29 अप्रैल से कुंभ राशि पर शुरू होगी शनि की साढ़े साती, 30 माह तक कुंभ राशि में गोचर करेंगे शनिदेव

www.khaskhabar.com | Published : गुरुवार, 27 जनवरी 2022, 1:57 PM (IST)

ज्योतिष शास्त्र का मानना है कि जब कोई ग्रह अस्त या राशि परिवर्तन करता है तो उसका असर मानव जीवन पर पड़ता है। किसी ग्रह का अस्त होना तब माना जाता है जब वह सूर्य के नजदीक पहुँच जाता है। शास्त्रों का कहना है कि सूर्य के नजदीक पहुँचने के कारण उस ग्रह का प्रभाव स्वत: ही समाप्त हो जाता है। ऐसा ही कुछ हाल ही में शनि देव के साथ हुआ है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बीती 22 जनवरी को शनि देव सूर्य के नजदीक पहुँचने के कारण अस्त हो गए हैं और अब शनि देव 24 फरवरी को उदय होंगे। अर्थात् शनि देव 33 दिनों के लिए अस्त रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों का वर्णन किया गया है। जिसमें शनि ग्रह को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। शनि को कर्मफल दाता और न्यायदेवता कहा जाता है। शनि आयु, रोग, पीड़ा, लोहा, खनिज, सेवक और जल के कारक माने जाते हैं। शनि कुंभ और मकर राशि के स्वामी हैं। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, शनि तुला राशि में उच्च और मेष राशि में नीच के माने जाते हैं। शनि अपनी स्वराशि कुंभ में गोचर करने जा रहे हैं। कुंभ राशि वालों के लिए यह समय कठिन रहने वाला है। शनि को सबसे धीमी गति का ग्रह माना जाता है, इसलिए किसी भी राशि पर इनका प्रभाव ज्यादा दिनों तक रहता है।
29 अप्रैल से कुंभ राशि पर शुरू होगी शनि की साढ़े साती
29 अप्रैल को शनि राशि परिवर्तन के साथ ही कुंभ राशि पर शनि की साढ़े साती का दूसरा चरण शुरू होगा। इस चरण को शिखर चरण भी कहते हैं। कहते हैं कि इस चरण में शनि की साढ़े साती अपने चरम पर होती है। इसे कष्टदायी माना जाता है। कुंभ राशि वालों के अलावा कर्क व वृश्चिक राशि के जातकों को सावधान रहना होगा। इन दोनों राशियों से जुड़े लोगों पर शनि ढैय्या 12 जुलाई से प्रारंभ होगी।
शनि की महादशा 19 साल की
शनि की महादशा 19 साल की होती है। शनि की महादशा से पीडि़त लोगों को जन्म कुंडली में शनि ग्रह की स्थिति देखनी चाहिए। कुंडली में देखना चाहिए कि शनि किस भाव और किस राशि पर विराजमान हैं।
आलेख में दी गई जानकारियों को लेकर हम यह दावा नहीं करते कि यह पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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