इसरो ने रचा इतिहास, छात्रों ने बनाया दुनिया का सबसे हल्का सैटेलाइट ‘कलाम सैट’

www.khaskhabar.com | Published : शुक्रवार, 25 जनवरी 2019, 4:12 PM (IST)

श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (आईएसआरओ) ने एक बार फिर से इतिहास रचा दिया है। इसरो ने गुरुवार देर रात श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से दुनिया के सबसे हल्के उपग्रह ‘कलाम सैट’ को पृथ्वी की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। इसरो के पीएसएलवी-सी44 रॉकेट ने गुरुवार को श्रीहरिकोटा से भारतीय सेना का उपग्रह माइक्रोसैट और छात्रों का उपग्रह कलामसैट लेकर अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी थी।

इसरो ने बताया कि पीएसएलवी-सी44 ने सेना के उपग्रह माइक्रोसैट-आर को सफलतापूवर्क उसकी कक्षा में स्थापित किया। इसरो के 2019 के पहले मिशन में 28 घंटे की उल्टी गिनती के बाद रात 11 बजकर 37 मिनट पर पीएसएलवी-सी44 ने उड़ान भरी। यह पीएसएलवी की 46वीं उड़ान है।

इस उपग्रह का डिजाइन से लेकर निर्माण तक का सभी काम छात्रों ने किया है। इसरो ने उपग्रह लांच करने के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से सभी जानकारी देश के सामने रखी। इसरो ने उपग्रह के पहले से चौथे स्टेज पर पहुंचने वाली जानकारी दी। इसरो ने बताया कि पीएसएलवी सी-44 इच्छित कक्षा में प्रवेश कर चुका है।

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भारत के सभी छात्रों के लिए खुला है इसरो...
इसरो ने ट्वीट कर कहा, ‘इसरो भारत से सभी छात्रों के लिए खुला है। अपने सैटेलाइट को हमारे पास लाओ और हम इसे लांच करेंगे। आइए, हम भारत को एक विज्ञान-निष्पक्ष राष्ट्र बनाते हैं।’

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पूर्व राष्ट्रपति के नाम पर किया गया नामकरण...
कलामसैट का नामकरण पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर किया गया है और यह प्रायोगिक उपग्रह है जिसे छात्रों ने बनाया है।

कलामसैट को चेन्नई की स्पेस एजुकेशन फर्म स्पेस किड्ज इंडिया नामक स्टार्ट-अप कंपनी ने बनाया है। यह दुनियाभर में इसरो का सबसे छोटा उपग्रह है। यह एक तरह का कम्यूनिकेशन सैटेलाइट है, जिसे महज 12 लाख रुपए में तैयार किया गया है।

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