यहां घर से भागे प्रेमियों की मदद करते है भगवान!

www.khaskhabar.com | Published : गुरुवार, 22 मार्च 2018, 12:08 PM (IST)

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश को देवभूमि भी कहा जाता है, राज्य प्राकृतिक सुंदरता का खजाना है। हर साल हजारों श्रद्वालु यहां घूमने आते है। हिमाचल प्रदेश जितना अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण जाना जाता है उतना ही यहां की परंपराओं के कारण भी प्रसिद्व है। हिमाचल में एक ऐसी परंपरा भी है जहां प्यार करने वाले आराम से रह सकते है। इतना ही नहीं घर से भागे हुए प्रेमियों को यहां आश्रय मिलता है आर उनके प्रेम के गवाह साक्षात भगवान बनते है। आप सोच रहे है कि हम ऐसा क्यों कह रहे है तो बताते है कि पूरा मामला क्या है। दरअसल, कुल्लू के शांघड गांव के देवता शंगचूल महादेव का मंदिर है जहां घर से भागे प्रेमी जोडों को शरण देते हैं। पांडव कालीन शांघड गांव में कई ऐतिहासिक धरोहरें हैं, इन्ही में से एक हैं यहां का शंगचुल महादेव मंदिर भी हैं।

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अगर कोई भी जाति का प्रेमी जोडा शंगचूल महादेव की सीमा में पहुंच जाते हैं तो फिर जब तक वह इस मंदिर की सीमा रहते हैं उनका कोई कुछ नहीं बिगाड सकता।
यहां तक की प्रेमी युगल के परिजन भी उससे कुछ नहीं कह सकते। शंगचुल महादेव मंदिर का सीमा क्षेत्र करीब 100 बीघा का मैदान है। जैसे ही इस सीमा में कोई प्रेमी युगल पहुंचता है वैसे ही उसे देवता की शरण में आया हुआ मान लिया जाता है।

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अपनी विरासत के नियमों का पालन कर रहे इस गांव में पुलिस के आने पर भी प्रतिबंध है। इसके साथ ही यहां शराब, सिगरेट और चमड़े का सामान लेकर आना भी मना है। न कोई हथियार लेकर यहां प्रवेश कर सकता है और न ही किसी प्रकार का लडाई झगडा तथा ऊंची आवाज में बात नहीं कर सकता है। यहां देवता का ही फैसला मान्य होता है। यहां भागकर आए प्रेमी युगल के मामले निपट ही नहीं जाते तब तक मंदिर के पंडित प्रेमी युगलों की खातिरदारी करते हैं।

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ऐसा कहा जाता है कि इस गांव में अज्ञातवास के समय पांडव यहां कुछ समय के लिए रूके थे। कौरव उनका पीछा करते हुए यहां आ गए। तब शंगचूल महादेव ने कौरवों को रोका और कहा कि यह मेरा क्षेत्र है और जो भी मेरी शरण में आएगा उसका कोई कुछ बिगाड सकता। महादेव के डर से कौरव वापस लौट गए। तब से लेकर आज तक जब भी कोई समाज का ठुकराया हुआ शख्स या प्रेमी जोडा यहां शरण लेने के लिए पहुंचता है, महादेव उसकी देखरेख करते हैं।

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