फिल्म रिव्यू: 1998 में हुए पोखरण परिक्षण की सच्चाई दिखाती हैं फिल्म...

www.khaskhabar.com | Published : शुक्रवार, 25 मई 2018, 5:48 PM (IST)

स्टार कास्ट: जॉन अब्राहम, डायना पेंटी, बोमन ईरानी आदि।
निर्देशक: अभिषेक शर्मा
निर्माता: जॉन अब्राहम
डायरेक्टर: अभिषेक शर्मा



मुंबई। जॉन अब्राहम की फिल्म परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण काफी विवादों में रहने के बाद आज रिलीज कर दी गई है। हम आपकों बता दें कि ये फिल्म 1998 में हुए पोखरण परिक्षण पर आधारित है। जिसमें भारत ने चुपके से एक के बाद एक तीन परमाणु परिक्षण करवाए थे। ये परमाणु परिक्षण CIA की जासूसी सेटेलाइट की नाक के नीचे करवाए गए थे। सच्ची घटना पर आधारित इस फिल्म में डायरेक्टर अभिषेक शर्मा ने कुछ ड्रामा जोड़-तोड़ कर इसे कॉमर्शियल तौर पर मजेदार बनाने की पूरी कोशिश की है।

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

कहानी- परमाणु की शुरूआत होती है अश्वत रैना (जॉन अब्राहम) से जो कि अनुसंधान और विश्लेषण विभाग के एक ईमानदार सिविल सेवक हैं। जो कि भारत के प्रधानमंत्री को अपने खुद के परमाणु परीक्षण के लिए राजी करने की कोशिश करते हैं। ताकि दुनिया को भारत की ताकत का अंदाजा हो सके। दुर्भाग्य से अश्वत का अधिकारी मजाक बनाते हैं और उसका आइडिया चुरा लिया जाता है।

हालांकि ये ऑपरेशन CIA की तेज-तर्रार निगरानी की वजह से फेल हो जाता है और अश्वत पर साला इल्जाम डाल कर उसे बलि का बकरा बना दिया जाता है। जिसके चलते उसका सस्पेंशन भी हो जाता है। सिस्टम से धोखा मिलने के बाद वो मसूरी में अपने परिवार के साथ समय बिताने पहुंच जाता है। 3 साल बाद, शासन में बदलाव के बाद अश्वत को नए प्रधान मंत्री के प्रधान सचिव हिमांशु शुक्ला (बमन ईरानी) द्वारा वापस बुला लिया जाता है।

अश्वत को राजस्थान स्थित पोखरण के मरुस्थल में दूसरा परमाणु परिक्षण करने के लिए कहा जाता है। अतरंगी वैज्ञानिकों और अर्मी जवानों के साथ, अश्वत निकल पड़ता है भारत का गर्व बढ़ाने के लिए लेकिन उसके रास्त में रोड़ा बनते हैं CIA सेटेलाइट, पाकिस्तानी जासूस और दुविधा। पूरी कहानी जानें के लिए अब आपकों फिल्म देखनी पड़ेगी ही।

म्यूजिक - फिल्म का म्यूजिक सीन पर फिट नहीं बैठता है। काफी मिसप्लेस्ट सा मालूम होता है। इस फिल्म में आपको कई असली राजनेताओं और CIA के फेल होने पर संयुक्त राज्य अमरीका के बयान मिलेंगे। जो कि फिल्म के सीन पर काफी फिट बैठे हैं और इस फिल्म की एडिटिंग ठीक-ठाक है।

क्यों देखने जाएं- पूरी फिल्म की बात करें तो परमाणु कई अपने रोमांचकारी आधार की वजह से दिलचस्प फिल्म है लेकिन फिर भी कुछ खास पसंद काम नहीं कर पाती। जिसका कारण इस फिल्म का खराब एग्जीक्यूशन है। जहां एक तरफ जॉन अब्राहम और डायना पेंटी स्टारर फिल्म देशभक्त इरादे के साथ आती है वहीं दूसरी तरफ ऑडिएंस के एक्साइटमेंट को बढ़ा नहीं पाती।