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हरियाणा कांग्रेस में नई समीकरण : राव नरेंद्र को अध्यक्ष और हुड्डा को नेता प्रतिपक्ष बनाकर हाईकमान ने साधा संतुलन

New equation in Haryana Congress: High command strikes balance by appointing Rao Narendra as president and Hooda as leader of the opposition - Chandigarh News in Hindi

चंडीगढ़। हरियाणा कांग्रेस में लंबे समय से चल रही खींचतान और गुटबाजी के बीच हाईकमान ने आखिर बड़ा फैसला कर ही लिया। चौधरी उदयभान को हटाकर पूर्व मंत्री राव नरेंद्र सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को एक बार फिर विधायक दल का नेता (नेता प्रतिपक्ष) चुना गया है। यह निर्णय न केवल संगठनात्मक बदलाव है बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव और निकट भविष्य के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की रणनीति को भी दर्शाता है। हरियाणा की राजनीति लंबे समय से जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। पिछले चुनाव में भाजपा ने नायब सैनी जैसे OBC चेहरे को सामने रखकर गैर-जाट वोटरों पर पकड़ मजबूत की थी। कांग्रेस ने अब राव नरेंद्र सिंह को अध्यक्ष बनाकर उसी रणनीति को काटने की कोशिश की है। 18 साल बाद गैर-दलित अध्यक्ष: 2007 से अब तक कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष की कमान दलित नेताओं के हाथ में रही थी।
अहीरवाल को साधना : 53 साल बाद अहीरवाल क्षेत्र के किसी नेता को यह जिम्मेदारी मिली है। राव इंद्रजीत सिंह के भाजपा में जाने के बाद कांग्रेस इस क्षेत्र में लगातार कमजोर हुई थी। राव नरेंद्र के जरिए कांग्रेस यहां अपनी जड़ें मजबूत करना चाहती है।
गुटबाजी से दूरी: राव नरेंद्र की खासियत यह है कि वे किसी खास गुट से जुड़े नहीं माने जाते, जिससे उनके नाम पर सहमति बनाना आसान रहा।
हुड्डा को साइडलाइन क्यों नहीं कर पाई कांग्रेस
भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा कांग्रेस में सबसे प्रभावशाली चेहरे बने हुए हैं। चुनाव हार के बावजूद उन्हें दरकिनार करना पार्टी के लिए मुश्किल था।
विधायकों का समर्थन : 37 में से 31 विधायक हुड्डा के पक्ष में खड़े थे। यह ताकत हाईकमान के लिए नजरअंदाज करना संभव नहीं था।
जाट वोट बैंक : हरियाणा में लगभग 50% वोट जाट समुदाय का है और कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक भी यही रहा है। हुड्डा इस वर्ग के निर्विवाद नेता हैं।
फूट का खतरा : अगर हुड्डा की जगह किसी और को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाता, तो कांग्रेस में खुला विद्रोह हो सकता था।
हाईकमान का संतुलन साधने का फॉर्मूला
कांग्रेस ने इस बार जातीय और गुटीय दोनों समीकरणों का ध्यान रखते हुए संतुलित फैसला किया है।
अध्यक्ष पद पर OBC नेता → भाजपा की रणनीति का जवाब।
नेता प्रतिपक्ष पर हुड्डा → जाट वोट और संगठनात्मक मजबूती का सहारा।
दोनों नेताओं को साथ लाकर संदेश → कांग्रेस गुटबाजी से ऊपर उठकर चुनावी तैयारी कर रही है।
भविष्य की राह
यह बदलाव कांग्रेस को चुनावी जमीन पर कितना फायदा पहुंचाएगा, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि—
OBC बनाम जाट राजनीति में कांग्रेस ने दोनों पक्षों को साधने की रणनीति बनाई है।
पार्टी ने जातीय प्रतिनिधित्व और आंतरिक एकजुटता के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है।
आने वाले चुनावों में कांग्रेस की सफलता काफी हद तक इस पर निर्भर करेगी कि राव नरेंद्र और भूपेंद्र हुड्डा कितनी तालमेल से काम करते हैं।
हरियाणा कांग्रेस का यह फैसला केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक चाल है। हाईकमान ने साफ संदेश दिया है कि अब संगठन में जातीय संतुलन और गुटीय मजबूती, दोनों को साथ लेकर चलना होगा।

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Web Title-New equation in Haryana Congress: High command strikes balance by appointing Rao Narendra as president and Hooda as leader of the opposition
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