UNSC meeting on Kashmir: भारत का पक्ष रखते हुए अकबरुद्दीन बोले, कश्मीर फैसले से बाहरी लोगों का कोई मतलब नहीं है

www.khaskhabar.com | Published : शुक्रवार, 16 अगस्त 2019, 8:13 PM (IST)

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन की मांग पर जम्मू कश्मीर के विषय (Kashmir issues) को लेकर बैठक खत्म हो गई है। UNSC में कश्मीर को लेकर रूस भारत के पक्ष में आ गया है। वहीं रूस ने कश्मीर को लेकर सिर्फ द्विपक्षीय बातचीत का समर्थन किया है। आपको बताते जाए कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाने के बाद से पाकिस्तान (Pakistan) बौखला गया है। चीन खुलकर पाकिस्तान के साथ आ गया है।


अपडेट....
- अकबरुद्दीन ने कहा कि जेहाद की बात कहकर पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैलाने का प्रयास कर रहा है। जब तक आतंकवाद खत्म नहीं होगा तब तक बातचीत नहीं होगी।
-भारत का पक्ष रखते हुए अकबरुद्दीन ने कहा है कि कश्मीर पर फैसले से बाहरी लोगों का कोई मतलब नहीं है।

- यूएनएससी की बैठक खत्म होने के बाद चीनी राजदूत ने कहा है कि भारत ने जो संवैधानिक संशोधन किया है उससे मौजूदा स्थिति बदल गई हैं। चीन ने कहा कि कश्मीर में हालात चिंताजनक हैं।चीन ने कहा है कि कोई पक्ष एकतरफा कार्रवाई नहीं करे। ऐसी एकतरफा कार्रवाई वैध नहीं है।

- पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह मुद्दा काफी उठाया, लेकिन उसकी एक भी दलील काम नहीं आई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लगभग सभी देशों (चीन को छोड़कर) ने उसे उलटे पांव लौटा दिया। उसका इस मुद्दे पर सिर्फ चीन ही साथ दे रहा है। यह बैठक एक बंद कमरे में हाे रही है। यह भी पहली ही बार है, जब संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था को बंद कमरे में बैठक करनी पड़ी है। वहीं कश्मीर पर यूएन के इतिहास में दूसरी बार बैठक हो रही है। इससे पहली बैठक 1971 के मुद्दे पर हुई थी।


आपको बताते जाए कि पाकिस्तान यूएनएससी में लगातार जम्मू कश्मीर के मुद्दे को उठाने का प्रयास कर रहा है।

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पाकिस्तान को कश्मीर मुददे को लेकर विश्व पटल पर किसी का भी सहयोग नहीं मिल रहा है। विश्व बिरादरी के सामने उसने अनुच्छेद 370 का मुद्दा काफी उठाया लेकिन उसकी एक भी दलील नहीं चल पाई। अब सिर्फ चीन बचा है जो उसकी फरियाद सुन रहा है।

संयुक्त राष्ट्र चीन के गिड़गिड़ाने पर कश्मीर मुद्दे को लेकर शुक्रवार को बैठक प्रारंभ की है। ऐसा कभी नहीं हुआ कि संयुक्त राष्ट्र जैसी मुखिया संस्था को बंद दरवाजे के पीछे बैठक करनी पड़े।