एक दो दिन नहीं बल्कि 4 साल देरी से पहुंची ये ट्रेन, जानिए क्या है मामला

www.khaskhabar.com | Published : सोमवार, 10 सितम्बर 2018, 2:27 PM (IST)

नई दिल्ली। आपने रेल में सफर के दौरान ज्यादातर भारतीय रेल की लेटलतीफी की बातें करना कोई नई बात नहीं है। भारत में ज्यादातर ट्रेनें अक्सर अपनी समय-सीमा के मुताबिक नही आती। कभी 1 या 2 घंटे की देरी से ही अपने मुकाम पर पहुचानें का काम करती आ रही है। रेलवे की कुछ ट्रेनों का बदलते मौसमानुसार 8 से 10 घंटे की देरी आम बात हो जाती है।

लेकिन एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें रेलवे ने लेटलतीफी के सारे रिकार्ड तोड़ डाले। ट्रेन कुछ घंटे या कुछ दिन नहीं बल्कि 1275 दिन लेट अपने गंतव्य पर पहुंची।

जी हां, हैरान हो गए ना, लेकिन यह सच है। जिस दूरी को तय करने में ट्रेनों को 42 घंटे 13 मिनट का वक्त लगता है, उसे रेलवे की लापरवाही की वजह से लगभग 4 साल में पूरा किया गया। साल 2014 में चली ट्रेन 2018 में अपने गंतव्य पर पहुंची है।

3.5 साल की देरी से पहुंची ट्रेन...

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3.5 साल की देरी से पहुंची ट्रेन...
इकनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, ये मामला बस्ती जिले का है। जहां साल 2014 में विशाखापट्टनम से खाद लेकर चला रेलवे का वैगन 3.5 साल बाद पहुंची।

बस्ती स्टेशन पर इस वैगन के पहुंचते ही सभी अधिकारियों में खलबली सी मच गई। क्योकि वैगन में पूरे10 लाख से ऊपर का माल था, लेकिन रेल्वे की लापरवाही के वजह से उसका मालिक भी कौन था किसी को कुछ नहीं पता।

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इस मामले को तुंरत संबंधित अधिकारियों को सूचित किया गया। लेकिन इन 4 सालों में वैगन में लदा माल लगभग 50 फीसदी बेकार हो चुका था।

इस बेकार हुए माल का हर्जाना कौन भरेगा इस बारे में अधिकारी अब तक तय नहीं कर पाए हैं।

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बताया जाता है कि 1275 दिन बाद पहुचें इस माल (खाद) को विशाखापत्तनम से एक कारोबारी ने बुक कराई थी। और अपने तय सीमा के मुताबित ट्रेन में लादी गई। खाद की खेप निकल गई थी, लेकिन रास्ते में लापता हो गई।

कारोबारी ने कई बार इस मामले में रेलवे को जानकारी दी, लेकिन रेलवे की लापरवाही से इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। और अंत में करीब 3.5 साल के बाद खाद की खेप बस्ती पहुंची।

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