शैक्षणिक संस्थानों में ’स्पोक एण्ड हब’ बिजनेस मॉडल पर होगा आईपी सेल का गठन

www.khaskhabar.com | Published : सोमवार, 13 जनवरी 2020, 6:05 PM (IST)

जयपुर। मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार एवं पूर्व वित्त सचिव, भारत सरकार अरविन्द मायाराम ने कहा कि बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति को राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बढ़ावा देने हेतु कार्य किया जाए ताकि प्रदेश के इनोवेटर्स प्रोत्साहित हो सके। उन्होंने राज्य की बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति 2019 की प्रशंसा करते हुए कहा कि देश में राजस्थान पहला राज्य है जिसने इस ओर पहल कर आन्त्रप्रेन्योर के आइडियाज को संरक्षित करने की शुरूआत की है।


अरविन्द मायाराम सोमवार को बिड़ला इन्स्टीयूट ऑफ साइंस रिसर्च में ’’रोल ऑफ राजस्थान स्टेट आईपी पॉलिसी’’ पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।


उन्होंने कहा कि वर्तमान विश्व पारदर्शिता की ओर बढ़ रहा है और इस परिवर्तन को उन्नत तकनीक एवं शोध ने प्रेरित किया है। ऐसे समय में युवाओं के विचार एक पूंजी के रूप मेंं धरोहर साबित हो रहे हैं। इसका सही उपयोग हो यह सुनिश्चित करने के लिए बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति प्रमुख माध्यम है।

मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार ने कहा कि जीवन को बेहतर बनाने के लिए रोज नई तकनीक इजाद हो रही है और अनुशासित एवं व्यवस्थित विकास के लिए बौद्धिक विचारों का सरंक्षण अतिआवश्यक है। राज्य में इस नीति से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने जोर दिया कि नीति से प्रभावित होने वाले सभी पक्षाें से संवाद करते हुए इसके फायदे बताएं।

वाइपो के पूर्व निदेशक एवं सेवानिवृत आईएएस गुरु इकबाल सिंह ने कहा कि राजस्थान की आईपी पॉलिसी तकनीकी रूप से मजबूत है। यह प्रदेश के लिए अच्छी बात है कि राजस्थान ने पहल कर इस ओर कदम बढ़ाएं है। उन्होेंने कहा कि इस पॉलिसी को विश्वविद्यालयों एवं संबंधित संस्थानों में चरणबद्ध रूप से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि बेहतर परिणाम के लिए ’’स्पोक एण्ड हब’’ बिजनेस मॉडल पर आईपी सेल का गठन किया जाए ताकि सहज रूप से संस्थानों एवं महाविद्यालयों को विशेषज्ञ उपलब्ध हो सके।

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सिंह ने कहा कि इनोवेटर अपना इनोवेशन पेटेन्ट करवाएं ताकि उसके इनोवेशन का फायदा समाज को मिल सके। इसके लिए उन्होंने कहा कि यूटिलिटी मॉडल पेटेन्ट में अपनाया जाए। इस मॉडल से नवाचारों को बढ़ावा मिलेगा तथा छोटे अविष्कार अधिक मात्रा में पेटेन्ट हो पाएंगे। उन्होंने स्टार्टअप से जुड़े आन्त्रप्रेन्योर को कहा कि वे अपने आइडियाज कंपनी को अवश्य दें लेकिन उनको बौद्धिक सम्पदा के तहत स्वयं के पास रखे ताकि भविष्य में अपग्रेड करते समय उसका उपयोग किया जा सके।


उन्होंने कहा कि जीआई (भौगोलिक संकेतक) में सरकार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का हुनर बिचौलियाें के हाथ में जाने की संभावना रहती है। ऐसे में सरकार की भूमिका के द्वारा इसे रोका जा सकता है तथा महत्वपूर्ण फेसिलेटेट के रूप में जीआई को सरकार बढ़ावा दे सकती है। आज इसकी अपार संभावना है।

इस अवसर पर शासन सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, मुग्धा सिन्हा ने कहा कि वर्तमान समय के चुनौती के दौर में बौद्धिक सम्पदा का संरक्षण आवश्यक हो गया है। राज्य में इस ओर कदम बढ़ाते हुए बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति को जारी किया है और इनोवेटर्स को अधिक से अधिक फायदा मिले इसके लिए सभी संस्थानों के साथ विशेषज्ञों के समूह बनाए जाएंगे तथा उनकी जरूरतों का आंकलन कर उन्हें हर संभव मदद की जाएगी।


सिन्हा ने कहा कि राजस्थान ने आईपीआर पॉलिसी के माध्यम से राज्य के इनोवेटर्स को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रही है और इस नीति के तहत प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में चरणबद्ध रूप से आईपी सेल की स्थापना की जा रही है तथा विभिन्न कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को इस बारे में जागरूक भी किया जा रहा है।