PM के लिए प्रणब थे सबसे योग्य, लेकिन मेरे पास नहीं था कोई विकल्प: मनमोहन

www.khaskhabar.com | Published : शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2017, 10:15 PM (IST)

नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की किताब ‘द कोलिशन इयर्स’ (1996-2012) के विमोचन कार्यक्रम के मौके पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने प्रणव को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया। साथ ही मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री पद के लिए प्रणब मुखर्जी को खुद से बेहतर विकल्प करार दिया। मनमोहन ने कहा सोनिया गांधी ने मुझे पीएम बनने के लिए चुना था। प्रणव मुखर्जी इस पद के लिए हर लिहाज से मुझसे बेहतर थे, लेकिन वह (प्रणव मुखर्जी) जानते थे कि मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता था। मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। जब मैं प्रधानमंत्री बना तो उस समय प्रणव मुखर्जी अपसेट थे। इसके बावजूद हमारे रिश्तों में कभी कोई अंतर नहीं आया है। मनमोहन ने यह बात कही तो सोनिया गांधी मुस्कुराने लगीं।

उन्होंने कहा प्रणव मुखर्जी अपनी पंसद से राजनीति में आए थे और मैं इत्तेफाक से। पूर्व पीएम ने लंबे अर्से के अपने और मुखर्जी के रिश्तों को याद किया। उन्होंने कहा कि 1970 से 2014 तक विभिन्न भूमिकाओं में दोनों ने एक दूसरे के साथ काम किया। सिंह ने मुखर्जी को न सिर्फ पार्टी का, बल्कि सरकार का भी संकटमोचक करार दिया। उनका कहना था कि जब भी पार्टी या सरकार में कोई समस्या आती या हम कहीं अटकते तो प्रणव मुखर्जी का अनुभव और समझदारी पार्टी के लिए सबसे ज्यादा मददगार होती।

साथ ही उन्होंने भारतीय राजनीति और संसद में मुखर्जी के जबरदस्त मैनेजमेंट क्षमता का भी सराहना की। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की किताब ‘द कोलिशन इयर्स’ (1996-2012) के विमोचन के मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधीए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा सीपीएम नेता सीतराम येचुरी, सीपीआई के सुधाकर रेड्डी और डी राजा और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी मौजूद थे।

प्रणव ने गठबंधन सरकार में अपने अनुभवों को याद किया

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इस मौके पर प्रणव मुखर्जी ने गठबंधन सरकार में अपने अनुभवों को याद किया। उन्होंने याद कि कैसे गठबंधन सरकार में घटक दलों से तालमेल करने का जिम्मा उनका होता था। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को अपने आप में एक गठबंधन बताया, जिसमें तमाम विचार हैं। प्रणव मुखर्जी की बात को ही आगे बढ़ाते हुए सीताराम येचुरी ने बताया कि कैसे उस समय प्रणव दादा घटक दलों से बात किया करते थे और कई बार बहुत जल्दी नाराज भी हो जाते थे। येचुरी ने कहा कि प्रणव मुखर्जी की स्मरण शक्ति हाथी जैसी है, जो कुछ नहीं भूलते। मजाकिया लहजे में येचुरी ने कहा कि प्रणव मुखर्जी में एक नहीं बल्कि दो-दो हाथियों की स्मरण शक्ति है।

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