दरबार साहिब के हुक्मनामे और कीर्तन पर मलकीयत का दावा गुरबाणी का निरादर: तृप्त बाजवा

www.khaskhabar.com | Published : सोमवार, 13 जनवरी 2020, 5:51 PM (IST)

चंडीगढ़। पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त राजिन्दर सिंह बाजवा ने सोमवार को जोर देकर कहा है कि दरबार साहिब के हुक्मनामे और गुरबाणी कीर्तन पर अपनी मलकीयत का दावा करना गुरबाणी का घोर निरादर है और यह निरादर करने वाले दोषियों के विरुद्ध सिख पम्पराओं और मर्यादा के अनुसार तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए।


अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार को यह कार्रवाई करने की अपील करते हुए बाजवा ने कहा कि, ‘‘सिख गुरु साहिबान द्वारा उच्चारण की गई पवित्र बाणी पूरे संसार में बसते वाले प्राणी मात्र के भले के लिए है और पूरा सिख समाज गुरबाणी का रखवाला है, परन्तु मालिक नहीं। इसलिए दरबार साहिब का पवित्र हुक्मनामा किसी एक व्यक्ति या संस्था की जागीर नहीं हो सकता।’’ उन्होंने कहा कि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल की मलकीयत वाले टीवी चैनल द्वारा दरबार साहिब में हर रोज़ प्रात:काल गुरुग्रंथ साहिब से लिए जाने वाले पवित्र हुक्मनामे पर केवल अपना हक होने का किया गया दावा गुरबाणी के सर्व साझे संदेश से बिल्कुल विपरीत है पर यह दावा गुरबाणी का घोर निरादर है।


बाजवा ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा हुक्मनामा और गुरबाणी कीर्तन के प्रसारण के हक किसी टीवी चैनल को बेचने के अधिकार को चुनौती देते हुए कहा कि स्वयं शिरोमणि कमेटी भी गुरबाणी की मालिक नहीं है और गुरबाणी को घर-घर पहुंचाना ही इसकी जि़म्मेदारी है। इसलिए वह आगे किसी अन्य संस्थान को गुरबाणी कीर्तन के प्रसारण के हक कैसे बेच सकती है और वह भी केवल लाभ कमाने वाले एक निजी व्यापारिक संस्थान को। उन्होंने दोष लगाया कि ऐसा करके शिरोमणि कमेटी ने गुरबानी कीर्तन और दरबार साहिब दोनों को ही व्यापार की वस्तु बना दिया है।


पंचायत मंत्री ने दोष लगाया कि बादल परिवार ने अपने अन्य कारोबारों की तरह दरबार साहिब से गुरबानी कीर्तन के सीधे प्रसारण को भी अपना एक नया कारोबार बनाने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर दबाव डाल कर अपनी मलकीयत वाले टीवी चैनल को प्रसारण के हक दिलाए।


बाजवा ने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से अपील की है कि वह शिरोमणि कमेटी को हिदायत करें कि वह गुरबाणी कीर्तन के सीधे प्रसारण के लिए टीवी चैनलों और डिजिटल मीडिया के संस्थानों को सुविधा प्रदान करने का बंदोबस्त करे। उन्होंने कहा कि इससे गुरबाणी के सर्व साझे संदेश को घर-घर पहुंचाने में भी मदद मिलेगी और किसी एक चैनल या संस्थान को प्रसारण के हक देने का मामला भी सुलझ जायेगा।


उन्होंने कहा कि पूरे सिख पंथ की सत्तर के दशक से यह तीव्र इच्छा रही है कि दरबार साहिब से गुरबाणी कीर्तन का सीधा प्रसारण किया जाए और कीर्तन के सीधे प्रसारण को व्यापार बनाना सिख पंथ की भावनाओं के बिल्कुल विपरीत है। केबल टीवी शुरू होने पर शिरोमणि कमेटी ने यह कहा था कि वह ऐसा प्रबंध करेगी जिससे निश्चित की गई मर्यादा को मानने वाले सभी टीवी और रेडियो चैनलों को गुरबाणी कीर्तन के प्रसारण के लिए मुफ़्त सिगनल मुहैया करवाया जाएगा, परन्तु बादल परिवार के दबाव अधीन यह प्रस्ताव छोड़कर उनके टीवी चैनल को सभी हक दे दिए गए।


बाजवा ने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार से अपील की कि वह शिरोमणि कमेटी द्वारा बादल परिवार की मलकीयत वाले टीवी चैनल के साथ किए गए समझौते को सार्वजनिक करें जिससे पूरे सिख पंथ को इसकी वास्तविकता का पता लग सके। उन्होंने कहा कि जत्थेदार साहिब शिरोमणि कमेटी को यह हिदायत करें कि वह मर्यादा में रह कर गुरबाणी कीर्तन प्रसारित करने के इच्छुक मीडिया संस्थाओं को सिगनल मुहैया कराए।

उन्होंने जत्थेदार साहिब को याद करवाते हुए कहा कि गुरु के नाम पर जीने वाले पंजाब की विधानसभा द्वारा भी 6 नवंबर को इस सम्बन्धित सर्वसहमति से प्रस्ताव पास करके भी उनको विनती की गई थी। इस सम्बन्धी उन्होंने स्वयं एक चिट्‌ठी लिखकर भी जत्थेदार साहिब को विनती की थी।

बाजवा ने कहा कि उनकी तरफ से इस मामले सम्बन्धी आवाज़ उठाने का एकमात्र मकसद गुरबाणी और दरबार साहिब का एक परिवार द्वारा व्यापारिक प्रयोग को ख़त्म कराना है।

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