गलती से हो जाए गणेश चतुर्थी को चंद्र दर्शन करें ये उपाय, बच जाएंगे कलंक से

www.khaskhabar.com | Published : बुधवार, 23 अगस्त 2017, 10:44 AM (IST)

सृष्टि के प्रथम पूज्य देव गजानन का सबसे बडा त्योहार गणेश चतुर्थी पूरी दुनिया 25 अगस्त को मनाएगी। यूं तो यह तिथि सबसे श्रेष्ठ और पवित्र है लेकिन कहते हैं यदि इस रात्रि गलती से भी यदि चंद्र दर्शन्‍ हो जाए तो आप पर भारी पड सकती है। शास्त्रों के अनुसार यदि भूल से भी चौथ का चंद्रमा दिख जाय तो श्रीमद् भागवत् के 10वें स्कन्ध के 56-57वें अध्याय में दी गई स्यमंतक मणि की चोरी की कथा का आदरपूर्वक श्रवण करना चाहिए। कहते हैं मानव ही नहीं पूर्णावतार भगवान श्रीकृष्ण भी इस तिथि को चंद्र दर्शन करने के पश्चात मिथ्या कलंक से नहीं बच पाए थे।


क्या करें अगर हो जाए चतुर्थी पर चंद्र दर्शन
इस श्‍लोक का करें जाप-
भाद्रशुक्लचतुथ्रयायो ज्ञानतोअज्ञानतोअपिवा।
अभिशापीभवेच्चन्द्रदर्शनाद्भृशदु:खभाग्॥

इस श्‍लोक के अनुसार जो जानबूझ कर अथवा अनजाने में ही भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा का दर्शन करेगा, वह अभिशप्त होगा। उसे बहुत दुःख उठाना पडेगा। शास्त्र गणेश पुराण के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्रमा देख लेने पर कलंक अवश्य लगता हैं। ऐसा गणेश जी का वचन हैं। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन न करें यदि भूल से चंद्र दर्शन हो जाए तो उसके निवारण के निमित्त निम्नलिखित उपाय करें जिसे चंद्रमा के दर्शन से होने वाले मिथ्या कलंक का ज्यादा खतरा नहीं होगा। दोष मुक्त हो जाएंगे। यदि अज्ञानतावश या जाने-अनजाने चांद दिख जाए तो निम्न मंत्र का पाठ करें।

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और भी हैं उपाय, जरूर आजमाएं:-
भागवत की स्यमंतक मणि की कथा सुने या पाठ करें।
एक पत्थर अपने पड़ोसी की छत पर फैंक दीजिए।
शाम के समय अपने अतिप्रिय निकट संबंधी से कटु वचन बोलें तत्पश्चात अगले दिन प्रातः उससे से क्षमा मांग लें।

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आईने में अपनी शक्ल देखकर उसे बहते पानी में बहा दें।
21 अलग-अलग पेड़-पौधों के पत्ते तोड़कर अपने पास रखें।
मौली में 21 दूर्वा बांधकर मुकुट बनाएं तथा इस मुकुट को गणपति मंदिर में गणेश जी के सिर पर सजाएं।
रात के समय मुहं नीचे करके और आंखें बंद करके आकाश में स्थित चंद्रमा को आईना दिखाइए तथा आईने को चौराहे पर ले जाकर फैंक दीजिए।

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गणेश जी की प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति पर 21 लड्डूओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू गणेश जी की प्रतिमा के पास रखकर शेष ब्राह्मणों में बांट दें।
शाम के समय सूर्यास्त से पहले किसी पात्र में दही में शक्कर फेंट लें, इस घोल को किसी दोने में रख लें तथा इस घोले में अपनी शक्ल देखकर अपनी समस्या मन ही मन कहें तत्पश्चात इस घोल को किसी श्वान को खिला दें।

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