बिहार में महागठबंधन पर और गहराया संकट, सोनिया से नहीं मिलेंगे नीतीश!

www.khaskhabar.com | Published : सोमवार, 17 जुलाई 2017, 4:45 PM (IST)

पटना। बिहार में सत्ताधारी गठबंधन पर संकट के बादल गहराते जा रहे है। हालांकि, अब तक कांग्रेस पर्दे के पीछे से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू चीफ लालू प्रसाद यादव के बीच सुलह की कोशिश कराने में लगी हुई थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक अब महागठबंधन पर सकंट के बादल इसलिए गहराते जा रहे है, क्योंकि नीतीश कुमार ने सोनिया गांधी से नहीं मिलने का मन बना लिया है। यह भी माना जा रहा है कि अगर सरकार पर संकट आया तो नीतीश कुमार खुद भी पद छोड़ सकते हैं। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि बिहार में सत्ताधारी महागठबंधन इस मुसीबत से कैसे पार पाएगा।

क्या बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव खुद इस्तीफा देंगे या नीतीश कुमार उन्हें बर्खास्त करेंगे। कांग्रेस भी इस पर विचार कर रही है कि तेजस्वी यादव को नीतीश कुमार द्वारा हटाया जा सकता है या गठबंधन धर्म को समझते हुए तेजस्वी स्वयं ही पद छोड़ दें। दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्य की गठबंधन सरकार में सहयोगी लालू प्रसाद से मिल बैठ कर गठबंधन विवाद को सुलझाने का अनुरोध कर रहे है। जनता दल (युनाइटेड) ने तो साफ कह दिया है कि महागठबंधन में सब कुछ ठीक है। इससे पहले जद (यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा था कि गठबंधन सरकारों में तनाव और दबाव नजर आ सकता है, लेकिन महागठबंधन में सब कुछ ठीक है। जद (यू) के अध्यक्ष नीतीश का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि काबिल नेतृत्व इस तरह के विवादों को निपटाने में सक्षम होता है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा बिहार के उप-मुख्यमंत्री लालू प्रसाद के छोटे बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किए जाने के बाद से महागठबंधन में दरारें दिखाई पडऩे लगी हैं। लालू और नीतीश कुमार को मिल-बैठ कर, बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान निकालना चाहिए। आपको बता दें कि बिहार की सरकार तीन पार्टियों द्वारा चलाई जा रही है। तेजस्वी के पिता लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पास राज्य में सबसे ज़्यादा विधायक हैं।

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इसके बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का नंबर आता है और तीसरा नंबर कांग्रेस का आता है। गौरतलब है कि सीबीआई ने लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव सहित लालू के परिवार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने सात जुलाई को पटना सहित देशभर के 12 स्थानों पर छापेमारी की थी। यह मामला वर्ष 2004 का है, जब लालू प्रसाद देश के रेलमंत्री थे।

आरोप है कि उन्होंने रेलवे के दो होटल एक निजी कंपनी को लीज पर दिलाए और उसकी एवज में उन्हें पटना में तीन एकड़ जमीन दी गई। भ्रष्टाचार के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जद (यू) मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बेदाग छवि को लेकर तेजस्वी पर इस्तीफे के लिए दबाव बनाए हुए है। वहीं, लालू प्रसाद साफ कह चुके है कि उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद के इस्तीफे का प्रश्न ही नहीं उठता।

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