...तो क्या सुंदर स्त्रियों से इसलिए नहीं करना चाहिए विवाह, जानिए क्या है वजह!

www.khaskhabar.com | Published : सोमवार, 10 सितम्बर 2018, 11:47 AM (IST)

आज के समय में ज्यादातर पुरुष विवाह के लिए सुंदर स्त्रियों को अधिक महत्व देते हैं। आज के समय के अनुसार, 90 फीसदी लोग सबसे पहले किसी स्त्री की सुंदरता देखते है और सुंदरता देखकर ही विवाह करते है। लेकिन जरुरी नही की सुंदर स्त्रियां ही सर्वगुण संपन्न हो। विवाह के लिए स्त्री के संस्कार, उसका स्वभाव, उसके लक्षण, उसके गुण-अवगुणों के बारे में जानना चाहिए, अन्यथा सिर्फ सुंदरता के आधार पर गलत चुनाव करने से वैवाहिक जीवन सुखी नहीं रहता।

हिंदू धर्म में विवाह को 16 संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है। स्त्रियों के कुछ सामान्य लक्षणों के अलावा उनकी कुछ ऐसी बातें जो उन्हें सामान्य लायक नहीं बनाती है, आचार्य चाणक्य के अनुसार ऐसी कुछ स्त्रियों से भूलकर भी शादी नहीं करनी चाहिए।

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि सुंदरता ही सब कुछ नहीं होती। यदि कोई पुरुष केवल स्त्री की सुंदरता को देख कर ही उसे परखता है और उसी के आधार पर उसे पसंद करके विवाह करता है तो उससे बड़ा मूर्ख इस संसार में कोई नहीं है।

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शादी के लिए उसके संस्कार, उसके स्वभाव, उसके लक्षण उसके गुण-अवगुणों के बारे में अच्छी तरह से जांच पड़ताल कर लेनी चाहिए।

इन सभी बातों पर विचार करने के बाद ही किसी स्त्री का विवाह के लिए चयन करना चाहिए। अन्यथा सुंदरता के आधार पर भारत चयन करने से वैवाहिक जीवन सुखी नहीं रहता।

आचार्य चाणक्य ने स्त्रियों के व्यवहार को खास महत्व दिया। उनके अनुसार अच्छे संस्कारों वाली स्त्री घर को स्वर्ग बना देती है, वह पति और उसके पूरे परिवार का ख्याल रखती है लेकिन बुरे संस्कारों वाली स्त्री सब तहस-नहस कर देती है।

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आचार्य चाणक्य जी कहते हैं कि यह जरुरी नहीं हैं कि हर खूबसूरत लडक़ी चालाक और धोखेबाज हो पर ज्यादातर खूबसूरत दिखने वाली लड़कियां हम दिल से इतनी खूबसूरत नहीं होती।

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अगर इस तरह सुंदर नहीं है लेकिन उस के संस्कार अच्छे हैं तो पुरुष को से विवाह कर लेनी चाहिए। क्योंकि ऐसी स्त्री उसके भविष्य को सुखद बनाएंगी और उसे एक श्रेष्ठ परिवार देती है। इसलिए चाणक्य नीति कहती हैं के विवाह के लिए हमेशा संस्कारी स्त्री का ही चुनाव करना समझदारी है।

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