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चंडीगढ़ में असम टेनेंसी एक्ट के प्रस्ताव पर वकीलों का हल्ला बोल, बोले— यह न्याय के विरुद्ध और अव्यावहारिक है

Chandigarh. Lawyers in Chandigarh decry the Assam Tenancy Act proposal, saying it unjust and impractical. - Chandigarh UT News in Hindi

चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल में असम टेनेंसी एक्ट, 2021 को लागू करने की सुगबुगाहट ने कानूनी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है। शहर के प्रबुद्ध अधिवक्ताओं ने इस प्रस्ताव को आम आदमी के न्याय के खिलाफ और लोकतांत्रिक न्यायिक ढांचे के लिए खतरा बताया है। वकीलों का तर्क है कि एक राज्य का कानून दूसरे क्षेत्र की अलग सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर थोपना न्यायसंगत नहीं है। "किरायेदारों के अधिकारों का हनन और बिज़नेस मॉडल जैसा एक्ट" : एडवोकेट कशिश जैन वरिष्ठ अधिवक्ता कशिश जैन ने इस एक्ट की खामियों को उजागर करते हुए कहा कि यह कानून पूरी तरह मकान मालिक-केंद्रित है। एक्ट में किरायेदारों पर ऐसे भारी जुर्माने के प्रावधान हैं जिन्हें तर्कसंगत नहीं माना जा सकता। न्यायिक शक्ति सिविल कोर्ट से हटाकर एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को देना खतरनाक है। मजिस्ट्रेट के पास अक्सर कानून की वह गहरी समझ नहीं होती जो सिविल विवादों के लिए अनिवार्य है। अदालतों से इन मामलों को बाहर करने से युवा वकीलों और सिविल प्रैक्टिस पर बेहद बुरा असर पड़ेगा।
"जन-भागीदारी और बार का प्रतिनिधित्व अनिवार्य" : एडवोकेट शालिनी बागड़ी
एडवोकेट शालिनी बागड़ी ने कानून बनाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार की मांग की है। उन्होंने कहा-नगर प्रशासक की अध्यक्षता वाली काउंसिल में बार एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होना चाहिए। शहर और जनहित से जुड़े कानूनों में बदलाव से पहले अधिवक्ताओं की एक कमेटी बनाई जाए, ताकि उनके सुझावों के आधार पर ही संशोधन हो। इससे वादकारियों (Litigants) के हितों की रक्षा हो सकेगी।
"भौगोलिक और सामाजिक अंतर की अनदेखी" : एडवोकेट सुष्मीत कौर
अधिवक्ता सुष्मीत कौर ने प्रस्ताव पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे कानूनी रूप से अनुपयुक्त बताया। चंडीगढ़ और असम की जनसंख्या संरचना, शहरी जरूरतें और न्यायिक ढांचा पूरी तरह भिन्न हैं। असम के कानून को यहाँ बिना सोचे-समझे लागू करना एक बड़ी भूल होगी। किरायेदारी के विवाद महत्वपूर्ण सिविल अधिकार हैं। इनका निपटारा केवल प्रशिक्षित न्यायिक अधिकारियों द्वारा ही किया जाना चाहिए, न कि कार्यपालिका (Executive) के भरोसे छोड़ा जाना चाहिए।
चंडीगढ़ के वकीलों का स्पष्ट मत है कि किराया कानूनों में सुधार की आवश्यकता तो है, लेकिन इसका समाधान किसी बाहरी राज्य के कानून को कॉपी करना नहीं है। न्याय की निष्पक्षता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए न्यायिक प्रणाली को दरकिनार करना जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ होगा।

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Web Title-Chandigarh. Lawyers in Chandigarh decry the Assam Tenancy Act proposal, saying it unjust and impractical.
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