सरकार के कर्ज माफी के दावे हो रहे झूठे साबित, एक और किसान ने की आत्महत्या

www.khaskhabar.com | Published : बुधवार, 09 मई 2018, 09:38 AM (IST)

बारां। राजस्थान के बारां में कर्ज से परेशान एक और किसान ने आत्महत्या कर ली। एक माह में किसान के आत्महत्या किए जाने का यह चौथा मामला है। सोमवार को बारां जिले के खेराली गांव के महावीर नाम के किसान ने अपने ही खेत पर एक पेड़ पर फांसी का फंदा बनाया और उसी पर लटककर अपनी जान दे दी। बताया जा रहा है कि मृतक किसान 2 दिन पूर्व घर से कपडे़ लेकर मजदूरी का नाम लेकर निकला था जिसके बाद वो घर नहीं पहुंचा। यह किसान लहसुन के भाव नहीं मिलने और लाखों रुपये के कर्ज से परेशान था।

बारां जिले में एक के बाद एक किसान आत्महत्या किए जा रहा है। लेकिन संवेदनहीन सरकार का कोई नुमाइंदा खबर लेने नहीं पहुंचा है। कर्ज और लहसुन के भाव नहीं मिलने से परेशान होकर करीब एक महीने में 4 किसानों की मौत मौजूदा सरकार के संवेदनहीन होने का इशारा कर रही है। हाल ही में महावीर नाम के किसान ने सरकार के कर्ज माफी वाले दावे को झूठा साबित करते हुए अपने खेत पर फांसी लगाकर मौजूदा सरकार को उसके झूठे वादों पर आईना दिखा दिया है।

एक के बाद एक 4 किसानों की मौत के बाद भी खुद को किसानों की हितैषी बताने वाली भाजपा सरकार पर इन मौत का कोई असर नहीं पड़ा है। हालांकि इस मौत के बाद किसान के परिवार पर जरूर कहर बरसा है। इस किसान के दो छोटे बच्चे हैं जिन के सिर से उनके पिता का साया उठ गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार महावीर नाम के इस किसान के पास कुल 9 बीघा जमीन थी। जिस पर करीब 6 लाख रुपये बैंक का कर्जा था, बाकी के तकरीबन 2 लाख रुपये बाजार के देनदारों में बकाया चल रहा था। कर्ज के कारण यह किसान पिछले 6 महीनों से सकते में था। लहसुन के भाव नहीं मिलने से परेशान चल रहा था। पिछले 2 दिनों पूर्व महावीर घर से बिना बताये अपने कपड़े लेकर मजदूरी का नाम लेकर निकला था।

पुलिस के अनुसार मृतक ने अपने परिवार वालों से उनके खाते में मजदूरी के पैसे डलाने की बात भी कही थी,लेकिन उसके बाद घर नहीं पहुंचा। खेत के आसपास के लोगों ने किसान के पेड़ से शव लटके होने की सूचना पुलिस को दी। जिस पर सदर थाना पुलिस ने शव अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू की है। हालांकि पुलिस का मानना है कि शव 2 दिन पुराना है।


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बारां जिले में किसानों की आत्महत्या का यह चौथा मामला है, लेकिन चार मौत होने के बाद भी भाजपा सरकार का एक भी मंत्री किसान के घर संवेदना व्यक्त करने नहीं पहुंचा। पिछले 4 सालों से मुंह पर ताला लगाए बैठी कांग्रेस चुनाव के नजदीक आते ही किसानों की मौत पर राजनीति का खेल खेलना शुरू कर दिया। लंबे से चुपचाप तमाशा देखने वाली कांग्रेस पार्टी अब इस मामले में राजनीति करने का मौका नही छोड़ना चाहती। पीसीसी प्रदेश उपाध्यक्ष प्रमोद जैन ने इस मामले में बीजेपी को किसान विरोधी सरकार बताया है।

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