइन क्लास में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पाती। मजबूरी में ऑनलाइन क्लास की जा सकती है, लेकिन उन्होंने कई छात्रों से बात की है और उनका कहना है कि क्लास में जो पढ़ाई होती है, वह ऑनलाइन में कभी नहीं हो पाती। आप न केवल उनकी पढ़ाई की गुणवत्ता पर असर डाल रहे हैं, बल्कि यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि आप देश की राजधानी को नहीं संभाल सकते।
बिहार के जमुई मामले पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि तेजस्वी यादव कहते हैं कि बिहार-यूपी का हर यादव उनका भाई है, तो उन्हीं भाइयों में से कुछ भाइयों ने जमुई में लड़की छेड़कर वीडियो बनाया था ताकि सरकार को बदनाम किया जा सके, इस पर टी.एस. सिंह देव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
सिंह देव ने कहा, "यादव यदुवंशी हैं, भगवान कृष्ण के साथी हैं। आप तो भगवान कृष्ण का नाम लेकर उन्हें भी इसमें घसीट रहे हैं। अगर सभी यादव ऐसे हैं तो भगवान कृष्ण के बारे में क्या कहेंगे? भगवान कृष्ण यदुवंश से हैं। क्या आप ऐसा सोचते हैं? ये लोग देश चला रहे हैं। अगर यह समझ की कमी या अक्ल की कमी नहीं है तो क्या है?"
उन्होंने कहा कि यह कहकर कि यादव ऐसे होते हैं, आप मामले को सीधे भगवान कृष्ण तक ले जा रहे हैं। आप क्या कह रहे हैं? हमें कैसा समय देखना पड़ रहा है कि ऐसी सोच वाले लोगों को देश चलाने का मौका मिला है।
--आईएएनएस

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

यह भी पढ़े

Web Title-CEC lacks the authority to make unilateral decisions; how, then, were 14 such decisions taken – T.S. Singh Deo
खास खबर Hindi News के अपडेट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करे!
(News in Hindi खास खबर पर)
Tags: ts singh deo, cec, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, raipur news, raipur news in hindi, real time raipur city news, real time news, raipur news khas khabar, raipur news in hindi
Khaskhabar.com Facebook Page:

प्रमुख खबरे

आपका राज्य

Traffic

जीवन मंत्र

Daily Horoscope

वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री एवं सभी तरह के विवादों का न्याय क्षेत्र जयपुर ही रहेगा।
Copyright © 2026 Khaskhabar.com Group, All Rights Reserved