सुनील दत्त के कारण मिला बॉलीवुड को मशहूर कॉमेडियन जॉनी लीवर

www.khaskhabar.com | Published : शनिवार, 16 सितम्बर 2017, 10:24 AM (IST)

उनकी गोल आंखों में हंसी के रंग के इतने शेड्स छुपे हुए हैं जिसको फिल्म जगत आज भी परत दर परत निकालने में व्यस्त हैं। हंसाने के अंदाज इतने दिलकश की मानों उदास चेहरे के लिए वो दवा हो। जॉनी लीवर का अंदाज बेहद ही निराला है। लगभग तीन सौ से ऊपर फिल्म करने वाले जॉनी लीवर ने वैसे तो 1981 में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कर दी थी लेकिन सफलता की सीढ़ी चढ़ने में उन्हें छह साल और लग गए। ये महज इत्तेफाक था कि मशहूर कामेडियन जॉनी वॉकर के करियर में फिल्म प्यासा के गाने ‘सर जो तेरा चकराए’ से उनको जो शोहरत मिली थी कुछ वैसा ही जॉनी लीवर के साथ हुआ। 1978 में रिलीज हुई फिल्म जलवा जिसमें नसीरुद्दीन शाह एक जुदा अंदाज में नजए आए थे, जलवा ने जॉनी को एक नई पहचान दी थी और इस फिल्म में जॉनी ने एक दक्षिण भारतीय मालिश वाले की भूमिका अदा की थी। जॉन प्रकाश राव उर्फ जॉनी लीवर हिंदी सिनेमा में अपनी कॉमिक टाइमिंग के लिए प्रसिद्ध हैं। जॉनी लीवर भारत के पहले स्टैंड कॉमेडियन हैं। उन्हें अब तक 13 बार फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है।


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पृष्ठभूमि

जॉनी लीवर का जन्म आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले मे सन 14 अगस्त 1956 में हुआ था। जॉनी लीवर हिन्दी फिल्म के एक प्रसिद्ध हास्य अभिनेता है। लीवर के पिता प्रकाश राव जनमूला हिंदुस्तान लीवर फैक्ट्री में काम करते थे। जॉनी लीवर का बचपन मुंबई के धारवी इलाके बिता। वह अपने घर में तीन बहनों और दो भाईयों में सबसे बड़े हैं। जॉनी लीवर का जन्म एक बेहद ही गरीब परिवार में हुआ था। घर में बड़े होने के कारण घर की स्थिति को समझते हुए जॉनी भी अपने पिता के साथ हिन्दुस्तान लीवर फैक्ट्री में काम करने लगे।

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पेन बेचने के लिए जॉनी की बचपन की कला ने उनका खूब साथ दिया। अमिताभ बच्चन, जितेंद्र और अशोक कुमार की आवाज निकालकर वो पेन बेचते थे और देखते ही देखते दिन ने उनकी कमाई 250 रुपए तक पहुंच गई। हर दिन अपने डांस से 5 रुपए कमाने वाले जॉनी के लिए ये एक बड़ी बात थी। सिलसिला निकल चला था और इसके बाद जॉनी फंक्शन, आर्केस्ट्रा इत्यादि में परफार्म करने लगे। वहीं पर उनके दो दोस्तों ने उनकी मुलाकात कल्याणजी आनंदजी भाइयों से करवाई। उनकी प्रतिभा को पहचानने ने उनको ज्यादा वक्त नहीं लगा और आगे चलकर वो उनके वर्ल्ड टूर का हिस्सा बन गए। इस बीच जॉनी की पैठ फिल्म जगत में बनती गई और इस वजह से 1975 में उन्होंने जो नौकरी पकड़ी थी उसे 1981 में छोड़ दिया।

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कैसे पड़ा जॉनी लीवर नाम
जॉनी का असल नाम जॉन राव प्रकाश राव जानुमाला है। जॉनी भी अपने पिता के साथ हिन्दुस्तान लीवर फैक्ट्री में काम करते थे। बचपन से ही दूसरों को हंसाने की कला में महारत हासिल थी, जॉनी ये व्यवहार वहां भी बदस्तूर जारी रहा। अपनी कंपनी के एक फंक्शन के दौरान जब उन्होंने अपने वरिष्ठ अफसरों को मिमिक्री किया तो वहां हंसी का फव्वारा निकल पड़ा। फंक्शन के तुरंत बाद यूनियन लीडर सुदेश भोंसले स्टेज पर चढ़ गए और माइक लेकर एलान कर दिया कि आगे से सभी लोग जॉन को लीवर बुलाएंगे क्योंकि उसने हिंदुस्तान लीवर के सभी अधिकारियों की नकल की। इस वाकिए के बाद उनके सहकर्मियों ने उनको जॉनी लीवर बुलाना शुरु कर दिया।

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पढ़ाई

जॉनी ने अपनी शुरूआती पढ़ाई आंध्र एजुकेशन सोसाइटी हाईस्कूल से की। उनके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने कारण जॉनी सिर्फ सातवीं तक शिक्षा ग्रहण कर सके। उसके बाद घर के जीवन-यापन के लिए उन्होंने काम करना शुरू कर दिया।


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शादी

जॉनी लीवर की शादी सुजाता से हुई है। उनके एक बेटा और एक बेटी है। बेटी जैमी जोकि एक स्टैंड-अप कमेडियन है। बेटे का नाम जेस है।

फिल्मी सफर

जॉनी लीवर को फिल्म स्टारों की मिमिक्री करने में महारत हासिल थी। उनकी इसी खासियत ने उन्हें स्टेज शो करने का मौका दिया। ऐसे ही एक स्टेज शो में सुनील दत्त की उनपर नजर पड़ी। उन्होंने जॉनी लीवर को फिल्म ‘दर्द का रिश्ता’ में पहला ब्रेक मिला और आज यह सिलसिला 350 से अधिक फिल्मों तक पहुंच गया है। ‘दर्द का रिश्ता’ के बाद वह ‘जलवा’ में नसीरुद्दीन शाह के साथ देखे गए, लेकिन उनकी पहली बडी सफलता ‘बाजीगर’ के साथ शुरू हुई। उसके बाद वह लगभग एक सहायक अभिनेता के रूप में हर फिल्म में हास्य अभिनेता के रोल में देखे गए। उनकी पहली फीचर फिल्म कभी तमिल ‘अनब्रिक्कु अल्लाविल्लाई’ है।


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छोटा परदा

जॉनी लिवर सिर्फ बड़े पर्दे पर ही नहीं छोटे पर्दे भी अपने कॉमेडी के जलवे दिखा चुके हैं। जॉनी सीने एंड टीवी आर्टिस्ट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट हैं। इसके अलावा वह मिमक्री आर्टिस्ट एसोसिएशन मुंबई के भी अध्यक्ष हैं।


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प्रसिद्ध फिल्में

बाज़ीगर,बादशाह, तेजाब, सूर्य, इलाका, काला बाजार, बंद दरवाजा, किशन कन्हैया, हमला, चमत्कार, इंसानियत का देवता, रूप की रानी रानी-चोरों का राजा, मस्ती, कानून, अंजाम, मैं खिलाडी तू अनाड़ी, डर, इंडियन, सपूत, बारूद, कुछ कुछ होता है, सिर्फ तुम, बादशाह, हेलो ब्रदर, क्रोध, करन अर्जुन, 36 चाइना टाउन, अजनबी, यस बॉस, नायक: द रियल हीरो, फिर हेरा फेरी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी, फर्ज, आशिक, चुपके-चुपके, राजा हिन्दुस्तानी, कोई... मिल गया जैसी और भी बहुत सी फिल्में की।

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