ऋषिकेश का लक्ष्मण झूला हुआ बंद, साल 1923 में हुआ था निर्माण

www.khaskhabar.com | Published : शुक्रवार, 12 जुलाई 2019, 7:37 PM (IST)

देहरादून। उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों में शुमार ऋषिकेश में गंगा नदी पर बने ऋषिकेश के प्रतिष्ठित लक्ष्मण झूला पुल को शुक्रवार के दिन सुरक्षा कारणों के मद्देनजर लोगों के लिए बंद कर दिया गया। 96 साल पुराना सस्पेंशन पुल पैदलयात्रियों और दोपहिया वाहनों द्वारा नदी को पार करने के लिए उपयोग में लाया जाता था।

खबरों की मानें तो लक्ष्मण झूला पुल का टावर झुका हुआ नजर आ रहा है और सुरक्षा को ध्यान में देखते हुए आम लोगों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी गई है। इसमें सुधार कर जल्द ही खोला जा सकता है।

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अतिरिक्त मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने बताया कि पुल के कुछ हिस्से खराब स्थिति में थे और वह पैदल यात्रियों के भार को सहने में असमर्थ था। उन्होंने कहा, "तत्काल प्रभाव से यातायात को इसलिए बंद कराया गया, क्योंकि इसके गिरने से किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है।"

लक्ष्मण झूला सेतु महज एक सेतु नहीं है बल्कि विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है। लक्ष्मण झूला का निर्माण वर्ष 1923 में किया गया था। यह पुल गंगा नदी को दो हिस्सों को जोड़ता है। यह पुल शहर में आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए बड़ा आकर्षण का केंद्र है।

देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी जो यात्री ऋषिकेश आते हैं वह लक्ष्मण झूला पर जरूर जाते हैं। गंगा नदीं के ऊपर बना यह पुल टिहरी जिले में तपोवन गांव को नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित पौड़ी गढ़वाल जिले के जोंक से जोड़ता है। पश्चिमी किनारे पर भगवान लक्ष्मण का मंदिर है जबकि इसके दूसरी ओर श्रीराम का मंदिर है।

लगातार बढ़ रहे दवाब के बाद यह सेतु एक तरफ झुका हुआ नजर आ रहा था। विशेषज्ञों ने सलाह दी थी कि इसका इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है। इसके बाद इसका सर्वे किया गया और फिर लोक निर्माण विभाग ने इसे बंद करने का निर्णय लिया।

ऐसी मान्यता है कि राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने इसी जगह से गंगा को पार किया था, जहां पुल बना हुआ है। पुल के बाई तरफ पैदल रास्ता बदरीनाथ तथा दायीं तरफ का रास्ता स्वर्गाश्रम की तरफ जाता है। कहा जाता है कि जब 1950 से पहले चारों तरफ की यात्रा पैदल की जाती थी तो इसी सेतु से होकर यात्री अपनी यात्रा करते थे।