Nirbhaya Gangrape Case : दोषी अक्षय को सताया मौत का डर! फांसी से बचने के लिए दी ये अजीब दलीलें

www.khaskhabar.com | Published : मंगलवार, 10 दिसम्बर 2019, 7:58 PM (IST)

नई दिल्ली। देश की राजधानी में सात साल पहले हुए निर्भया गैंगरेप केस ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया था। भारत के हर कोने में वहशियाना तरीके से अंजाम दी गई इस खौफनाक वारदात का जमकर विरोध किया गया था। दिसंबर 2012 में 23 साल की युवती के साथ चलती बस में गैंगरेप किया गया था। बाद में इलाज के दौरान पीडि़ता की मौत हो गई थी। अब फैसले की घड़ी नजदीक आ रही है और पीडि़ता के परिजनों को उम्मीद बंध रही है कि दरिंदों को फांसी पर लटकाया जाएगा।

हालांकि इस केस में दोषी करार दिए गए एक अभियुक्त अक्षय कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। फांसी से बचने के लिए अक्षय ने कई तरह की अजीबोगरीब दलीलें दी हैं। आप इन्हें जानकर हैरान रह जाएंगे। उसने कहा कि दिल्ली के लोग हवा-पानी के प्रदूषण से मर रहे हैं तो फिर फांसी क्यों दी जा रही है? दिल्ली में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है और यह गैस चैंबर में तब्दील हो चुकी है। ऐसे में उसे मृत्यु दंड अलग से देने की क्या जरूरत है?

दिल्ली का पानी भी जहरीला हो चुका है, ऐसे में जब जहरभरी हवा और पानी के चलते लोगों की उम्र काफी कम होती जा रही है फिर फांसी क्यों दी जा रही है। वेद पुराण और उपनिषद में लोगों के हजारों साल तक जीने का उल्लेख मिलता है। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक सतयुग में लोग हजारों साल तक जीते थे। त्रेता युग में एक आदमी हजार साल तक जीता था, लेकिन अब कलयुग में आदमी की उम्र 50 से 60 साल तक सीमित रह गई है तो फिर ऐसे में फांसी की सजा देने की जरूरत नहीं है, क्योंकि तब तक तो वह खुद मर जाता है।

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि कुछ भी करने से पहले अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के बारे में सोचें। यह उसके हित में है, इससे क्या हासिल होगा? ऐसा करने से वह व्यक्ति जिंदगी पर ज्यादा नियंत्रण कर पाएगा। ऐसा करने से आपके मन की शंकाएं खत्म हो जाएंगी। इसी तरह अक्षय ने दलील दी कि सजा ए-मौत का मतलब साजिश के तहत मार देना है, सजा केवल अपराधी को मारती है, अपराध को नहीं, मौत की सजा अहिंसा के सिद्धांत के खिलाफ है, शोध बताते हैं कि सख्त सजा से कोई असर नहीं पड़ता और कई देशों ने फांसी की सजा खत्म की, भारत में भी ऐसा ही हो।