Sonbhadra murder case: प्रियंका गांधी का धरना खत्म, काल भैरव के किए दर्शन, दिल्ली रवाना

www.khaskhabar.com | Published : शनिवार, 20 जुलाई 2019, 3:59 PM (IST)

मिर्जापुर। सोनभद्र हत्याकांड (Sonbhadra murder case ) मामले के पीडित परिजनों से मिलने के बाद कांग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra ) शनिवार को 26 घंटे के बाद धरने को समाप्त कर वाराणसी पहुंच गईं। उन्होंने काल भैरव मंदिर में दर्शन कर लिए हैं। इसके बाद वे दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगी। चुनार गेस्ट हाउस में प्रियंका गांधी सोनभद्र कांड के पीड़ितों से मिलने की जिद पर धरने पर बैठी थीं।

शनिवार को प्रिंयका ने परिजनों से मुलाकात की और शीर्ष पुलिस अधिकारियों से बात कर धरना समाप्त कर दिया।प्रियंका ने यहां लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि मैं वापस दिल्ली जा रही हूं क्योंकि पीड़ित परिवार से मिलने का मेरा उद्देश्य पूरा हो गया है। लेकिन मैं जल्दी ही वापस आऊंगी। मैं अपने भाई राहुल गांधी के निर्देशों के अनुसार यहां आई थी।

मिजार्पुर के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) अनुराग पटेल ने शनिवार को एक यू-टर्न लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता जाने के लिए स्वतंत्र हैं क्योंकि उन्हें न तो हिरासत में लिया गया है और न ही गिरफ्तार किया गया है। डीएम ने शुक्रवार रात प्रियंका को 50 हजार रुपए का निजी बॉन्ड देने को कहा था ताकि वह वहां से जा सकें।

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पीड़ित परिवार के मिलने के बाद प्रियंका ने कहा कि कांग्रेस अपनी तरफ से पीड़ितों की मदद करेगी। मृतक परिजनों को दस-दस लाख रुपए दिए जाएंगे और घायलों को भी सहायता राशि दी जाएगी। इसके बाद प्रियंका वाड्रा से वाराणसी के मंडलायुक्त व एडीजी ने गेस्ट हाउस के कमरे में कुछ देर वार्ता की, जिसके बाद प्रियंका का धरना समाप्त हो गया। सोनभद्र नरसंहार के पीड़ित परिवार के सदस्यों से चुनार गेस्ट हाउस में मिलने के बाद प्रियंका वाड्रा ने उन्हें लेकर संवाददाता सम्मेलन किया।

प्रियंका गांधी ने कहा कि उप्र में कानून व्यवस्था ध्वस्त है। योगी सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अधिकारियों को सोनभद्र का प्रकरण पहले से पता था, ऐसी घटना वहां नहीं घटनी चाहिए थी।

प्रियंका ने कहा कि सोनभद्र के वनवासियों की लड़ाई कांग्रेस लड़ेगी। भविष्य में वे नरसंहार के गांव उभ्भा भी जरूर जाएंगी।

प्रियंका ने मांग की कि मृतकों के परिवार को सरकार की तरफ से कम से कम 25-25 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाए। जिस जमीन पर वनवासी पीढ़ियों से काबिज हैं, उन्हें तत्काल कानूनी अड़चने दूर कर उनके नाम किया जाए। निदोर्षों पर लगाए मुकदमे भी वापस लिए जाएं।"

प्रियंका के संवाददाता सम्मेलन के दौरान उभ्भा गांव से आए पीड़ित रामराज, सुखवंती और रामधनी ने मीडिया को बताया कि उन्हें कई वर्षों से परेशान किया जा रहा है। कई मुकदमे कायम किए गए। गुंडा एक्ट तक लगाया गया। हम लोगों ने घटना से तीन दिन पहले ही घोरावल थाने को यह जानकारी दी थी कि जमीन कब्जा करने को लेकर ग्राम प्रधान का गुट हमला कर सकता है। बावजूद इसके ध्यान नहीं दिया गया और घटना हो गई। हम पर गोलियां चलाई गईं। जो गोली खाकर गिर गए थे उनको हिलाकर देखा गया कि जिंदा तो नहीं हैं, किसी पर शक हुआ तो उसे एक गोली और मारी गई। करीब 300 लोगों ने हमला किया था। इनमें 150 लोग विवादित जमीन पर आए थे जबकि करीब 150 नदी के पार खड़े थे। सभी लोगों को मुख्य आरोपित ग्राम प्रधान ट्रैक्टर में भरकर लाया था। उनके साथ बंदूकें, डंडा, गड़ासा आदि हथियार भी थे।