कृषि ऋण माफी संबंधी सुखबीर का बयान बेतुका और आधारहीन : कैप्टन अमरिंदर सिंह

www.khaskhabar.com | Published : शनिवार, 19 मई 2018, 8:13 PM (IST)

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कृषि ऋणों संबंधी सुखबीर सिंह बादल द्वारा लगाए गए दोषों को आधारहीन और बेतुका बताकर रद्द कर दिया है। मुख्यमंत्री ने शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष की आलोचना करते हुए कहा है कि वह सभी दोष राज्य सरकार पर थोपकर अपने झूठे और व्यर्थ बयानों से किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
सुखबीर के दोषों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि शिरोमणी अकाली दल और भाजपा सरकार ने अपने 10 साल के शासन के दौरान राज्य के किसान समुदाय के लिए कुछ किया होता तो आज किसान समुदाय जितना बोझ तले दबा है उतना नहीं होता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार संकट में घिरे किसानों को इस स्थिति से निकालने के लिए हर कोशिश कर रही है और बादलों की तरफ से विरासत में छोड़ी गई अति बुरी वित्तीय स्थिति तुरंत किसानों को समूची राहत उपलब्ध करवाने में अड़चन बन रही है। इसलिए किसानों को तुरंत समूची राहत देने के लिए केंद्र के दखल की ज़रूरत है। मुख्यमंत्री ने बताया कि चाहे उनकी सरकार को पिछली सरकार से विरासत में भारी वित्तीय संकट मिला है, परंतु उनकी सरकार ने 2,02,186 किसानों का 999.98 करोड़ का सहकारी बैंकों का कर्ज पहले ही माफ कर दिया है और इस श्रेणी के बाकी बचे किसानों का कर्ज इस साल नवंबर तक माफ कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अपने लहजे में पूछा कि क्या केंद्रीय सरकार की किसानों के प्रति कोई जि़म्मेवारी नहीं है? उन्होंने आगे फिर पूछा कि वह किसानों के प्रति अपनी इस जि़म्मेवारी से कैसे पक्ष बदल सकती है, जब कृषि की समस्या एक राष्ट्रीय संकट बन गई है।

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कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि सुखबीर अपनी सहयोगी भाजपा और उसके नेतृत्व वाली केंद्र सरकार, जिसमें उनकी पत्नी खुद मंत्री हैं, को किसानों की मुश्किलों संबंधी राज्य सरकार की तरफ से शुरू किए गए प्रोग्रामों में मदद करने के लिए कहने की जगह राज्य सरकार की तरफ से किए जा रहे यत्नों को घटा के पेश करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे उनकी सरकार अपने वादे के मुताबिक किसानों का कर्ज माफ करने के लिए लगातार तौर-तरीके निकाल रही है, परंतु किसानी भाईचारे को बादलों के नेतृत्व वाली पिछली सरकार की तरफ से आपनाए गए व्यवहार को नहीं भूलना चाहिए और न ही बादलों को माफ करना चाहिए।


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