किसान आत्महत्याएं कर रहे है लेकिन उन पर बनी फिल्म सुपरहिट नहीं हो सकती

www.khaskhabar.com | Published : शुक्रवार, 25 जनवरी 2019, 5:04 PM (IST)

जयपुर। प्रसिद्ध फिल्म पटकथा लेखक जावेद अख्तर का कहना है कि औदयोगिक क्रांति ने शहरी मध्यम वर्ग को खेती से दूर कर दिया। इन्हे पता ही नही कि खेती क्या होती है इसीलिए आज भले ही हजारों किसान आत्महत्याएं कर रहे है लेकिन उन पर बनी फिल्म सुपरहिट नहीं हो सकती ।

जयपुर लिटरचेर फेेस्टिवल में जावेद अख्तर का कहना था कि दो बीघा जमीन अपने जमाने की सुपरहिट फिल्म थी क्योंकि उस जमाने का समाज किसान की तकलीफ को समझता था। वह उन्हीें में से आया था लेकिन । इतना जरूर है कि आज कि पीढी अपनी जड़ों को खोज रही है। आज जो सुई धागा, बरेली की बर्फी जैसी फिल्में बन रही है जो हिन्दुस्तान के गांव देहात और छोटे शहरो की कहानियां है और इन्हें बड़े शहरों का मध्यम वर्ग पसंद कर रहा है ओर ऐसा इसीलिए हो रहा है कि आज का युवा अपनी जडों को खोज रहा है।लेकिन आज की पीढी यदि साहित्य से दूर हो रही है तो उसका कारण यह है कि हमारे परिवारों और शिक्षा में ही साहित्य प्राथमिकता में नहीं है। शहरों में किताबें घरों के इंटीरियर डेकोरेशन का हिस्सा हो गई है जो पदें के रंग के हिसाब से चुनी जाती है।शबाना आजमी ने अपने पिता कैफी आजमी सहित उस दौर के सभी प्रगतिशील लेखकों को याद करते हुए कहा कि प्रगतिशील लेखकों के काम में उनका मेनिफेस्टो दिखता था हालांकि यह भी एक तथ्य है कि ये सभी बहुत अच्छी रोमांटिक शायरी करते थे। महिलाओं के प्रति भी उनमें बहुत आदर था। कैफी साब ने 70 साल पहले औरत नाम से एक नज्म लिखी थी जो औरतों की आजादी को समर्पित थी और मेरी मां शौकत आजमी ने यह नज्म सुनने के बाद ही मेरे पिता से शादी करने का फैसला किया था।
उर्दू हिन्दी के बारे में शबाना ने कहा कि यह बहुत बडी गलतफहमी है कि उर्दू मुसलमानों की जुबान है और हिन्दी हिन्दुओं की जुबान है। भााषा का धर्म से कोई सम्बन्ध है ही नहीं। भाषा क्षेत्र से जुडी होती है।

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