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एशियन गेम्स : किरण बिश्नोई को इन दोनों से मिलती है काफी प्रेरणा

नई दिल्ली। भारत की उभरती हुई महिला पहलवान किरण बिश्नोई अपने पहले एशियाई खेलों में बिना किसी दबाव के उतरना चाहती हैं। किरण इसी महीने की 18 तारीख से जकार्ता में शुरू हो रहे 18वें एशियाई खेलों में जाने से पहले अपने अपना आंकलन कर चुकी हैं और उन्हें पता है कि उनकी ताकत क्या है। किरण जकार्ता में 71 किलोग्राम भारवर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। वे कहती हैं कि कुश्ती ऐसा खेल है, जिसमें दबाव लेने से दांव कमजोर पड़ सकता है, इसलिए वे मैट पर बेफिक्र रहती हैं।

किरण ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, बेशक पहले एशियाई खेल हैं, लेकिन किसी तरह का दबाव नहीं है। दबाव उन पर भी नहीं है, जिन्होंने ओलम्पिक पदक जीता है। कुश्ती में अगर आप बिना दबाव के खेलोगे तो हमेशा अच्छा ही रहेगा और पदक आने की संभावना भी ज्यादा रहती है। दबाव लेकर अगर खेलते हैं आप कमजोर पड़ सकते हैं, आपके दांव कमजोर पड़ सकते हैं. इसलिए बिना दबाव के बेफिक्र होकर खेलने की कोशिश करती हूं।

किरण ने इसी साल ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में खेले गए राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीता था और इन एशियाई खेलों में उनकी कोशिश अपने पदक का रंग को बदलने की है। किरण अपनी तैयारियों में किसी तरह की कमी नहीं छोडऩा चाहती हैं। वे अपने खेल को देखती भी हैं और प्रशिक्षकों की राय के अलावा खुद विश्लेषण भी करती हैं। वे अपने खेल को बखूबी जानती हैं और कहती हैं कि उनका मजबूत पक्ष अटैक है। बकौल किरण, अटैकिंग मेरा मजबूत पक्ष है।

अगर मैं अटैक करके खेलती हूं तो सामने वाली पर हावी रहती हूं। मैं अपने मैचों को देखती हूं। उन्हीं को देखकर पता चला कि मेरा मजबूत पक्ष क्या है। मैं जब अटैक करके खेलती हूं तो प्रदर्शन अच्छा होता है और अगर डिफेंसिव हो जाती हूं तो बाउट हारने की आशंका ज्यादा हो जाती है। यह मुझे भी अपना खेल देखकर समझ में आया और मेरे प्रशिक्षकों ने भी मुझे इस बारे में बताया। उन्होंने कहा, मैं हालांकि शुरू से अटैक नहीं करती। 30 सेकेंड या एक मिनट तक सामने वाले को परखती हूं और मौका मिलते ही अटैक करने की कोशिश करती हूं।

हालांकि हर मैच में हर खिलाड़ी के लिए अलग-अलग रणनीति होती है। किरण को पूरी उम्मीद है कि वे एशियाई खेलों में अपना खाता खोलेंगी और राष्ट्रमंडल खेलों में मिले पदक का रंग इन खेलों में बदलेंगी। किरण ने कहा, उम्मीद तो पूरी है कि इस एशियाई खेलों में पदक का रंग बदलूं। मेरी पूरी कोशिश रहेगी की पदक लेकर ही लौटूं। किरण ने अपने नाना के साथ हिसार जिले में स्थित अपने ननिहाल में कुश्ती की शुरुआत की थी। लेकिन नाना के देहांत के बाद वे हिसार में ही स्थित अपने माता-पिता के गांव रेवात खेड़ा आ गईं और अपना खेल जारी रखा।

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Web Title-Asian Games 2018 : Wrestler Kiran Bishnoi takes inspiration from Sakshi Malik and Vinesh Phogat
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