वजन घटाकर घुटने बदलवाने से बचा जा सकता है: डॉ. सेन

www.khaskhabar.com | Published : शनिवार, 04 मार्च 2017, 6:40 PM (IST)

मंडी। देश में हर साल 50 हजार लोग अपने घुटनों का आपरेशन करवाकर उन्हें बदलवा रहे हैं और इस संख्या में हर साल 30 साल की बढ़ौतरी होती जा रही है। ज्यादा वजन घुटनों के दर्द को बढ़ाता है और घुटनों को बदलने की नौबत आने का यह भी एक बड़ा कारण है। वजन को कम करके व व्यायाम से घुटने के दर्द में कमी की जा सकती है। यह बात फोर्टिस अस्पताल मोहाली के हड्डी रोग एवं जोड़ प्रतिस्थापन विभाग के निदेशक डॉ. रमेश के सेन ने शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए यह बात कही। इस मौके पर उन्होंने बताया कि नी रिपलेसमेंट करवा चुके दुनियाभर के मरीज़ों का 20 साल से भी ज्यादा का फॉलोअप डेटा बताता है कि ज्यादातर मरीज़ सर्जरी के बाद बेहतर जीवन व्यतीत करते हैं और इसमें भारत भी अब पीछे नहीं है। डॉ, सेन बताते हैं कि उनके 90 फीसदी मरीज़ों का दर्द, उनके काम करने की क्षमता और उनके समस्त जीवनस्तर में तेज़ी से और बहुत अच्छा सुधार देखा गया है जबकि 85 फीसदी मरीज़ सर्जरी के नतीजों से संतुष्ट हैं।

तीस सालों से भी ज्यादा का अनुभव रखने वाले इन ऑर्थोपेडिक सर्जन का कहना है कि ये शायद भारत में पहली बार है कि ऐसा फॉलो.अप डेटा रिकॉर्ड किया गया है। डॉ सेन ने कुल 288 जॉईंट रिपलेस्मेंट सर्जरीज़ को अंजाम दिया है जिसमें से 153 के एक छोटे समूह में से 22 की सिंगल रिपलेसमेंट सर्जरी हुई और 133 के दोनों घुटने प्रतिस्थापित किए गए।


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अपने मरीज़ों के डेटा का आंकलन पेश करते हुए डॉ. सेन ने कहा कि हमने मरीज़ों द्वारा उनके प्रतिस्थापित घुटने के इस्तेमाल करने की क्षमता को अमेरिका के नी सोसाईटी स्कोर के आधार पर आंका। हमारे तीन मरीज़ों को छोड़ बाकी सभी ने 80 फीसदी से ज्यादा घुटनों के कार्य करने की क्षमता का प्रदर्शन किया, जो सामान्य के बराबर है। इनमें से एक.तिहाई ने सामान्य क्षमता दिखाई. 95 फीसदी से ज्यादा। ये प्रोत्साहक आंकड़े हैं और बताते हैं कि हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए यहां भी घुटने के रोगी पंजाब की तरह ही है मगर फर्क यह है कि पंजाब के रोगी तत्काल इससे छुटकारा पाने के लिए आपरेशन का सहारा लेते हैं जबकि हिमाचल के रोगी इस बारे में निर्णय करने में ही कई साल गुजार देते हैं जिससे उनकी तकलीफ व रोग में बढ़ौतरी हो जाती है। उन्होंने बताया कि घुटने बदलवाने के बाद तीन लोग तो शिकारी देवी की यात्रा कर चुके हैं जो अपने आप में बताता है कि इस सर्जरी का कितना लाभ हो सकता है। इस मौके पर कुछ रोगियों जिन्होंने अपने घुटनों को आपरेशन करवाया है, ने भी अपने अनुभव साझा किए।

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