राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद की तेज सुनवाई पर जल्द फैसला लेगा SC

www.khaskhabar.com | Published : शुक्रवार, 21 जुलाई 2017, 4:10 PM (IST)

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट अब राम मंदिर विवाद के मामले में तेजी से सुनवाई के बारे में फैसला लेगा। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि हम बाबरी मस्जिद विवाद में जल्द सुनवाई किए जाने पर फैसला करेंगे। आपको बता दें कि इस मामले में याचिकाकर्ता बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की अपील की थी। इस पर चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अगुवाई वाली बेंच ने शुक्रवार को कहा कि हम जल्दी सुनवाई के लिए लिस्ट करने के मुद्दे पर फैसला लेंगे। हालांकि, इससे पहले 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद मामले में सुब्रमण्यम स्वामी की जल्दी सुनवाई की मांग को यह कहते हुए ठुकरा दिया था कि हमें पता नहीं था कि आप मुख्य पक्षकार नहीं है। हमें मीडिया से पता चला कि आप पक्षकार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामला उठाते हुए बीजेपी नेता स्वामी ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ जो मुख्य अपील है, वह पिछले सात सालों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और मामले में जल्दी सुनवाई की दरकार है। उनकी ओर से इस मामले में पूजा स्थल पर पूजा अर्चना के लिए गुहार लगाई गई है। इस दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ओर अन्य पक्षकार के वकील ने भी कहा था कि उन्हें मीडिया से पता चला कि इन्होंने केस को सुनवाई के लिए उठाया है, जबकि वह पक्षकार नहीं हैं और न ही उन्होंने इस बारे में बताया। तब स्वामी ने कहा कि उन्होंने ये मामला इसलिए उठाया था कि उन्हें मंदिर में पूजा करनी है। उन्हें संपत्ति विवाद से मतलब नहीं है। उनकी आस्था प्रभावित हुई है। मैं पूजा नही कर पा रहा हूं। हमारा मूल अधिकार प्रभावित हुआ है। हमें पूजा के लिए मंदिर की जरूरत है।

कोर्ट ने कहा आप जल्दी सुनवाई के लिए तारीख की मांग कर रहे हैं पर हमारे पास अभी तारीख नहीं है। आपको बता दें कि समय-समय पर इस मामले में पक्षकारों की ओर से मामले की जल्दी सुनवाई की गुहार लगाई जाती रही है। 10 मई 2015 को एक पक्षकार ने मामले में जल्दी सुनवाई का आग्रह किया था तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मामला रूटीन में जब सुनवाई के लिए आएगा तब सुनवाई की जाएगी। फिर सुप्रीम कोर्ट में स्वामी की ओर से 21 मार्च को जल्दी सुनवाई का आग्रह किया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च को मांग ठुकरा दी थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनउ पीठ ने 2010 में अपने आदेश में उत्तर प्रदेश के अयोध्या के 2.77 एकड़ विवादित क्षेत्र को तीन भागों में बांटने का आदेश दिया था।

क्या है पूरा मामला

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राम मंदिर के लिए होने वाले आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दिवानी मुकदमा भी चला। राम मंदिर बनाम बाबरी मस्जिद विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला दिया था। इसके तहत फैसला दिया गया था कि विवादित भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाए, जिस जगह रामलला की मूर्ति है, उसे रामलला विराजमान को दिया जाए।

इसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने आया। अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान व हिंदू महासभा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। वहीं दूसरी तरफ सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल कर दी। इसके बाद इस मामले में कई और पक्षकारों ने याचिकाएं लगाई। सुप्रीम कोर्ट में ये मामला काफी समय से लटका हुआ है, लेकिन अभी तक सुनवाई पूरी नहीं हो पाई है।

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